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मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के समक्ष बालाघाट में करोड़ो के इनामी नक्सलियों का आत्मसमर्पण।

हाल ही में मध्य प्रदेश के बालाघाट में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में कई इनामी नक्सलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। यह राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा नक्सली सरेंडर माना जा रहा है। ​इस घटनाक्रम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: ​1. ऐतिहासिक आत्मसमर्पण (दिसंबर 2025) ​तारीख: 7 दिसंबर 2025 (रविवार) ​स्थान: बालाघाट, मध्य प्रदेश (पुलिस लाइन या विशेष समारोह स्थल) ​संख्या: रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 10 से 11 हार्डकोर नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। ​मुख्य नक्सली कमांडर: इस समूह का नेतृत्व कबीर (उर्फ सुरेंद्र) कर रहा था, जो 'कान्हा-भोरमदेव (KB) डिवीजन' का कमांडर है और 'MMC (मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़) जोन' का सक्रिय सदस्य है। कबीर पर अकेले लगभग 77 लाख रुपये (विभिन्न राज्यों को मिलाकर) का इनाम घोषित था। ​2. आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल प्रमुख नाम ​समूह में कई इनामी नक्सली शामिल हैं, जिन पर कुल मिलाकर करोड़ों रुपये का इनाम था। कुछ प्रमुख नाम जो चर्चा में हैं: ​कबीर (सुरेंद्र): KB डिवीजन का प्रमुख। ​अन्य सदस्यों में खटिया मोचा एरिया कमेटी और विस्तार प्लाटून के सदस्य शामिल हैं। इनमें पुरुष और महिला दोनों नक्सली शामिल हैं। ​3. मुख्यमंत्री का संदेश ​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मौके पर नक्सलियों का मुख्यधारा में स्वागत किया और राज्य सरकार की 'नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2023' के तहत उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया। ​चेतावनी: सीएम ने स्पष्ट संदेश दिया कि "हिंसा का रास्ता छोड़ दें, वरना परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।" उन्होंने कहा कि सरकार मार्च 2026 तक राज्य को नक्सल मुक्त बनाने के लिए संकल्पित है। ​पुनर्वास: सरेंडर करने वाले नक्सलियों को आवास, रोजगार और विवाह जैसी सुविधाओं के साथ आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। ​4. पुलिस की सफलता (हॉक फोर्स) ​यह मध्य प्रदेश पुलिस और विशेष रूप से हॉक फोर्स (Hawk Force) के लिए एक बड़ी कामयाबी है। पिछले कुछ समय से बालाघाट और मंडला के जंगलों में पुलिस का दबाव बढ़ा था, जिससे नक्सलियों की रसद और नेटवर्क टूट रहे थे। इसी दबाव और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन्होंने सरेंडर का फैसला किया। ​निष्कर्ष: यह आत्मसमर्पण मध्य प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि 'कबीर' जैसे बड़े लीडर का सरेंडर करना नक्सली संगठन की कमर टूटने जैसा है। ​क्या आप इस सरेंडर नीति के तहत मिलने वाली सुविधाओं या इनामी राशि के बारे में और विस्तृत जानकारी चाहते हैं?

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मध्य प्रदेश के बालाघाट में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में कई इनामी नक्सलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। यह राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा नक्सली सरेंडर माना जा रहा है।

​इस घटनाक्रम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

​1. ऐतिहासिक आत्मसमर्पण (दिसंबर 2025)

  • तारीख: 7 दिसंबर 2025 (रविवार)
  • स्थान: बालाघाट, मध्य प्रदेश (पुलिस लाइन या विशेष समारोह स्थल)
  • संख्या: रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 10 से 11 हार्डकोर नक्सलियों ने हथियार डाले हैं।
  • मुख्य नक्सली कमांडर: इस समूह का नेतृत्व कबीर (उर्फ सुरेंद्र) कर रहा था, जो ‘कान्हा-भोरमदेव (KB) डिवीजन’ का कमांडर है और ‘MMC (मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़) जोन’ का सक्रिय सदस्य है। कबीर पर अकेले लगभग 77 लाख रुपये (विभिन्न राज्यों को मिलाकर) का इनाम घोषित था।

​2. आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल प्रमुख नाम

​समूह में कई इनामी नक्सली शामिल हैं, जिन पर कुल मिलाकर करोड़ों रुपये का इनाम था। कुछ प्रमुख नाम जो चर्चा में हैं:

  • कबीर (सुरेंद्र): KB डिवीजन का प्रमुख।
  • ​अन्य सदस्यों में खटिया मोचा एरिया कमेटी और विस्तार प्लाटून के सदस्य शामिल हैं। इनमें पुरुष और महिला दोनों नक्सली शामिल हैं।

​3. मुख्यमंत्री का संदेश

​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मौके पर नक्सलियों का मुख्यधारा में स्वागत किया और राज्य सरकार की ‘नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2023’ के तहत उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया।

  • चेतावनी: सीएम ने स्पष्ट संदेश दिया कि “हिंसा का रास्ता छोड़ दें, वरना परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।” उन्होंने कहा कि सरकार मार्च 2026 तक राज्य को नक्सल मुक्त बनाने के लिए संकल्पित है।
  • पुनर्वास: सरेंडर करने वाले नक्सलियों को आवास, रोजगार और विवाह जैसी सुविधाओं के साथ आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।

​4. पुलिस की सफलता (हॉक फोर्स)

​यह मध्य प्रदेश पुलिस और विशेष रूप से हॉक फोर्स (Hawk Force) के लिए एक बड़ी कामयाबी है। पिछले कुछ समय से बालाघाट और मंडला के जंगलों में पुलिस का दबाव बढ़ा था, जिससे नक्सलियों की रसद और नेटवर्क टूट रहे थे। इसी दबाव और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन्होंने सरेंडर का फैसला किया।

यह आत्मसमर्पण मध्य प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि ‘कबीर’ जैसे बड़े लीडर का सरेंडर करना नक्सली संगठन की कमर टूटने जैसा ।

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