
वंदेभारतलाइवटीव न्युज, मंगलवार 14 जुलाई 2026
–:: प्राप्त हुई जानककरी के अनुसार रेलवे अधिनियम 1989 में प्रस्तावित संशोधनों के बाद ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर अब रेल नियम तोड़ने वालों के खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल आरपीएफ और अधिकृत रेलवे कर्मचारियों की कार्यवाही पहले से भी अधिक प्रभावशाली हो सकती है। हलांकि नियम संशोधन में आरपीएफ को नई वैधानिक पुलिस शक्तियां दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है, परन्तु मौके पर जुर्माना लगाने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ रैलवे परिसर से हटाए जाने और जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में अदालत में आरोपी को पेश किए जाने की प्रक्रिया को और अधिक स्पष्ट सख्त बनाया गया है। प्रस्तावित संशोधनों में कई अपराधों के लिए पहले मौके पर ही जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। और यदि आरोपी जुर्माना दे देता है तो मामला मौके पर ही खत्म हो सकता है, और यदि आरोपी जुर्माना देने से मना कर देता है तो फिर उसे सक्षम अदालत मे पेश किया जा सकता है।.इन मामलों पर कार्यवाही हो सकती है-: ट्रेन में दूसरे के नाम के टिकट पर यात्रा करने पर, रेलवे स्टेशन परिसर में भिक्षावृती करने पर, बिना वैध लायसेंस के हाॅकिंग पर, नशे की हालत में हंगामा और अभद्र व्यवहार करने पर, ट्रेन में महिलाओं के लिए आरक्षित कोच मे पुरुषों के यात्रा करने पर, अनधिकृत रूप से रेलवे-स्टेशन परिसर में घूमते हुए पाए जाने पर, रेलवे परिसर में गलत तरीके से वाहन पार्किंग करने और ट्रैफिक नियम तोड़ने पर, प्रतिबंधित सामानों को रेलवे-स्टेशन, ट्रेनों मे लाने पर । अभीतक कई मामलों में आरपीएफ की भूमिका नियम को तोड़ने वालों को गिरफ्तार कर कानूनी कार्यवाही शूरु करने तक ही सीमित रहता थी, मौके पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था शुरु किए जाने के बाद अधिकृत अधिकारी अब मौके पर ही आर्थिक रूप से दंडात्मक कार्यवाही कर सकेंगे। प्रस्तावित संशोधनों में आरपीएफ को नई जांच या गिरफ्तारी की व्यापक शक्तियां नहीं देता है। यह बदलाव प्रमुख रूप से मौके पर जुर्माना वसूलने और अधिनियमों के उल्लंघन पर त्वरित कार्यवाही की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। इन नए नियमों से ट्रेनें और रेलवे-स्टेशनों पर अनुशासन को बनाए रखने में कफी हद तक सुधार आने की उम्मीद की जा सकती है।







