बिहारदरभंगा

लहेरियासराय में सरदार@150 कार्यक्रम ने रचा नया इतिहास

लहेरियासराय में आयोजित “सरदार@150” कार्यक्रम में यूनिटी मार्च, निरालाज डांस प्रस्तुति और द्रोण एकेडमी के बच्चों की अद्भुत भागीदारी ने राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती केवल एक तिथि का औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता की सार्थक याद दिलाने वाला ऐतिहासिक अवसर है। आज जब समाज विचारों के विभाजन, सांस्कृतिक दूरी और संवेदनात्मक असंतुलन से गुजर रहा है, तब सरदार पटेल के संदेश—“एक भारत, श्रेष्ठ भारत”—की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। यही कारण है कि युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की एकीकृत संस्था माय भारत द्वारा आयोजित “सरदार@150” कार्यक्रम श्रृंखला देशभर में नई ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति की लौ प्रज्वलित कर रही है।

इसी कड़ी में लहेरियासराय ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य समारोह ने सांस्कृतिक सम्मान और राष्ट्रीय गौरव का अनोखा संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दरभंगा सांसद गोपाल जी ठाकुर, विशिष्ट अतिथि केवटी विधायक मुरारी मोहन झा तथा जिला खेल पदाधिकारी की गौरवपूर्ण उपस्थिति ने आयोजन को सार्थक दिशा प्रदान की। समारोह की शुरुआत हुई यूनिटी मार्च से, जो कर्पूरी चौक से लहेरियासराय तक एकता और राष्ट्रहित के संदेश के साथ निकली।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा निरालाज स्टाइल ऑफ डांस की अद्भुत प्रस्तुति, जिसने देशभक्ति और पारंपरिक मिथिला संस्कृति दोनों को शानदार रूप में मंच पर उतारा। विशेष रूप से इस दौरान द्रोण एकेडमी, पिंडारूच की छात्रा राखी कुमारी ने निरालाज स्टाइल ऑफ डांस की टीम के साथ शामिल होकर द्वारा झिझिया, जाट-जट्टीन और कजरी नृत्य की सशक्त प्रस्तुति ने पूरे प्रांगण को मंत्रमुग्ध कर दिया। युवाओं की प्रतिभा और लोक कला की जीवंतता का ऐसा उदाहरण दुर्लभ ही देखने को मिलता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि द्रोण एकेडमी क्षेत्र की एकमात्र ऐसी संस्था है जो शिक्षा के साथ-साथ खेल, क्राफ्ट, आर्ट्स, मिथिला पेंटिंग, नृत्य, संगीत, कंप्यूटर तकनीक और मार्शल आर्ट सहित बहुआयामी प्रशिक्षण देकर ग्रामीण बच्चों के सपनों को पंख दे रही है। प्रतिस्पर्धा और मानसिक तनाव के इस दौर में समग्र कौशल विकास की व्यवस्था वास्तव में ग्रामांचल के बच्चों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है।

आज का समय हमें यह सिखाता है कि राष्ट्र निर्माण केवल भाषणों से नहीं, बल्कि सक्रिय और सजग युवा भागीदारी से संभव है। ऐसे आयोजनों का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए एक मजबूत और जागरूक भारत के निर्माण की ओर प्रेरित करते हैं। सरदार पटेल के एकता और समर्पण के संदेश को आगे बढ़ाते हुए यह कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विशाल स्तंभ बनेगा—यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

Sitesh Choudhary

चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता, लेकिन, गिरती हुई दीवारों का हमदर्द हूँ।
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