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इंजीनियर शैलेन्द्र की अद्भुत अकल्पनीय कला का श्रेष्ठ नमूना है चावल से बनी श्रीराम की मूर्ति

लिम्का बुक, गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड व इंडिया बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराकर किया फतेहपुर जनपद का नाम रोशन

फतेहपुर जनपद से डिस्ट्रिक्ट हेड निर्मित द्विवेदी गोपाल की स्पेशल रिपोर्ट

 

 

फतेहपुर, 07 फरवरी। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक अकल्पनीय प्रतिभाएं छिपी है जो देश व समाज को  गौरवान्वित करती है। इन्ही अकल्पनीय प्रतिभाओं मे से जनपद फतेहपुर की बिंदकी तहसील के गाँव सराय धरमपुर निवासी कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के स्नातक शैलेन्द्र उत्तम है। जिन्होंने इंडिया बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपनी कला के जरिये अपना नाम दर्ज कराया है। इतना ही नहीं 2018 में इनका नाम लिम्का बुक में 2019 में गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराकर जनपद फतेहपुर को सम्मान दिलाया। 

इजीनियंरिंग के छात्र शैलेन्द्र उत्तम ने वर्ष 2017 में 211 किलो गेंहू से एक रुपये के पांच फीट व्यास का सिक्का बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया था। 

कला में पारंगत शैलेन्द्र उत्तम  कृषि प्रधान देश के अब वह कलाकार बन गए हैं जो खाद्यान्न के माध्यम से अपनी कलाकृतियों को आकार देते हैं। इसी क्रम में अब उन्होंने 560 किलो चावल से 11 फीट ऊंची भगवान् श्री राम की मनोहारी छबि को आकार दिया है। इजीनियंरिंग छात्र शैलेन्द्र उत्तम ने बताया कि वह श्रीराम की जन्म स्थली अयोध्या दर्शन करने गया था वही से प्रेरित होकर भगवान् श्रीराम की मूर्ति बनाने का काम किया है। मूर्ति का निर्माण गत 04 फरवरी 2025 को पूर्ण हुआ है। मूर्ति स्रजन में  उनके सहयोगी शिवशंकर व आशु उत्तम का भी योगदान है। 

शैलेन्द्र उत्तम ने बताया कि उनकी ईच्छा है कि भगवान् श्रीराम की इस मूर्ति को महाकुम्भ प्रयागराज के संगम में गंगा स्नान कराकर अभिषेक कराने की प्रशासन अनुमति प्रदान करे जिससे मूर्ति का अभिषेक सम्पन्न हो। 

 मालूम हो कि इस कलाकार ने वर्ष 2019 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी बृम्हानंद जी की 11 फीट ऊंची मूर्ति का निर्माण पीली सरसों और अलसी बीज से निर्माण भी किया था। 

शैलेन्द्र उत्तम द्वारा खाद्यान्नों से मूर्ति निर्माण का जो अकल्पनीय कार्य किया उससे फतेहपुर जनपद गौरान्वित है और आशान्वित भी है कि  यह कलाकार अपनी कला का इसी तरह प्रदर्शन कर युवाओं को प्रेरणा देता रहेगा। अगर खोज की जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे ही तमाम अकल्पनीय प्रतिभाएं मिलेगी जो देश व प्रदेश को गौरान्वित करेंगी।

*इंजीनियर शैलेन्द्र की अद्भुत अकल्पनीय कला का श्रेष्ठ नमूना है चावल से बनी श्रीराम की मूर्ति*

*—-लिम्का बुक, गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड व इंडिया बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराकर किया फतेहपुर जनपद का नाम रोशन*

फतेहपुर, 07 फरवरी। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक अकल्पनीय प्रतिभाएं छिपी है जो देश व समाज को गौरवान्वित करती है। इन्ही अकल्पनीय प्रतिभाओं मे से जनपद फतेहपुर की बिंदकी तहसील के गाँव सराय धरमपुर निवासी कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के स्नातक शैलेन्द्र उत्तम है। जिन्होंने इंडिया बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपनी कला के जरिये अपना नाम दर्ज कराया है। इतना ही नहीं 2018 में इनका नाम लिम्का बुक में 2019 में गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराकर जनपद फतेहपुर को सम्मान दिलाया।
इजीनियंरिंग के छात्र शैलेन्द्र उत्तम ने वर्ष 2017 में 211 किलो गेंहू से एक रुपये के पांच फीट व्यास का सिक्का बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया था।
कला में पारंगत शैलेन्द्र उत्तम कृषि प्रधान देश के अब वह कलाकार बन गए हैं जो खाद्यान्न के माध्यम से अपनी कलाकृतियों को आकार देते हैं। इसी क्रम में अब उन्होंने 560 किलो चावल से 11 फीट ऊंची भगवान् श्री राम की मनोहारी छबि को आकार दिया है। इजीनियंरिंग छात्र शैलेन्द्र उत्तम ने बताया कि वह श्रीराम की जन्म स्थली अयोध्या दर्शन करने गया था वही से प्रेरित होकर भगवान् श्रीराम की मूर्ति बनाने का काम किया है। मूर्ति का निर्माण गत 04 फरवरी 2025 को पूर्ण हुआ है। मूर्ति स्रजन में उनके सहयोगी शिवशंकर व आशु उत्तम का भी योगदान है।
शैलेन्द्र उत्तम ने बताया कि उनकी ईच्छा है कि भगवान् श्रीराम की इस मूर्ति को महाकुम्भ प्रयागराज के संगम में गंगा स्नान कराकर अभिषेक कराने की प्रशासन अनुमति प्रदान करे जिससे मूर्ति का अभिषेक सम्पन्न हो।
मालूम हो कि इस कलाकार ने वर्ष 2019 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी बृम्हानंद जी की 11 फीट ऊंची मूर्ति का निर्माण पीली सरसों और अलसी बीज से निर्माण भी किया था।
शैलेन्द्र उत्तम द्वारा खाद्यान्नों से मूर्ति निर्माण का जो अकल्पनीय कार्य किया उससे फतेहपुर जनपद गौरान्वित है और आशान्वित भी है कि यह कलाकार अपनी कला का इसी तरह प्रदर्शन कर युवाओं को प्रेरणा देता रहेगा। अगर खोज की जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे ही तमाम अकल्पनीय प्रतिभाएं मिलेगी जो देश व प्रदेश को गौरान्वित करेंगी।

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