
सागर/वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * गणतंत्र दिवस भारत के इतिहास का गौरवपूर्ण एवं स्मरणीय दिवस है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को संपूर्ण देश में अत्याधिक सम्मान, उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया जाता है। यह दिन भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला का प्रतीक है, क्योंकि इसी दिन भारत ने अपना स्वयं का संविधान निर्माण करके एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में विश्व में अपनी पहचान स्थापित की है।
गणयतंत्र का शाब्दिक अर्थ है जनता का शासन। यह उस व्यवस्था को दर्शाता है जिसमें देश की सर्वोच्च सत्ता जनता के पास होती है। भारत में नागरिक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों का चयन करते हैं। गणतंत्र दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि देश का शासन किसी राजा या विदेशी सत्ता द्वारा नहीं, बल्कि संविधान और जनता की इच्छा के अनुसार चलता है। गणराज्य शासन व्यवस्था जनता की स्वतंत्रता, समानता एवं अधिकारों की रक्षा करती है। भारत का गणराज्य होना हमारे लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक है।
भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिट्रिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त हुई, किन्तु स्वतंत्रता के पश्चात् भी भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक सुदृढ़ शासन प्रणाली की स्थापना थी। उस समय देश के पास अपना स्थायी संविधान नहीं था और प्रशासन भारत सरकार अधिनियम 1935 के अनुसार चलाया जा रहा था। संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। संविधान सभा में देश के विभिन्न वर्गों, धर्मों और क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल थे, जिससे संविधान सर्वसमावेशी बना। लगभग 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन की अथक मेहनत के बाद संविधान तैयार हुआ। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया। इस तिथि का चयन इसलिए किया गया कि क्योंकि 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य की घोषणा की थी. जो स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्त्वपूर्ण चरण था। भारतीय संविधान विश्व में सबसे लिखित संविधान है। इसमें कुल प्रस्तावना, अनुच्छेद, अनुसूचियाँ और संशोधन शामिल हैं। संविधान की प्रस्तावना भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और एक गणराज्य घोषित करती है तथा सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का आश्वासन देती है। संविधान में नागरिकों को दिये गये मौलिक अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं, वहीं मौलिक कर्तव्य नागरिकों को राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं। नीति-निर्देशक तत्व सरकार को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय की दिशा में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह नई दिल्ली के कर्तव्यपथ पर आयोजित होता है, जिसमें भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेशी अतिथि एवं अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहते हैं। राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है और 21 तोपों की सलामी दी जाती है। इसके पश्चात् भव्य परेड आयोजित होते हैं, जिसमें भारतीय थलसेना, नौसेना, वायुसेना और अर्द्धसैनिक बल अपनी शक्ति, अनुशासन और आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन करते हैं। विभिन्न राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की झाँकियां भारत की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत और विकास कार्यों को दर्शाती है। इस अवसर पर परमवीर चक्र, अशोक चक्र, कीर्ति चक्र जैसे वीरता पुरस्कारों से सैनिकों और नागरिकों को सम्मानित किया जाता है। गणतंत्र दिवस न केवल राष्ट्रीय राजधानी में, बल्कि देश के प्रत्येक कोने में मनाया जाता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, कार्यालयों और सामाजिक संस्थानों में ध्वजारोहण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति गीत, नृत्य, नाटक और भाषण आयोजित किये जाते हैं। छात्रों को संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय मूल्यों के बारे में शिक्षित किया जाता है, जिसमें उनमें जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित होती है। गणतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। हमें संविधान का सम्मान करना चाहिए, कानून का पालन करना चाहिए, जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना चाहिए। भ्रष्टाचार, हिंसा और भेदभाव से दूर रहकर आदर्श नागरिक बनने का प्रयास करना चाहिए। आज के युग में जब भारत विकास और वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है, गणतंत्र दिवस हमें लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। संविधान की भावना को जीवित रखना, सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना एवं समान अवसर प्रदान करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं है, बल्कि भारत की आत्मा का उत्सव है। यह दिन हमें स्वतंत्रता सेनानियों, संविधान निर्माताओं और उन असंख्य वीरों की याद दिलाता है, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम संविधान के आदर्शों का पालन करते हुए भारत को एक सशक्त, समृद्ध और महान राष्ट्र बनायेंगे। “हमारा संविधान हमारा गर्व है और गणतंत्र दिवस हमारी पहचान है












