

वैरागन बहनों के दीक्षा मार्ग पर अग्रसर होने पर तिलक अभिनंदन समारोह सम्पन्न
रिपोर्टर इन्द्र जीत
लोकेशन कालावाली
पुन्यवानी से मिलता है संयम का मार्ग:स्वाति जी महाराज
कालांवाली, 16 नवंबर — जैन समाज की आध्यात्मिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण एवं गौरवशाली अवसर जुड़ने जा रहा है। संथारा साधिका उपप्रवर्तिनी महासाध्वी श्री स्वर्णकान्ता जी महाराज साहब, उत्तर भारतीय प्रवर्तनी महासाध्वी श्री सुधा जी महाराज साहब तथा पंजाब वीरांगना कोकिल कंठी महासाध्वी श्री किरण जी महाराज साहब की सुशिष्या एवं पंजाब सिंहनी महासाध्वी श्री स्वाति जी महाराज साहब के सानिध्य में साधना पथ पर अग्रसर वैरागन आराध्या जैन एवं कृतिका जैन आगामी 22 फरवरी 2026 को मलेरकोटला में दीक्षा ग्रहण करने जा रही हैं। इसी उपलक्ष्य में रविवार को जैन समाज द्वारा भव्य तिलक अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया जिसमें भारी संख्या में समाजजन उपस्थित हुए।
समाज के अनुसार यह अवसर परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक सौभाग्य का क्षण है। दीक्षार्थिनी बहनों के कठिन और त्यागमय मार्ग पर अग्रसर होने के संकल्प का स्वागत समाजजनों ने तिलक, वंदन और मंगल आशीर्वाद के साथ किया।
सभा के प्रधान सन्दीप जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि संयम और त्याग का मार्ग अत्यंत कठिन होता है और युवा वैरागण बहनों का यह दृढ़ निर्णय समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि दीक्षा केवल आध्यात्मिक उत्थान का अवसर नहीं बल्कि आत्मकल्याण की अनमोल यात्रा है।
एस.एस. जैन सभा के महामंत्री राकेश जैन ने कहा कि दीक्षा पथ साधना, समर्पण और कठोर अनुशासन का प्रतीक है। गुरु भक्त नरेश गर्ग जैन ने भी कहा कि साधना का मार्ग कठिन होता है, किंतु दृढ़ इच्छा-शक्ति और गुरु-विधा से हर बाधा सरल हो जाती है।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में पंजाब सिंहनी महासाध्वी श्री स्वाति जी महाराज साहब का मंगल प्रवचन रहा। उन्होंने फरमाया कि पुण्यवाणी से ही ऐसा सौभाग्य प्राप्त होता है। अपना घर-बार छोड़कर संयममार्ग में प्रवेश करना अत्यंत साहस और अध्यात्मिक शक्ति की माँग करता है। यह मार्ग भले ही कांटों भरा हो, लेकिन मोक्षमार्ग की दिशा में सर्वोत्तम पथ है।
उन्होंने यह भी कहा कि दीक्षार्थी की अनुमोदना करने से कर्मों की निर्जरा होती है, इसलिए समाजजनों को इस पुण्य अवसर में भागीदारी अवश्य निभानी चाहिए।
समारोह में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। युवती मंडली की ओर से आयुषी जैन, सीरत जैन और निकिता जैन नवी ने जय हो संयमी बहन की भजन की प्रस्तुति दी, जिसने सभी को भावविभोर कर दिया। वैशाली जैन, लबलेश जैन और भजन सम्राट संजीव जैन ने भजन प्रस्तुत कर वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया। पार्षद पूर्ण नागर ने “बेटिया घर की शान होती है, भजन प्रस्तुत कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
दीक्षार्थिनी बहनों आराध्या जैन और कृतिका जैन ने उपस्थित समाजजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे दोनों 22 फरवरी को मलेरकोटला पहुँचकर उनके दीक्षा समारोह में आशीर्वाद प्रदान करने हेतु समाजजनों को हार्दिक रूप से आमंत्रित करती हैं।
समारोह में बड़ी संख्या में गणमान्य सदस्य एवं सामाजिक पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें जैन सभा के प्रधान सन्दीप जैन, महामंत्री राकेश जैन, युवक मंडल के प्रधान भूषण जैन, आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान प्रदीप जैन, संरक्षक पूर्ण जैन, पारस जैन, नरेश गर्ग जैन, साई दास सेतिया, लवलीन जैन, लवली स्टूडियो, सुख राम फत्ता, मखन जैन, पवन जैन, संजीव जैन, मोजी जैन, प्यारा जैन, पार्षद पूर्ण नागर, नवकार समिति के प्रधान दीपक फत्ता, गौतम जैन, अंग्रेज जैन लंबू, काका जैन, शम्मी जैन, सोनू जैन तेरापंथी सहित अनेक वरिष्ठ सदस्य शामिल रहे।
महिला मंडल की प्रधान, तपस्विनी सीरत जैन, आयुषी जैन, निकिता नवी जैन, निर्मला जैन, बबली जैन, मीनू जैन, बबीता जैन, अंजू जैन, तनुजा जैन, कंचन जैन, वंदना जैन और निधि जैन ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
समारोह के अंत में महासाध्वी श्री अर्चना जी महाराज साहब और महासाध्वी श्री राधिका जी महाराज साहब, श्री खुशी जी महाराज साहब,श्री वाचना जी महाराज साहब ने दीक्षा प्रसंग पर अपने विचार व्यक्त किए और समाजजनों से मलेरकोटला पहुँचकर दीक्षार्थी बहनों की अनुमोदना करने की प्रेरणा दी।
तिलक अभिनंदन समारोह श्रद्धा, आनंद और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा। दीक्षार्थिनी आराध्या जैन एवं कृतिका जैन का यह संयम संकल्प जैन समाज की विरासत और आध्यात्मिक मूल्यों को नई दिशा प्रदान करने वाला सिद्ध होगा। समाज अब उत्सुकता के साथ 22 फरवरी 2026 के उस पावन क्षण का इंतजार कर रहा है जब दोनों वैरागण बहनें संयम और मोक्षमार्ग की सर्वोच्च यात्रा दीक्षा को अंगीकार करेंगी।










