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‘महादेवा’ के सुनार का महा-कारनामा: सोने की चैन का झांसा देकर ‘वकील साहब’ को ही ठग डाला!

कानून के रखवाले से ही जालसाजी! आरके ज्वैलर्स के मालिक ने चंद रुपयों के लिए दांव पर लगाई साख।

अजीत मिश्रा (खोजी)

‘महादेवा’ के ‘आरके ज्वैलर्स’ का महा-कारनामा: सोने की चमक की आड़ में वकालत के रक्षक को ही ठग डाला!

ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • सोने की चमक में आई ‘खोट’, आरके ज्वैलर्स के राजन गुप्त ने अपने ही पैर पर मारी कुल्हाड़ी!
  • विश्वास की दुकान पर जालसाजी का ताला: वकील को ठगने वाला सुनार कोई ‘मामूली’ तो नहीं!
  • धूल में मिली साख: चंद रुपयों की लालच में महादेवा के सुनार को अब खानी पड़ेगी जेल की हवा।

बस्ती। कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और वकीलों की जिरह के आगे अच्छे-अच्छे शातिरों के पसीने छूट जाते हैं। लेकिन जिला बस्ती के मुंडेरवा थाना क्षेत्र के महादेवा चौराहे पर बैठे एक सुनार ने इस कहावत को ही चुनौती दे डाली। महादेवा चौराहे पर स्थित ‘आरके ज्वैलर्स’ के मालिक राजन गुप्त ने इस बार किसी सीधे-साधे ग्रामीण को नहीं, बल्कि सीधे एक ‘वकील साहब’ (अधिवक्ता) को ही अपनी ठगी का शिकार बना लिया।

​इस घटना के बाद अब राजन गुप्त का नाम भी बस्ती जिले के नामचीन ठगबाजों की सूची में गर्व के साथ दर्ज हो चुका है। हालांकि, कइयों का कहना है कि यह “कम दर्जे” का ठग है क्योंकि इसने करोड़ों का घोटाला नहीं किया, बल्कि 1 लाख 15 हजार 371 रुपये की चपत लगाई है। लेकिन साहब, ठगी तो ठगी होती है, चाहे एक रुपये की हो या एक करोड़ की!

किस्तों में लिया पैसा, चैन देने के नाम पर दिखा दिया ठेंगा

​मामला मुंडेरवा थाने के मूड़ाडीहा निवासी अधिवक्ता विक्रम (पुत्र फूलचंद्र) से जुड़ा है। एडवोकेट विक्रम ने महादेवा चौराहे पर दुकान चलाने वाले राजन गुप्त (पुत्र राजबली उर्फ दोसई, निवासी ग्राम बेहिल) से 30 ग्राम 24 कैरेट सोने की चैन खरीदने का सौदा किया था। ₹48 हजार प्रति ग्राम की दर तय हुई। पीड़ित अधिवक्ता ने किस्तों में नगद और गूगल पे (Google Pay) के जरिए कुल मिलाकर ₹1,15,371 राजन गुप्त के खाते और जेब में डाल दिए।

​लेकिन जब सोने की चैन देने का वक्त आया, तो आरके ज्वैलर्स के मालिक के नीयत में खोट आ गया। उसने चैन देने से साफ इनकार कर दिया। पैसे भी हजम और सोना भी गायब!

पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल: फर्जी रसीद पर मामला रफा-दफा!

​हैरानी की बात तो तब हुई जब पीड़ित अधिवक्ता ने 13 मई 2026 को मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक (SP) से की। जैसे ही जांच शुरू हुई, शातिर सुनार राजन गुप्त ने जांच अधिकारी को एक फर्जी रसीद थमा दी। कमाल देखिए, पुलिस ने बिना किसी गहन तफ्तीश के, बिना शिकायतकर्ता से कोई पूछताछ किए, एकतरफा रिपोर्ट लगाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर दी।

​पुलिसिया ढुलमुल रवैये के बाद ठग के हौसले इतने बढ़ गए कि उसने पीड़ित से कहा— “शादी से पहले चैन दे देंगे।” लेकिन जब पीड़ित दोबारा पहुंचा, तो राजन फिर अपनी बात से मुकर गया। आखिरकार पीड़ित अधिवक्ता की तहरीर पर मुंडेरवा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है।

अपने ही पैर पर मार ली कुल्हाड़ी, अब खाएंगे जेल की हवा

​सराफे का कारोबार पूरी तरह ‘विश्वास’ की बुनियाद पर टिकता है। अमूमन कोई भी सुनार चंद रुपयों के लालच में अपनी साख दांव पर नहीं लगाता। लेकिन आरके ज्वैलर्स के मालिक ने थोड़े से पैसों के लिए अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। इस करतूत के बाद महादेवा चौराहे पर उनकी दुकान की साख तो धूल में मिल ही चुकी है, कारोबार से भी हाथ धोना तय है। चोरी, बेईमानी और जालसाजी व्यापारियों का नहीं, ठगों का काम है।

 

बड़ा सवाल: वकील को ठगने वाला कोई ‘मामूली’ सुनार तो नहीं होगा?

​बस्ती के व्यापारिक और सामाजिक हलकों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि राजन गुप्त की ‘हिम्मत’ की दाद देनी होगी। जिसने सीधे एक कानून के रखवाले (अधिवक्ता) से ही धोखाधड़ी करने का दुस्साहस कर डाला। जाहिर सी बात है, एक वकील को ठगने वाला कोई मामूली दिमाग का सुनार तो नहीं हो सकता।

​अब देखना यह है कि मुंडेरवा पुलिस इस जालसाज सुनार पर क्या कड़ी कार्रवाई करती है, या फिर खाकी का हाथ एक बार फिर इस ‘महादेवा के ठग’ को बचाने में पीछे से काम करेगा? जनता और वकीलों की नजरें अब इस मामले पर टिकी हैं!

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