अन्य खबरेछत्तीसगढ़

छग नया धर्म स्वतंत्रता विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिली

धर्मांतरण करवाने पर उम्रकैद की सजा, शीघ्र ही नोटिफिकेशन भी जारी होगा

वंदेभारतलाइवटीव न्युज, बुधवार 08 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ =-: प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ प्रदेश में नये धर्म स्वतंत्रता विधेयक को छग के राज्यपाल महोदय रामेन डेका जी की मंजूरी मिल गई है। राज्यपाल महोदय जी ने इस धर्म स्वतंत्रता विधेयक पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं। अब गजट नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही नया धर्म स्वतंत्रता विधेयक कानून बन जायेगा। इस कानून के अंतर्गत अवैध रूप से धर्मांतरण करवाने के मामलों में सख्त कानूनी दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान किया गया है। प्राप्त जानकारी अनुसार धर्म स्वतंत्रता कानून मे अब लालच, धोखाधड़ी, या गलत जानकारी देते हुए धर्म परिवर्तन करवाने के मामलों में दोषियों को सात साल से लेकर दस साल तक की जेल की सजा और कम से कम पांच लाख रूपय तक के अर्थदण्ड का भी प्रावधान है। यदि पीड़ित नाबालिक, महिला, अनुसूचित जाति जनजाति, या पिछड़ा वर्ग से है तो यह सजा दस साल से लेकर बीस साल तक जेल और कम से कम दस लाख रूपय अर्थदण्ड भी किया जा सकता है। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में दस साल से लेकर आजीवन कारावास और न्युनतम पच्चीस लाख रूपय अर्थदण्ड का भी प्रावधान रखा गया है। जानकारी के अनुसार इस नये कानून के अंतर्गत धर्म परिवर्तन करने से पहले संबंधित व्यक्ति को 60 दिन पहले जिला कलेक्टर को आवेदन देना जरूरी होगा और इसके साथ ही अनुष्ठान करवाने वाले पुजारी, मौलवी, पादरी, को भी पहले से ही जानकारी देनी होगी। नियमों का उल्लंघन करते पाए जाने पर तत्काल कार्यवाही गिरफ्तारी हो सकती है। आईये जानते हैं छग धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के प्रमुख बिंदुओं के बारे में-: धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के अनुसार बल, लालच, जबरन दबाव, गलत जानकारी, कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने पर कानूनी कार्रवाई। कोई भी व्यक्ति यदि अपनी स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला न्यायाधीश या सक्षम प्राधिकारी के पास पहले से सूचना देनी होगी। प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्शायी जायेगी और तीस दिन के अंदर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान भी होगा। इस विधेयक में लालच, प्रपीड़न , दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण, डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। पैतृक धर्म मे वापसी करने पर धर्मांतरण नहीं माना जायेगा, यह भी इस विधेयक मे स्पष्ट रूप से बताया गया है। अवैध रूप से धर्मांतरण करवाने पर सात साल से दस साल तक जेल की सजा और कम से कम पांच लाख रूपय अर्थदण्ड। यदि पीड़ित नाबालिक महिला अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग से होगा तो यह सजा दस साल से बीस साल जेल , और कम से कम दस लाख रूपय अर्थदण्ड। सामूहिक रूप से धर्मांतरण पर दस साल से आजीवन कारावास और कम से कम पच्चीस लाख रूपय अर्थदण्ड। जानकारी के अनुसार इस विधेयक मे ‘लव जिहाद ‘ जैसे अनुचित मामलों को रोकने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। केवल धर्म परिवर्तन की दृष्टीकोण से किए जाने वाले शादी विवाह को अवैध शून्य घोषित किया जा सकेगा। धर्म परिवर्तन कानून के लिए प्रदेश के हर जिले मे अदालतें भी गठित होंगी। धर्मांतरण के खेल मे शामिल विदेशी फंडिंग को लेकर सरकार द्वारा पूरी तरह से रोक लगाई गई है। कोई भी संस्था लालच या सामूहिक रूप से धर्मांतरण मे शामिल पाए जाने पर संस्थान का रजिस्ट्रेशन रद्द हो जायेगा और भारी जुर्माना भी हो सकता है।

अनंतपद्मनाभ

D Anant Padamnabh, village- kanhari, Bpo-Gorakhpur, Teh-Pendra Road,Gaurella, Distt- gpm , Chhattisgarh, 495117,
Back to top button
error: Content is protected !!