।। पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को चलती ट्रेन से जबरन उतारा गया; देवरिया FIR में हुई गिरफ्तारी।।
।। घटना शाहजहांपुर के आसपास हुई, जिसने उनके परिवार और समर्थकों के बीच गंभीर चिंता और अफरा-तफरी।।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बड़ी खबर-
⭐ पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर को कहां ले गई यूपी पुलिस?
⭐ उनका ट्विटर अकाउंट किसने डिलीट किया?
यह सारे गंभीर सवाल उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के एक संदेश से खड़े हो गए हैं। मैं वो संदेश ज्यों का त्यों पेस्ट कर रहा हूँ जो अमिताभ जी की पत्नी नूतन जी की ओर से भेजा गया है-“अमिताभ जी लखनऊ से दिल्ली आ रहे थे तो उन्हें शाहजहांपुर के आसपास कई लोगों ने ट्रेन से जबरदस्ती उतार लिया पूछने पर कहां ले जा रहे हैं कुछ नही बताया। ट्रेन के अधिकारियों से संपर्क करने पर मात्र इतना पता चला कि 10 से 15 लोग थे जो शायद सिविल पुलिस से थे।”हैरानी की बात तो ये है कि रातों रात अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर का ट्विटर अकाउंट कहां गया। अगर डिलीट या डिसएबल हुआ तो किसने डिलीट या डिसएबल करवाया।आखिर उनके परिवार को अभी तक सूचना क्यों नहीं दी गई है?
यूपी पुलिस को इस बाबत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अमिताभ ठाकुर लंबे समय से योगी सरकार की आँख की किरकरी बने हुए थे। वह STF चीफ से लेकर योगी सरकार और उनके दफ़्तर तक लगातार चुभते हुए सवाल पूछ रहे थे।
।। पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को चलती ट्रेन से जबरन उतारा गया; देवरिया FIR में हुई गिरफ्तारी।।
लखनऊ/नई दिल्ली/शाहजहांपुर, 10 दिसंबर 2025
भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए लगातार संघर्ष करने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को आज सुबह लखनऊ से दिल्ली आते समय चलती ट्रेन से कथित तौर पर जबरदस्ती उतार लिया गया। यह घटना शाहजहांपुर के आसपास हुई, जिसने उनके परिवार और समर्थकों के बीच गंभीर चिंता और अफरा-तफरी पैदा कर दी।
उनकी पत्नी, वरिष्ठ अधिवक्ता नूतन ठाकुर, ने इस कार्रवाई को अपारदर्शी और रहस्यमय बताते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। लंबी अनिश्चितता के बाद, देर शाम लखनऊ पुलिस ने पुष्टि की कि यह गिरफ्तारी देवरिया में दर्ज एक पुराने मुकदमे के संबंध में की गई है।
⭐ ट्रेन से अचानक और जबरन गिरफ्तारी—
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमिताभ ठाकुर लखनऊ से दिल्ली के लिए ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। सुबह शाहजहांपुर के पास 10 से 15 लोगों के एक समूह ने उन्हें ट्रेन से उतार लिया। इस समूह ने अपनी पहचान या गिरफ्तारी का कारण बताने से इनकार कर दिया, जिससे पूरी प्रक्रिया में संदेह पैदा हुआ।
ट्रेन अधिकारियों से संपर्क साधने पर, मात्र इतनी ही जानकारी मिली कि गिरफ्तार करने वाले लोग ‘सिविल पुलिस’ से संबंधित थे और उनका रेलवे पुलिस से कोई वास्ता नहीं था। यह अनिश्चितता बनी रही कि उन्हें किस जिले की पुलिस ने पकड़ा है और किस मामले में ले जाया जा रहा है।
अमिताभ ठाकुर की पत्नी, नूतन ठाकुर, ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से तत्काल जानकारी साझा करते हुए अपने पति की सुरक्षा पर आशंका जताई और उनके समर्थकों से मदद की अपील की।
⭐ देर शाम हुई गिरफ्तारी की पुष्टि और देवरिया FIR की पृष्ठभूमि—
दिनभर की अनिश्चितता और तनाव के बाद, देर शाम लखनऊ के तालकटोरा थाने के प्रभारी ने नूतन ठाकुर को फोन पर आधिकारिक सूचना दी। उन्होंने बताया कि अमिताभ ठाकुर को कुछ माह पूर्व देवरिया में दर्ज एक मुकदमे के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है और उन्हें देवरिया ले जाया जा रहा है।
⭐ देवरिया एफआईआर की पृष्ठभूमि:—
