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1. GST लागू होने के पश्चात शो-टैक्स की वैधानिकता पर गंभीर प्रश्न

महोदय,

 

सविनय सूचित करना है कि आपके कार्यालय द्वारा निर्गत उपर्युक्त शो-टैक्स नोटिस, जिसमें वित्तीय वर्ष 2025–26 हेतु प्रति शो ₹300/₹200/₹100 की दर से कर जमा करने का निर्देश दिया गया है, वर्तमान कर व्यवस्था, संविधान तथा केंद्र व राज्य सरकार की उद्योग-प्रोत्साहन नीति के प्रतिकूल है। इस संबंध में निम्नलिखित विधिक आपत्तियाँ एवं स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए जाते हैं—

 

1. GST लागू होने के पश्चात शो-टैक्स की वैधानिकता पर गंभीर प्रश्न

 

यह निर्विवाद तथ्य है कि दिनांक 01.07.2017 से भारत में GST अधिनियम, 2017 लागू है, जिसके अंतर्गत मनोरंजन सेवाएँ, सिनेमा प्रदर्शनी एवं टिकट बिक्री पूर्णतः GST के दायरे में आ चुकी हैं।

ऐसी स्थिति में नगर निगम द्वारा शो-टैक्स के नाम पर पृथक कर लगाना “One Nation One Tax” नीति की भावना के विरुद्ध है तथा दोहरे कराधान (Double Taxation) की श्रेणी में आता है, जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक माना है।

 

2. शो-टैक्स ‘कर’ है, शुल्क (Fee) नहीं — सेवा का अभाव

 

आपके नोटिस में शो-टैक्स की वसूली के बदले किसी भी प्रत्यक्ष, विशिष्ट अथवा अतिरिक्त सेवा का उल्लेख नहीं है।

कानून का स्थापित सिद्धांत है कि—

 

“Fee cannot be levied without quid pro quo.”

 

अर्थात जब नगर निगम द्वारा कोई विशेष सेवा प्रदान नहीं की जा रही, तो शो-टैक्स की वसूली मनमानी एवं न्यायिक समीक्षा योग्य है।

 

3. निश्चित प्रति शो कर वास्तविक आय के विरुद्ध, असंगत एवं अन्यायपूर्ण

 

नोटिस में उल्लिखित प्रति शो ₹300/₹200/₹100 की दर व्यावहारिक वास्तविकताओं से पूरी तरह कटे हुए हैं।

यह सर्वविदित है कि—

 

कई बार 4–5 दर्शकों पर भी शो चलाना पड़ता है

 

बिजली, स्टाफ, GST, रखरखाव आदि खर्च यथावत रहते हैं

 

घाटे में शो संचालन एक मजबूरी बन चुका है

 

ऐसी स्थिति में प्रति शो निश्चित कर लगाना अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) तथा Doctrine of Proportionality का स्पष्ट उल्लंघन है।

 

4. राज्य सरकार की उद्योग-प्रोत्साहन नीति की अवहेलना

 

उत्तर प्रदेश सरकार स्वयं मनोरंजन एवं सिनेमा उद्योग को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से—

 

पिक्चर हॉल पर कर की दर मात्र 7% रख चुकी है

 

नए सिनेमा हॉल/पुराने हॉल के संरक्षण की नीति लागू है

 

ऐसी स्थिति में नगर निगम द्वारा अतिरिक्त शो-टैक्स लगाना राज्य नीति के प्रतिकूल एवं प्रशासनिक अतिरेक (Administrative Overreach) है।

 

5. पूर्व वर्षों का भुगतान एवं वैधानिक अनुपालन

 

आपके ही नोटिस के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024–25 तक शो-टैक्स का भुगतान किया जा चुका है।

अतः यह स्पष्ट है कि—

 

कोई जानबूझकर कर चोरी नहीं है

 

प्रतिष्ठान द्वारा कानून का पालन किया गया है

 

इसके बावजूद दंडात्मक भाषा, चेतावनी एवं दबाव बनाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

 

6. सीलिंग/दंड की चेतावनी अवैध एवं असंवैधानिक

 

बिना—

 

कारण बताओ नोटिस

 

व्यक्तिगत सुनवाई

 

लिखित आदेश

 

के सीलिंग या दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी देना Audi Alteram Partem के सिद्धांत का उल्लंघन है और न्यायालय में टिक नहीं पाएगी।

 

अतः निवेदन है कि—

 

उपर्युक्त शो-टैक्स नोटिस को तत्काल प्रभाव से स्थगित/निरस्त किया जाए

 

यदि कर लगाया जाना अनिवार्य हो, तो उसे

 

प्रति व्यक्ति (Per Viewer)

 

वास्तविक टिकट बिक्री

 

या GST टर्नओवर आधारित किया जाए

 

मुझे व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाए

 

अन्यथा विवश होकर माननीय उच्च न्यायालय में संवैधानिक उपचार (Writ Petition) लिया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

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