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बांसी नगर पालिका में ₹90 लाख का ‘जल समाधि’: कागजों में दौड़ी पाइपलाइन, धरातल पर प्यासी जनता!

साहब! कहाँ गए जनता के 89.97 लाख? बांसी में पाइपलाइन के नाम पर भ्रष्टाचार का नंगा नाच!

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी बांसी की पाइपलाइन, प्यासी जनता देख रही सिस्टम का तमाशा

बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश | बांसी (सिद्धार्थनगर)

  • हर घर जल’ मिशन को बांसी नगर पालिका ने लगाया पलीता, 3 साल से फाइलों में कैद है प्रतापपुर की प्यास!
  • ​विकास या विनाश? बांसी में ₹89 लाख की पाइपलाइन डकार गए जिम्मेदार, प्यासे कंठ पूछ रहे सवाल!
  • ​भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी बांसी की पाइपलाइन योजना: 3 साल, 90 लाख और नतीजा सिफर!

बांसी सिद्धार्थ नगर।। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ ‘हर घर नल, हर घर जल’ के मिशन को अपनी प्राथमिकता बताकर हर प्यासे कंठ तक पानी पहुँचाने का दम भर रही है, वहीं सिद्धार्थनगर की बांसी नगर पालिका परिषद में इस दावों की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही हैं। यहाँ विकास कार्य धरातल पर कम और रसूखदारों की फाइलों में ज्यादा दौड़ रहे हैं।

करोड़ों का बजट, पर धरातल पर सन्नाटा

मामला बांसी नगर पालिका के प्रतापपुर क्षेत्र का है। वित्तीय वर्ष 2022-2023 में यहाँ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पाइपलाइन विस्तार हेतु ₹89.97 लाख की भारी-भरकम धनराशि आवंटित की गई थी। लेकिन विडंबना देखिए कि तीन साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

कड़वा सच: सरकारी कागजों में शायद यह कार्य ‘प्रगति पर’ या ‘पूर्ण’ दर्ज होकर फाइलों का पेट भर चुका हो, लेकिन प्रतापपुर की गलियों में आज भी पाइपलाइन का इंतजार है।

बजट का बंदरबांट या सिस्टम की सुस्ती?

जनता के टैक्स के 89.97 लाख रुपये कहाँ गए? यह सवाल आज बांसी का हर नागरिक पूछ रहा है। स्वीकृत धनराशि का उपयोग कहाँ हुआ और कार्य अधूरा क्यों छूटा, इसका जवाब देने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी सामने नहीं आ रहा है। इसे महज लापरवाही कहना गलत होगा; यह सीधे तौर पर बजट का बंदरबांट और भ्रष्टाचार का खेल नजर आता है।

सत्ता की हनक और जनता का दर्द

यह केवल एक पाइपलाइन बिछाने का मामला नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे का कत्ल है जो जनता अपने प्रतिनिधियों पर करती है। बांसी नगर पालिका परिषद में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का जो दीमक लगा है, वह अब सरेआम दिखने लगा है।

मुख्य सवाल जो प्रशासन को चुभेंगे:

  • क्या ₹89.97 लाख की यह फाइल भ्रष्टाचार के किसी गहरे गड्ढे में दफन कर दी गई है?
  • तीन साल तक चली कछुआ चाल का जिम्मेदार आखिर कौन है?
  • क्या उच्चाधिकारी इस ‘महाघोटाले’ की जांच कर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजेंगे?

निष्कर्ष: अगर जल्द ही इस मामले पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि बांसी में विकास केवल होर्डिंग्स और कागजों तक सीमित है। जनता अब प्यासी है और गुस्से में भी। क्या बांसी नगर पालिका परिषद अपनी जिम्मेदारी निभाएगी या फिर इस लूट की कहानी पर चुप्पी साधे रहेगी?

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