
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा विकास: बहादुरपुर में सचिव ने ‘बैक डेट’ के खेल से सरकारी खजाने पर डाला डाका
बहादुरपुर का 'टेंडर कांड': बैक डेट के खेल से सचिव ने खाली किया सरकारी खजाना! भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा: सचिव विवेक कुमार ने नियम ताक पर रख ग्राम पंचायतों में लगाया चूना।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बहादुरपुर ब्लॉक में टेंडर के नाम पर ‘बड़ा डाका’, बैक डेट की फाइलें खोलेंगी सचिव के भ्रष्टाचार की पोल
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- साहब को ‘नौकरी’ की परवाह नहीं, ‘कमीशन’ की भूख ने बनाया सरकारी धन का भक्षक!
- सीडीओ सार्थक अग्रवाल को सीधी चुनौती: बहादुरपुर में फल-फूल रहा सचिव का ‘भ्रष्ट सिंडिकेट’।
- क्या रुकेगी लूट? हथिया और कैथोलिया लाला ग्राम पंचायत में कागजों पर दौड़ा ‘विकास’।
- सचिव की दबंगई: प्रधानों पर दबाव बनाकर फर्जी बिलों पर कराया ‘डाका’।
- साहब की ‘सेटिंग’ के आगे नियम फेल, बहादुरपुर ब्लॉक बना भ्रष्टाचार का नया अड्डा।
- जांच हुई तो खुलेगा ‘विवेक’ के पाप का घड़ा; कार्यवाही रजिस्टर में कैद है करोड़ों का खेल।
- बहादुरपुर ब्लॉक: विज्ञापन ‘पुराना’ और भुगतान ‘नया’, सचिव के कारनामों से जिले में हड़कंप।
बस्ती (ब्यूरो रिपोर्ट)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, लेकिन बस्ती जनपद के बहादुरपुर विकासखंड में बैठे जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं। बहादुरपुर में तैनात सचिव विवेक कुमार पर ग्राम पंचायतों में फर्जी बिल और बैक डेट में टेंडर प्रकाशित करवाकर सरकारी धन के गबन का गंभीर आरोप लगा है। इस बड़े खेल ने जिले के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।विकासखंड बहादुरपुर में भ्रष्टाचार की जड़ें इस कदर गहरी हो चुकी हैं कि यहाँ तैनात सचिव विवेक कुमार के लिए नियम-कायदे महज कागजी टुकड़े बनकर रह गए हैं। ताजा मामला ग्राम पंचायतों में फर्जी बिल और बैक डेट (पूर्व की तिथि) में टेंडर प्रकाशित करवाकर लाखों रुपये के बंदरबांट का है। कमीशनखोरी की भूख इस कदर हावी है कि सचिव को न तो नौकरी जाने का डर है और न ही प्रशासन का खौफ।
बैक डेट का खेल: कैसे हुआ घोटाला?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सचिव विवेक कुमार ने अपनी तैनाती वाली ग्राम पंचायतों—विशेषकर हथिया और कैथोलिया लाला में विकास कार्यों के लिए अनिवार्य निविदा (टेंडर) प्रक्रिया का जमकर मजाक उड़ाया है। नियमतः किसी भी कार्य से पहले टेंडर प्रकाशित होना चाहिए, लेकिन यहाँ खेल उल्टा हुआ। काम होने के बाद या सीधे भुगतान की नीयत से समाचार पत्रों में बैक डेट (पुरानी तारीखों) में विज्ञापन प्रकाशित करवाए गए। इसके बाद फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया।विश्वस्त सूत्रों और वायरल खबरों के अनुसार, सचिव विवेक कुमार ने ग्राम पंचायत हथिया, कैथोलिया लाला समेत अन्य पंचायतों में निविदा प्रकाशन के नाम पर बड़ा खेल किया है। समाचार पत्रों में बैक डेट में टेंडर छपवाकर चहेती फर्मों को लाभ पहुँचाया गया और फर्जी बिल-वाउचर के सहारे सरकारी धन की निकासी की गई। चर्चा है कि सचिव का स्पष्ट मानना है कि “नौकरी रहे न रहे, लेकिन कमीशन नहीं छूटना चाहिए।”
