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परशुरामपुर गैस एजेंसी: जहाँ सिलेंडर नहीं, सिर्फ ‘धोखा’ मिलता है!

साहब, घर में शादी है, चूल्हा जलने दो! प्रशासन की अनदेखी से परशुरामपुर में हाहाकार।

अजीत मिश्रा (खोजी)

😇बस्ती: भ्रष्टाचार की ‘भट्ठी’ में जलता गरीब का हक, परशुरामपुर गैस एजेंसी बनी ‘धांधली’ का अड्डा😇

🎯कागजों पर ‘फुल’, हकीकत में ‘गुल’: बिना सिलेंडर मिले ही हो रही फर्जी डिलीवरी।

🎯बस्ती में ‘गैस माफिया’ बेलगाम: उपभोक्ताओं की पासबुक छीनकर हो रही गुंडागर्दी।

🎯परशुरामपुर इंडेन एजेंसी पर कालाबाजारी का खेल, क्या सो रहा है जिला प्रशासन?

🎯जीरो टॉलरेंस का निकला दम: परशुरामपुर में दबंगई और धांधली के बीच पिसता गरीब उपभोक्ता।

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

दिनांक: 06 अप्रैल 2026

परशुरामपुर (बस्ती)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन बस्ती जनपद के परशुरामपुर में सरकारी तंत्र की नाक के नीचे ‘इंडेन ग्रामीण वितरक’ एजेंसी गरीब उपभोक्ताओं के निवाले पर डकैती डाल रही है। यहाँ रसोई गैस की आपूर्ति महज एक सुविधा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और अभद्रता का पर्याय बन चुकी है। ग्रामीणों का आक्रोश इस कदर है कि किसी भी वक्त यह असंतोष एक बड़े आंदोलन या बवाल का रूप ले सकता है।

💰’हवा’ में डिलीवर हो रहे सिलेंडर, रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा

खबर की सबसे शर्मनाक तस्वीर यह है कि उपभोक्ताओं को बिना सिलेंडर मिले ही उनके मोबाइल पर ‘डिलीवरी’ का मैसेज आ रहा है। ब्रह्मपुर के आनंद गुप्ता और सेहरिया के सुभाष चंद्र जैसे दर्जनों उपभोक्ता गवाह हैं, जिन्होंने दो-दो दिन तक चिलचिलाती धूप में लाइन लगाई, लेकिन अंत में उनसे कह दिया गया कि आपका सिलेंडर तो पहले ही “डिलीवर” हो चुका है। सवाल यह है कि जब उपभोक्ता लाइन में खड़ा है, तो सिलेंडर किसके घर पहुँचा? क्या यह कालाबाजारी का सीधा खेल नहीं है?

💰पासबुक छीनना और दबंगई: एजेंसी या गुंडों का अड्डा?

पीड़ितों का आरोप है कि एजेंसी संचालक और कर्मचारी न केवल धांधली कर रहे हैं, बल्कि आवाज उठाने पर उपभोक्ताओं के साथ अभद्रता और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। जबरन पासबुक छीनकर उस पर पिछली तारीख की फर्जी एंट्री चढ़ाना अपराध की श्रेणी में आता है। क्या जिला प्रशासन इन “सफेदपोश लुटेरों” को खुली छूट दे चुका है?

💰शादी वाले घर में चूल्हा ठण्डा, प्रशासन मौन

महेवा जीतीपुर की पूजा जैसी बेटियों की व्यथा सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए, सिवाय उन अधिकारियों के जो एयर-कंडीशनर कमरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार करते हैं। जिस घर में बेटी की शादी होने वाली है, वहाँ का परिवार तीन दिनों से चूल्हा छोड़कर गैस की लाइन में खड़ा है।

“साहब, मेरी शादी है, मुझे गैस दिला दो…” यह पुकार परशुरामपुर की प्रशासनिक व्यवस्था के गाल पर एक जोरदार तमाचा है।

💰कालाबाजारी की बू: स्टॉक और वितरण में भारी अंतर

रविवार को 260 सिलेंडरों का स्टॉक बताया गया, लेकिन सोमवार को महज 100 सिलेंडर बांटकर ‘सर्वर डाउन’ का बहाना बना दिया गया। बाकी के 160 सिलेंडर कहाँ गायब हुए? क्या रात के अंधेरे में ये सिलेंडर ऊंचे दामों पर होटलों या माफियाओं को बेच दिए गए? प्रशासन की गहन जांच से यहाँ एक बड़ा ‘गैस घोटाला’ उजागर हो सकता है।

😇 कब जागेगा प्रशासन?

परशुरामपुर इंडेन ग्रामीण एजेंसी के खिलाफ सीएम हेल्पलाइन और जिला प्रशासन को दी गई शिकायतें धूल फांक रही हैं। यदि तत्काल प्रभाव से एजेंसी का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया और दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस लूट में विभाग के बड़े अधिकारियों की भी मौन सहमति है।

जनता पूछ रही है— बस्ती के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से कब जागेंगे? क्या किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही परशुरामपुर की जनता को इंसाफ मिलेगा?

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