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“सरकारी खजाने पर डाका: CMS की मेहरबानी या 50 लाख का भ्रष्टाचार?”

"बस्ती स्वास्थ्य विभाग में 'कमीशन' का खेल: LT की रिपोर्ट रद्दी, निजी लैब से 'यारी' पक्की!"

अजीत मिश्रा (खोजी)

🏥भ्रष्टाचार की ‘पैथोलॉजी’ और सफेदपोशों की मेहरबानी🏥

  • “हर्रैया के ‘लाटसाहब’ डॉक्टर: अस्पताल से गायब, निजी प्रैक्टिस में मशगूल; बाबू की मेज पर तैनात रहती है छुट्टी की अर्जी!”
  • “सफेदपोशों की काली करतूत: गरीबों के हक पर ‘शुभम अग्रवाल’ जैसे ठेकेदारों का कब्जा, कब जागेगा प्रशासन?”
  • “भ्रष्टाचार की पैथोलॉजी: बस्ती मंडल के अस्पतालों में अफसरों और ठेकेदारों की ‘अवैध जुगलबंदी’ का भंडाफोड़!”

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

बस्ती। सरकारी अस्पतालों में ‘गरीबों का इलाज’ महज एक नारा बनकर रह गया है, जबकि हकीकत में ये अस्पताल कुछ रसूखदार अधिकारियों और चहेते निजी ठेकेदारों की ‘कमाई का अड्डा’ बन चुके हैं। ताजा मामला जनपद के स्वास्थ्य महकमे से जुड़ा है, जहाँ CMS (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) और एक निजी POCL लैब के बीच की ‘जुगलबंदी’ अब खुलेआम चर्चा का विषय है। सवाल तीखा है: आखिर ऐसा क्या रिश्ता है कि सरकारी नियमों को ताक पर रखकर एक निजी लैब पर करोड़ों की मेहरबानी बरसाई जा रही है?

💰LT की रिपोर्ट ‘डस्टबिन’ में, चहेते को 50 लाख का तोहफा!

हैरानी की बात यह है कि लैब टेक्नीशियन (LT) ने स्पष्ट रूप से निजी लैब से रीजेंट खरीदने से इनकार किया था। सरकारी मानकों के अनुसार, जब सरकारी पीओ सिटी लैब मौजूद है, तो निजी लैब से खरीदारी का कोई औचित्य नहीं बनता। लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि CMS ने LT की ईमानदारी भरी रिपोर्ट को रद्दी के टोकरे में फेंक दिया और खुद ही 50 लाख रुपये के रीजेंट की खरीद का इंडेंट तैयार कर दिया।

✍️बड़ा सवाल: क्या यह सरकार के 50 लाख रुपये का सीधा चूना नहीं है? आखिर CMS की इस ‘दरियादिली’ के पीछे का असली राज क्या है?

🔥हर्रैया अस्पताल: ‘लाटसाहब’ डॉक्टर और वीआईपी छुट्टियां

भ्रष्टाचार का यह खेल सिर्फ जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं है। हर्रैया अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज चौधरी, जिन्हें जेम (GeM) पोर्टल का प्रभार भी सौंपा गया है, अपनी अलग ही दुनिया में मस्त हैं।

🔥ड्यूटी से नदारद: सप्ताह में बमुश्किल दो दिन अस्पताल आने वाले डॉक्टर साहब बाकी समय अपने निजी अस्पताल ‘बखिरा तिरंगे झंडे के पास’ सेवा देते हैं।

🔥फर्जी हाजिरी का खेल: इनके बिना तारीख वाले प्रार्थना पत्र बाबू बजरंग प्रसाद की मेज पर हमेशा तैयार रहते हैं। जैसे ही कोई उच्चाधिकारी निरीक्षण के लिए आता है, उसी दिन की तारीख डालकर इन्हें ‘आकस्मिक अवकाश’ पर दिखा दिया जाता है।

🔔बाबू और फार्मासिस्टों की समानांतर सरकार

अस्पताल के भीतर बाबू बजरंग प्रसाद और कुछ भ्रष्ट फार्मासिस्टों ने अपना एक अलग सिंडिकेट बना लिया है।

👉सरकारी पर्चों पर बाहर की दवाइयां लिखना।

👉सरकारी काउंटर के बजाय निजी स्टोर संचालित करना।

👉खुद को ‘असली CMS’ से भी ज्यादा पावरफुल समझना।

ये लोग न तो उस सरकार के प्रति वफादार हैं जो इन्हें वेतन देती है, और न ही उन मरीजों के प्रति जिनका ये हक मार रहे हैं। इनकी वफादारी सिर्फ शुभम अग्रवाल जैसे उन ठेकेदारों के प्रति है, जिनके दम पर भ्रष्टाचार की यह इमारत खड़ी है।

🔥कब जागेगा प्रशासन?

बस्ती के स्वास्थ्य विभाग में फैला यह ‘इन्फेक्शन’ अब लाइलाज होता जा रहा है। सीएमएस की मनमानी और रसूखदार डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी ने आम जनता को निजी लैब और महंगे इलाज की आग में झोंक दिया है।

क्या शासन-प्रशासन इन सफेदपोशों पर नकेल कसेगा? या फिर जांच की फाइलें भी किसी बाबू की मेज पर बिना तारीख के दबकर रह जाएंगी?

ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल।

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