एडीओ पंचायत की भूमिका पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि सहायक विकास अधिकारी (एडीओ पंचायत) अवधेश कुमार की नाक के नीचे यह पूरा सिंडिकेट चलता रहा। चर्चा है कि एडीओ पंचायत की शिथिलता या संभवतः “मौन सहमति” के कारण ही सचिव विवेक कुमार ने ग्राम पंचायतों के बजट को अपनी निजी जागीर समझ लिया। कमीशनखोरी का आलम यह है कि सचिव ने खुलेआम ग्राम प्रधानों पर दबाव बनाकर फर्जी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए।इस पूरे खेल में एडीओ पंचायत अवधेश कुमार की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनकी शिथिलता ने सचिव विवेक कुमार को भ्रष्टाचार का खुला मैदान दे दिया है। अधिकारियों की आँखों में धूल झोंककर सचिव ने न केवल सरकारी धन लूटा है, बल्कि ग्राम प्रधानों पर भी दबाव बनाकर उनसे मनमाने हस्ताक्षर कराए। कुछ प्रधानों ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि सचिव ने जिला स्तर के अधिकारियों से ‘सेटिंग’ होने का दावा कर उन्हें डराया और फर्जी भुगतान कराए।
प्रधानों का खुलासा: “साहब कहते हैं ऊपर तक सेटिंग है”
नाम न छापने की शर्त पर कुछ ग्राम प्रधानों ने सचिव के कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोला है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने फर्जी निविदा और बैक डेट भुगतान का विरोध किया, तो सचिव विवेक कुमार ने उन्हें डराया-धमकाया। सचिव का कहना था:
“हमें नौकरी की चिंता नहीं है, जिला स्तर के अधिकारियों से हमारी सीधी सेटिंग है। तुम बस हस्ताक्षर करो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।”
जांच हुई तो नपेंगे कई ‘सफेदपोश’
शासनादेश के अनुसार, एक ग्राम पंचायत में एक वित्तीय वर्ष में सीमित संख्या में ही टेंडर हो सकते हैं, लेकिन यहाँ तो टेंडरों की बाढ़ सी आ गई है। यदि पिछले 5 वर्षों के कार्यवाही रजिस्टर और भुगतान विवरणों की निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच हो जाए, तो बहादुरपुर ब्लॉक में भ्रष्टाचार का एक ऐसा पहाड़ खड़ा मिलेगा, जिसकी चपेट में कई बड़े चेहरे आ सकते हैं।
सीडीओ सार्थक अग्रवाल की ‘साख’ दांव पर
जनपद के तेज-तर्रार मुख्य विकास अधिकारी (CDO) सार्थक अग्रवाल अपनी कार्यकुशलता के लिए जाने जाते हैं। अब बहादुरपुर का यह घोटाला उनकी कार्यशैली के लिए एक बड़ी चुनौती है। जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सीडीओ इस ‘टेंडर सिंडिकेट’ को तोड़ पाएंगे और सरकारी धन की रिकवरी कराएंगे?जनपद के तेज-तर्रार और ईमानदार मुख्य विकास अधिकारी (CDO) सार्थक अग्रवाल के लिए बहादुरपुर का यह टेंडर घोटाला एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। भ्रष्टाचार की इस लंका को ढहाने और लूटे गए धन की रिकवरी कराना अब प्रशासन की साख का सवाल है। सचिव के अधीन ग्राम पंचायतों के कार्यवाही रजिस्टर की यदि निष्पक्ष जांच हो जाए, तो भ्रष्टाचार का एक बड़ा ‘पिटारा’ खुलना तय है।
प्रशासनिक रुख
उक्त प्रकरण में जब मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल से फोन पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले को अत्यंत गंभीर बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
“भ्रष्टाचार की कोई भी शिकायत बर्दाश्त नहीं होगी। मामला अब पूरी तरह संज्ञान में है। बहुत जल्द एक विशेष टीम गठित कर ग्राम पंचायतों के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे और यदि सचिव या प्रधान दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर कड़ी विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल से बात की गई, तो उन्होंने दो टूक कहा— “मामला अभी पूरी तरह संज्ञान में आया है। टेंडर प्रक्रिया और भुगतान में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराकर दोषी सचिव व संबंधित प्रधानों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
अब देखना यह है कि विकास की रकम से अपनी तिजोरी भरने वाले इस ‘भ्रष्ट तंत्र’ पर शासन का डंडा कब चलता है।



