यह गिरफ्तारी देवरिया में दर्ज एक अपहरण और दुष्कर्म पीड़िता से जुड़े मामले की एफआईआर से जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर ने इस मामले में जांच अधिकारियों पर दबाव बनाने और पीड़िता को बयान बदलने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था। इसी संबंध में पुलिस ने उन पर और नूतन ठाकुर पर कथित तौर पर दबाव डालने का मामला दर्ज किया था।
नूतन ठाकुर ने इस घटनाक्रम पर गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा: “देवरिया एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही पूरे मामले को रहस्य बनाकर रखा गया था। मैंने कई बार जांच अधिकारी (आईओ) के बारे में पता करने की कोशिश की ताकि हम अपना कानूनी पक्ष रख सकें, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी गई। और आज, उन्हें इस तरह जबरदस्ती और अलोकतांत्रिक तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया।” यह भी जानकारी मिली है कि देवरिया की इस एफआईआर में अधिवक्ता नूतन ठाकुर को भी आरोपी बनाया गया है।
⭐ कानूनी और राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया—
अमिताभ ठाकुर, जो अपनी निर्भीक कार्यशैली और सत्ता के विरुद्ध खड़े होने के लिए जाने जाते हैं, की गिरफ्तारी ने कानूनी और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उनके समर्थकों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, इसे कानून के शासन का उल्लंघन और प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है।
पारदर्शिता का अभाव: आलोचकों का कहना है कि एक पूर्व आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी में जिस तरह से डी.के. बसु दिशानिर्देशों (गिरफ्तारी का कारण बताना, मेमो तैयार करना, परिजनों को तुरंत सूचित करना) का उल्लंघन किया गया है, वह पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
उत्पीड़न का संदेह: देवरिया मामले की जांच को जानबूझ कर गुप्त रखने और अब अचानक गिरफ्तारी करने के तरीके से यह संदेह गहरा गया है कि यह कार्रवाई अमिताभ ठाकुर को उनके भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष के लिए चुप कराने की कोशिश हो सकती है।
अब नूतन ठाकुर और उनकी कानूनी टीम इस मामले में हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका सहित अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है, ताकि गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी जा सके और अमिताभ ठाकुर को जल्द से जल्द न्यायालय के समक्ष पेश किया जा सके।
अगला कदम: देवरिया पुलिस स्टेशन पहुंचने पर अमिताभ ठाकुर को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। इस दौरान गिरफ्तारी के कारणों और एफआईआर की प्रकृति को सार्वजनिक किए जाने की उम्मीद है।
🚨 अमिताभ ठाकुर पर जिन धाराओं में मामला दर्ज उनमें कितनी सजा?
👉 धारा 419 – किसी दूसरे व्यक्ति का रूप या पहचान (नाम, पद आदि) धारण करके धोखाधड़ी करना।
सजा: 3 वर्ष तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों।
👉 धारा 420 – किसी को धोखा देकर उससे संपत्ति या कोई मूल्यवान वस्तु दिलवाना, या दस्तावेज बनवाना/बदलवाना जिससे आर्थिक हानि हो।
सजा: 7 वर्ष तक की कैद और साथ में जुर्माना; आम तौर पर गंभीर आर्थिक अपराधों में लगती है।
👉 धारा 467 – मूल्यवान सुरक्षा, मालिकाना हक का दस्तावेज, वसीयत, गोद लेने की अनुमति जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी करना।
सजा: आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की कैद और जुर्माना; काफी कठोर धारा मानी जाती है।
👉 धारा 468 – धोखाधड़ी करने के उद्देश्य से कोई जाली दस्तावेज बनाना।
सजा: 7 वर्ष तक की कैद और जुर्माना; आम तौर पर जमानत योग्य नहीं माना जाता।
👉 धारा 471 – किसी जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली की तरह इस्तेमाल करना, जबकि इस्तेमाल करने वाला जानता है कि यह जाली है।
👉 धारा 34 – जब दो या अधिक व्यक्ति समान इरादे से कोई अपराध करते हैं तो हर व्यक्ति को ऐसे माना जाता है जैसे उसने पूरा अपराध स्वयं किया हो।
👉 यह खुद अलग से सजा नहीं देती।
👉 धारा 120बी – दो या अधिक व्यक्तियों की आपराधिक साजिश; यानी किसी अपराध को करने की योजना में शामिल होना।












