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ड्रग्स रैकेट: माइलान फार्मा के ईएचएस विभाग के प्रमुख किशोर पवार को वालुज एमआईडीसी में गिरफ्तार किया गया

औरंगाबाद ( अशोक मुळेScreenshot 20250630 133254): नारकोटिक्स निरोधक दस्ते ने 23 जून की रात को वालुज एमआईडीसी में साजापुर चौफुली के पास एक गोदाम पर छापा मारकर 1.25 करोड़ रुपये मूल्य के 2 किलो 473 ग्राम ड्रग्स (मेफेड्रोन पाउडर) और 20 लाख रुपये मूल्य के दो आयशर वाहन जब्त किए। मायलन फार्मा कंपनी से मेडिकल वेस्ट पाउडर बबन खान नजीर खान (उम्र 65, निवासी जूना बाजार, चौ. संभाजीनगर) के गोदाम में आ रहा था। वहां से खान अन्य राज्यों में ड्रग तस्करों को ड्रग्स की आपूर्ति कर रहा था। इसमें कंपनी के पर्यावरण, स्वास्थ्य और सुरक्षा विभाग के प्रमुख को शहर की अपराध शाखा ने रविवार (29 जून) को गिरफ्तार किया।

उसका नाम किशोर शिवाजी पवार (उम्र 54, निवासी आदित्यनगर, उल्कानगरी) है। इससे पहले पुलिस ने इस ड्रग तस्करी मामले में गोदाम मालिक बबन खान, उसके दो बेटों कलीम खान बबन खान (उम्र 41), सलीम खान बबन खान (उम्र 35, दोनों निवासी जूना बाजार), आयशर चालक शफीफुल रहमान तफज्जुल हुसैन (उम्र 45) और राज रामतीरथ अजूरे (उम्र 38, दोनों निवासी उत्तर प्रदेश) को गिरफ्तार किया था। अब छठे संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया गया है।

किशोर पवार कंपनी से निकलने वाले मेडिकल कचरे का निरीक्षण करने के लिए जिम्मेदार था। कचरे के वर्गीकरण, निपटान के दौरान देखभाल, उसमें क्या जाता है, कौन जाता है, इन सबकी जिम्मेदारी उसी की है। वह और बबन संपर्क में रहते थे। पवार की गिरफ्तारी के बाद, पिछले पांचों और पवार को अदालत में पेश किया गया।

पुलिस निरीक्षक संभाजी पवार ने बताया कि अदालत ने सभी संदिग्धों को 2 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

जांच में यह पता चलेगा कि पवार ने बबन तक पाउडर पहुंचाने में लापरवाही बरती या फिर उसने जानबूझकर पाउडर को बबन तक पहुंचाने का इंतजाम किया। इसके लिए पुलिस बबन और पवार को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करेगी। माइलॉन कंपनी ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि हम उस पदार्थ का निर्माण नहीं करते हैं, जिस पर जांच का फोकस है। हम पुलिस के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं और जांच के लिए उपलब्ध हैं। कंपनी ने कहा है कि हम उत्पाद के संबंध में सभी कानूनों और नियमों का पूरी तरह से पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पवार की गिरफ्तारी से कंपनी के प्रबंधन और अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

नशीली दवाओं की यात्रा…

बबन के पास 2011 से मायलन फार्मा से स्क्रैप उठाने का ठेका है। इस कंपनी से मेडिकल वेस्ट पाउडर खान के गोदाम में आता था। वहां से खान इसे दूसरे राज्यों में ड्रग तस्करों को सप्लाई करता था। उसका तस्करी का नेटवर्क मुंबई, गुजरात, नोएडा, दिल्ली में बना हुआ है और बिटकॉइन के जरिए कई ट्रांजेक्शन हुए हैं। फार्मा कंपनियां केमिकल रिलीज नहीं कर सकती हैं। हालांकि छापेमारी के दौरान कंपनी से आए कैरी बैग में पिल पाउडर मिला है। इसलिए इस बात की प्रबल संभावना है कि कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी भी इस रैकेट में शामिल हैं। इस संबंध में जांच जारी है और सुई किशोर पवार पर आकर टिक गई है। उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच में पता चलेगा कि मायलन से और कौन-कौन इस रैकेट में शामिल है।

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