
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
चंद्रपुर जिले के बल्लारपुर शहर में प्रशासन और जनप्रतिनिधि के फैसलों में विरोधाभास सामने आया है। एक ओर नगरपालिका मुख्याधिकारी फुटपाथ से अतिक्रमण हटवा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विधायक फुटपाथ विक्रेताओं को छतरियां बांटकर उन्हें बढ़ावा दे रहे हैं। इस दोहरे रवैये से जनता असमंजस में है।
पहले हटाया अतिक्रमण, फिर बांटी छतरियां
पिछले महीने नगरपालिका मुख्याधिकारी के आदेश पर शहर के मुख्य मार्ग, फुटपाथ और अंदरूनी सड़कों पर अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाई गई थी। इस दौरान फुटपाथ पर रेहड़ी, चाय की दुकान और छोटे-बड़े विक्रेताओं को हटाकर पैदल यात्रियों के लिए रास्ता खाली कराया गया।
मगर 1 मई को कामगार दिवस के मौके पर क्षेत्र के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने फुटपाथ और रेहड़ी चलाने वाले सभी विक्रेताओं को मुफ्त छतरी और कूल जार बांट दिए।
4 दिन में ठंडे बस्ते में गई कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्याधिकारी ने अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई बड़े जोर-शोर से शुरू की थी, लेकिन चार दिन में ही अभियान ठंडा पड़ गया। जेसीबी से हटाए गए अतिक्रमणकारियों ने फिर से उसी जगह कब्जा कर लिया।
‘ढाक के तीन पात’ साबित हुई कार्रवाई
‘वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज’ ने पहले ही आशंका जताई थी कि हर बार की तरह यह कार्रवाई भी ‘ढाक के तीन पात’ साबित होगी। हुआ भी वही। लोगों का आरोप है कि विधायक मुनगंटीवार द्वारा छतरियां बांटकर ‘सोने पे सुहागा’ वाली कहावत चरितार्थ कर दी गई।
शासन-प्रशासन के इस विरोधाभासी आचरण से शहर में चर्चा है कि आखिर फुटपाथ जनता के चलने के लिए हैं या फिर से अतिक्रमण के लिए?





