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“बस्ती का ‘बदहाल’ स्वास्थ्य विभाग: विक्रमजोत CHC में कोर्ट के आदेश पर भारी पड़ी बाबू की ‘घूसखोरी

"एरियर के लिए 45 हजार की 'सर्जरी': वायरल वीडियो ने खोली विक्रमजोत CHC के बड़े बाबू की पोल।"

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। भ्रष्टाचार का ‘वेंटिलेटर’ पर स्वास्थ्य विभाग: विक्रमजोत CHC में एरियर के नाम पर 45 हजार की ‘सर्जरी’।।

उत्तर प्रदेश।

बस्ती।। जनपद का स्वास्थ्य विभाग इन दिनों अपनी चिकित्सा सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि ‘नकद नारायण’ की सेवा के लिए सुर्खियों में है। ताजा मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) विक्रमजोत का है, जहां मानवता को शर्मसार करते हुए एक बाबू का रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। यह वीडियो चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि सरकारी दफ्तरों में बिना ‘कमीशन के ईंधन’ के फाइलें एक इंच भी आगे नहीं सरकतीं।

⭐न्यायालय के आदेश पर भारी ‘बाबूगिरी’

हैरानी की बात यह है कि पीड़ित महिला कर्मचारी सुनीता वर्मा के पक्ष में माननीय न्यायालय ने चार हफ्ते के भीतर एरियर भुगतान का आदेश दिया था। लेकिन विक्रमजोत CHC के ‘बड़े बाबू’ प्रदीप श्रीवास्तव के लिए कोर्ट का आदेश महज एक कागज का टुकड़ा साबित हुआ। आरोप है कि कोर्ट के आदेश को अमली जामा पहनाने के बदले बाबू ने 45 हजार रुपये की मांग की।

⭐वीडियो ने खोली पोल, अपनों को ही लूट रहे ‘जिम्मेदार’

भ्रष्टाचार के इस खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब पीड़िता के भाई ने घूस लेते हुए बाबू का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में बाबू की कारस्तानी साफ नजर आ रही है। यह विडंबना ही है कि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने ही साथ काम करने वाले सहयोगियों को लूटने से बाज नहीं आ रहे हैं। जब एक विभागीय कर्मचारी को अपने हक के पैसे के लिए हजारों की रिश्वत देनी पड़ रही है, तो आम जनता का क्या हाल होता होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

⭐साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई का ‘रटा-रटाया’ जवाब

इस पूरे प्रकरण पर जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) बस्ती से बात की गई, तो उन्होंने जांच और साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई का वही पुराना रटा-रटाया आश्वासन दिया। सवाल यह उठता है कि:

😇क्या वीडियो के रूप में मौजूद सीधा साक्ष्य कार्रवाई के लिए काफी नहीं है?

😇क्या जिले के आला अधिकारी अपने मातहतों की इस खुली लूट से अनजान हैं?

😇न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने वाले ऐसे कर्मचारियों पर तत्काल निलंबन की गाज क्यों नहीं गिरती?

 रिपोर्ट शासन-प्रशासन से सवाल करती है कि आखिर कब तक स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का यह ‘संक्रमण’ फैलता रहेगा? क्या पीड़ित सुनीता वर्मा को न्याय मिलेगा या फाइलें फिर किसी और ‘कमीशन’ के इंतजार में दबा दी जाएंगी?

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