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बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन तेज, आंदोलन स्वरूपी महायज्ञ में सरकार को जगाने पत्र रूपी आहुति, 500 से अधिक आंदोलनकारी आमरण अनशन पर, राष्ट्रपति व राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

बीकानेर: खेजड़ी बचाओ महापड़ाव में उमड़ा जनसैलाब, बाड़मेर से हजारों पर्यावरण प्रेमी पहुँचे समर्थन में

(पर्यावरण संरक्षण की आवाज — वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज | जनहित की सशक्त पहचान — समृद्ध भारत समाचार पत्र)

ब्यूरो चीफ : मांगीलाल पुत्र श्री पूनमाराम विश्नोई पर्यावरण प्रेमी 
संवाददाता — वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज / समृद्ध भारत समाचार पत्र
पत्रकार, आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता


बीकानेर में चल रहे खेजड़ी बचाओ महापड़ाव आंदोलन ने अब जनआंदोलन का रूप ले लिया है। राजस्थान सहित विशेषकर बाड़मेर जिले से हजारों की संख्या में पर्यावरण प्रेमी, किसान, महिलाएं, युवा एवं संत समाज के लोग आंदोलन स्थल पर पहुँचकर खेजड़ी वृक्षों की रक्षा के लिए एकजुट हो गए हैं। आमरण अनशन पर बैठे आंदोलनकारियों का संकल्प अब सरकार के लिए गंभीर चेतावनी बन चुका है।

बीते कई दिनों से लगातार जारी इस आंदोलन में लगभग 500 से अधिक आंदोलनकारी बिना अन्न-जल के आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारियों की स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, बावजूद इसके वे अपने संकल्प पर अडिग बने हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक खेजड़ी व रोहिड़ा वृक्षों की अंधाधुंध कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

खेजड़ी वृक्ष को राजस्थान की जीवनरेखा, पर्यावरण संतुलन का आधार एवं सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है। इसके बावजूद औद्योगिक परियोजनाओं और विकास योजनाओं के नाम पर लगातार इसकी कटाई की जा रही है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर विषय पर जानबूझकर मौन साधे हुए है।

आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आंदोलनकारियों द्वारा राष्ट्रपति भारत सरकार एवं राज्यपाल राजस्थान सरकार को ज्ञापन भेजा गया है। इस ज्ञापन के माध्यम से खेजड़ी एवं रोहिड़ा वृक्षों की अंधाधुंध कटाई पर तत्काल रोक लगाने, दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करने तथा स्थायी पर्यावरण संरक्षण कानून बनाने की मांग की गई है।

आंदोलनकारियों ने इस पत्र को “आंदोलन रूपी महायज्ञ में आहुति” बताते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल पेड़ों के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

महापड़ाव स्थल पर संत समाज, माताएं-बहनें, छात्र, किसान एवं सामाजिक संगठन निरंतर धरने पर बैठे हैं। धार्मिक प्रवचनों, जनसभाओं एवं जागरूकता अभियानों के माध्यम से आम जनता को इस आंदोलन से जोड़ा जा रहा है। पूरे क्षेत्र में खेजड़ी बचाओ आंदोलन को लेकर जनभावनाएं तीव्र होती जा रही हैं।

स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार केवल कागजी घोषणाओं तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर पर्यावरण विनाश लगातार जारी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र और अधिक संकटग्रस्त हो जाएगा।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र संवाद एवं समाधान नहीं हुआ, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ने के लिए मजबूर होंगे। खेजड़ी बचाओ आंदोलन अब केवल बीकानेर तक सीमित न रहकर पूरे राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण की आवाज बन चुका है।

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