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महिमा विंध्याचल धाम की

विंध्याचल

रिपोर्ट बुद्धेश मणि पाण्डेय जिला प्रभारी

वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज

विंध्याचल धाम योगभूमि है न कि भोग भूमि जिसने भी विंध्याचल धाम में भोग की दृष्टि से आज तक सनातन जगत में अपना पैर रखा उसका विनाश ही हुआ है यह कोई साधारण भूमि नहीं मां विंध्यवासिनी विंध्याचल पर्वत के शीर्ष पर विराजमान है संसार का ऐसा कोई प्राणी आज तक जन्म नहीं लिया जिसने मां विंध्यवासिनी की 108 परिक्रमा पूर्ण कर पाया हो मां विंध्यवासिनी मंदिर के सीढ़ियों की इतनी शक्ति है कि यदि कोई प्राणी विंध्यवासिनी मंदिर की सीढ़ियों पर यदि अपना सिर सात बार रखा उसका मां भगवती विंध्यवासिनी ने उद्धार कर दिया विंध्य धाम ही एक ऐसी तपोभूमि है जहां पर अनवरत श्रीदुर्गसप्तशती का पाठ अनवरत चलता रहता है जिसका आप प्रतिदिवस मंदिर में दर्शन कर सकते है जिस भी व्यक्ति को विंध्यधाम में नव दिवस निवास करने को प्राप्त हो जाए उसके भाग्य की क्या सराहना किया जाए बहुत ही विरले प्राणी को मां भगवती विंध्यवासिनी की कृपा से विंध्य धाम में नौ दिवस निवास करने का सौभाग्य प्राप्त होता अन्यथा की स्थिति में व्यक्ति का विंध्य धाम में निवास संभव नहीं होता व्यक्ति का आना जाना लगा रहता है ऐसी ही विंध्य धाम और विंध्यवासिनी मां आदिशक्ति की महिमा इनकी उपासना से व्यक्ति इंद्र पद और ब्रह्म पद तक प्राप्त कर सकता है सृष्टि में प्रलय काल और प्रलय काल के पूर्व और पश्चात भी मां आदिशक्ति महाशक्ति विंध्यवासिनी सदा से ही यहां निवास करती आ रही है विंध्य धाम ही मणि द्वीप है जहां प्रलय के समय जब ब्रह्मा विष्णु महेश मणि द्वीप में प्रवेश करते है तब स्त्री रूप में परिणति हो जाते है और लगातार माता रानी की बारह वर्ष सेवा करते है और जब माता की आज्ञा से माता के पैरों को दबाते है तब इन्हें माता रानी के दाहिने पैर के अंगूठे में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की स्थिति का ज्ञान होता है फिर सृष्टि संचालन के लिए जब माता रानी की आज्ञा से मणि द्वीप के बाहर आते है तब पुरुष रूप में परिणति होकर सृष्टि संचालन का कार्य करने में समर्थ हो पाते है वसुदेव के कुलगुरू गर्ग ऋषि ने वसुदेव के आठवे संतान के जन्म और सुरक्षा के लिए यही पर माता आदिशक्ति की आराधना श्रीमद देवीभागवत पारायण कर की थी जिस पर माता रानी ने उन्हें वरदान देते हुए कहा था कि कृष्ण जन्म से छह दिन पूर्व अर्थात हम यशोदा के घर भाद्रपद कृष्ण पक्ष दूज को जन्म लेंगे तब वसुदेव कृष्ण जन्म के बाद हमे मथुरा ले आएंगे और कृष्ण को गोकुल छोड़ आयेंगे इसके उपरांत कंस के हाथ से छूटकर माता रानी पुनः विंध्याचल पर्वत पर आ गई इसीलिए आज भी विंध्य धाम में भाद्रपद शुक्ल पक्ष दूज को माता रानी का जन्मोत्सव बड़े धूम धाम से मनाया जाता है यह विंध्याचल धाम भगवान राम के आगमन का प्रतीक है यही पर भगवान राम ने अपने पितरों के निमित्त तर्पण एवं श्राद्ध किया था जिस स्थान पर किया वह राम गया घाट कहलाया यही पर भगवान राम ने भगवान महादेव की स्थापना शिवपुरी में किया जो रामेश्वर महादेव के नाम से विंध्य धाम में विराजमान है सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में भैरव और भैरवी का एक साथ मंदिर विंध्य धाम में ही विराजमान है !

जय विंध्यवासिनी मां

जय विंध्याचल धाम

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