
**एक एकड़ में सवा लाख मुनाफा: पाम ऑयल की खेती से बदली किसानों की तकदीर, 35 साल तक देगा लाभ**

तिलक राम पटेल संपादक महासमुन्द वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज चैनल समृद्ध भारत
महासमुंद। किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल – ऑयल पाम योजना जिले में नई उम्मीद बनकर उभरी है। इस योजना के तहत किसान न केवल बंजर भूमि को उपजाऊ बना रहे हैं, बल्कि लाखों रुपये की वार्षिक आय भी अर्जित कर रहे हैं। महासमुंद जिले में वर्तमान में लगभग 400 किसान करीब 450 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती कर रहे हैं।

बंजर जमीन से लाखों की आमदनी तक का सफर
सरायपाली विकासखंड के भलेसर गांव के प्रगतिशील किसान मुकेश चंद्राकर ने वर्ष 2016 में अपनी 33 एकड़ बंजर भूमि पर ऑयल पाम की खेती शुरू की। शासन की योजना से प्रेरित होकर उन्होंने लगभग 1900 पौधे लगाए। योजना के तहत उन्हें पौध, फेंसिंग, रखरखाव और ड्रिप सिंचाई की सुविधा अनुदान पर प्राप्त हुई।
आज उनकी मेहनत रंग ला रही है।
एक पौधे से औसतन 3 हजार रुपये वार्षिक आय
एक एकड़ में लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये का मुनाफा
एक बार लगाए गए पौधे से लगभग 35 वर्षों तक उत्पादन
अंतरवर्तीय खेती से अतिरिक्त आय
मुकेश चंद्राकर ने शुरुआत में पाम के बीच केले की खेती कर करीब डेढ़ लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ अर्जित किया। वर्तमान में वे कोको की खेती कर निजी कंपनियों को उत्पाद बेच रहे हैं, जिससे उनकी आय और बढ़ रही है।
रोजगार का भी बना साधन
पाम खेती ने केवल किसान की आय नहीं बढ़ाई, बल्कि ग्रामीणों को रोजगार भी दिया है। उनके खेत में दो दर्जन से अधिक लोगों को स्थायी काम मिला है। स्थानीय मजदूरों के अनुसार, अब उन्हें रोजगार के लिए बाहर भटकना नहीं पड़ता।
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
किसान मुकेश चंद्राकर बताते हैं कि ऑयल पाम की खेती में
कम पानी
कम खाद
कम कीटनाशक
की आवश्यकता होती है, जबकि उत्पादन और लाभ अधिक मिलता है। यही कारण है कि यह खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन रही है।
योजना से मिल रही हर संभव मदद
सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग श्रीमती पायल साव के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश को पाम ऑयल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत किसानों को
अनुदान
तकनीकी मार्गदर्शन
विपणन सुविधा
प्रदान की जा रही है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने भी किसानों से अधिक से अधिक पाम खेती अपनाने की अपील की है।
कई उद्योगों में उपयोग, बढ़ी मांग
पाम ऑयल का उपयोग खाद्य पदार्थों, साबुन, शैम्पू, सौंदर्य प्रसाधन और औषधि निर्माण में बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
किसानों के लिए नया अवसर
कम लागत, कम श्रम और अधिक मुनाफा देने वाली ऑयल पाम खेती महासमुंद जिले में किसानों की आर्थिक स्थिति बदल रही है। यह पहल न केवल फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित हो रही है।







