

डीडवाना-कुचामन, (नटवर लाल जांगिड़) विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन एवं राजस्थान महिला कल्याण मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल श्रम उन्मूलन, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला कलक्टर विकास मोहन भाटी ने की। इस अवसर पर राजस्थान महिला कल्याण मण्डल के सहायक निदेशक अनुराग सक्सेना, उप निदेशक नानूलाल प्रजापति, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मनोज सोनी, जिला समन्वयक गरिमा सिंह राठौड़ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत संस्था परिचय एवं बाल संरक्षण से जुड़े विषयों पर चर्चा के साथ हुई। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मनोज सोनी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा एवं समुचित देखभाल सुनिश्चित करना समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत बनाने तथा जरूरतमंद बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
राजस्थान महिला कल्याण मण्डल के सहायक निदेशक अनुराग सक्सेना ने कहा कि बाल श्रम केवल कानूनी अपराध ही नहीं बल्कि सामाजिक अभिशाप भी है। यह बच्चों के बचपन, शिक्षा और उनके सुनहरे भविष्य को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज, प्रशासन और अभिभावक मिलकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास नहीं करेंगे, तब तक बाल श्रम की समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं है। उन्होंने सभी विभागों से बाल श्रम के मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
उप निदेशक नानूलाल प्रजापति ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिवस समाज को बाल श्रम के खिलाफ जागरूक करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य का अधिकार है।
जिला समन्वयक गरिमा सिंह राठौड़ ने राजस्थान महिला कल्याण मण्डल द्वारा संचालित गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्था बाल संरक्षण, बाल श्रम उन्मूलन, मानव तस्करी की रोकथाम एवं बच्चों के पुनर्वास के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने विशेष अभियान “उमंग-7” की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्यों एवं आगामी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यशाला के दौरान मनोज सोनी ने बाल श्रमिक एवं संकटग्रस्त बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को आवश्यकतानुसार बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है तथा उनकी शिक्षा, संरक्षण, काउंसलिंग एवं पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के साथ बाल श्रम की रोकथाम के लिए समन्वित कार्ययोजना पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने बाल श्रमिकों की पहचान, बचाव, पुनर्वास एवं शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने पर अपने सुझाव साझा किए। साथ ही ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने तथा बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के पश्चात रेलवे स्टेशन पर जीआरपी के सहयोग से बाल श्रम एवं बाल तस्करी रोकथाम हेतु जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान सिपाही हरिराम ने बाल श्रम संबंधी कानूनों, कार्रवाई एवं विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी। अभियान में परमाराम (एएसआई), अनिता (महिला कांस्टेबल), गिरधारी, सहित जीआरपी स्टाफ उपस्थित रहा। इस अवसर पर आनंद सिंह (श्रम निरीक्षक), मनोज चौधरी (सीडीपीओ), जयपाल सिंह (एसजेईडी), जयप्रकाश (एडी), सुप्रिया (डीटीओ), कमलेश कुमार मीणा (ईओ), रेड एंड रेस्क्यू कोऑर्डिनेटर घनश्याम, फील्ड कोऑर्डिनेटर महिपाल एवं मुकेश सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में बाल श्रम, बाल तस्करी एवं बाल भिक्षावृत्ति मुक्त समाज के निर्माण हेतु सभी विभागों द्वारा सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया गया।









