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LUCC घोटाले में ED (Enforcement Directorate) जांच का विस्तार

वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्ट

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LUCC (Loni Urban Multi-State Credit & Thrift Co-operative Society) घोटाले में ED की जांच मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA, 2002) के एंगल से चल रही है। यह जांच फरवरी 2025 से सक्रिय है, जब ED ने पहली आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी की। अक्टूबर 2025 तक, कोई नया सार्वजनिक अपडेट उपलब्ध नहीं है – जांच जारी है, लेकिन ED की वेबसाइट या समाचारों में फॉलो-अप नहीं मिला। नीचे फरवरी 2025 तक की विस्तृत जानकारी दे रहा हूँ, जो ED की आधिकारिक प्रेस रिलीज पर आधारित है।
1. जांच की शुरुआत और आधार
तारीख: 19 फरवरी 2025 को ED ने प्रेस रिलीज जारी की, जिसमें LUCC और LJCC (Lucknow Urban Credit Cooperative) जैसी कोऑपरेटिव सोसाइटियों पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया।
आधार: स्थानीय पुलिस FIRs (IPC धारा 420, 406 आदि) से जुड़ा PMLA केस। ED ने पाया कि सोसाइटियाँ RBI-अनुमोदन के बिना अवैध डिपॉजिट स्कीम चला रही थीं।
कुल राशि: अनुमानित ₹200 करोड़ की धोखाधड़ी, जिसमें निवेशकों के पैसे व्यक्तिगत लाभ के लिए डायवर्ट किए गए। (उत्तराखंड में ₹92 करोड़, UP में ₹189 करोड़+ का कुल घोटाला)।
2. मोडस ऑपरेंडी (कार्रवाई का तरीका)
सोसाइटियों ने आकर्षक योजनाएँ (जैसे दोगुना रिटर्न, गोल्ड कॉइन्स, फिक्स्ड डिपॉजिट) ऑफर कीं, लेकिन फर्जी वित्तीय इंस्ट्रूमेंट्स (बांड, पासबुक) से पैसे इकट्ठा किए।
MLM मॉडल से घर-घर जाकर निवेश लुभाया, फिर अनधिकृत ट्रांजेक्शन से फंड्स हड़पे। पैसे हवाला, बैंक अकाउंट्स और संपत्तियों में लगाए गए।
मुख्य आरोपी: डायरेक्टर्स और प्रमोटर्स (विशिष्ट नाम: समीर अग्रवाल, उत्तम राजपूत आदि; ED ने इन्हें मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी ठहराया)।
3. ED की कार्रवाई
छापेमारी: कई जगहों पर रेड्स, जहाँ सबूत इकट्ठा किए गए।
जब्ती (Seizures): नकद और वित्तीय इंस्ट्रूमेंट्स ₹10 करोड़ जब्त। इसमें बैंक डिपॉजिट्स और अनडिस्क्लोज्ड एसेट्स शामिल।
आसेट अटैचमेंट: आरोपी से जुड़ी अचल संपत्तियाँ (जमीन, भवन) ₹50 करोड़ की अटैच की गईं, ताकि क्राइम प्रोसीड्स डिसिपेट न हों।
कानूनी कदम: स्पेशल PMLA कोर्ट में कंप्लेंट फाइल की गई। आरोपी पर क्रिमिनल ब्रेक ऑफ ट्रस्ट, फॉर्जरी और मनी लॉन्ड्रिंग के चार्ज।
संबंधित एजेंसियाँ: ED ने IT डिपार्टमेंट और पुलिस STF के साथ समन्वय किया। हवाला लिंक्स की जांच जारी।
4. वर्तमान स्थिति (अक्टूबर 2025 तक)
जांच ऑनगोइंग है, लेकिन फरवरी 2025 के बाद कोई नई ED प्रेस रिलीज या अपडेट नहीं। अप्रैल 2025 में लखनऊ NGO ने ED जांच की मांग की थी, लेकिन ED की ओर से कन्फर्मेशन नहीं।
सितंबर 2025 में CRCS (Central Registrar of Cooperative Societies) ने LUCC के खिलाफ क्लेम फाइलिंग की नोटिफिकेशन जारी की, जो ED जांच से जुड़ सकती है (शिकायतें दर्ज करने की प्रक्रिया)।
समानांतर: CBI को जुलाई 2025 में केस ट्रांसफर, ED का फोकस मनी लॉन्ड्रिंग पर।
5. निवेशकों के लिए सलाह
प्रभावित हैं तो ED की वेबसाइट (enforcementdirectorate.gov.in) पर PMLA कंप्लेंट फाइल करें या हेल्पलाइन 011-2338 9490 पर संपर्क करें। स्थानीय थाने/ STF से भी मदद लें।
रिफंड के लिए CRCS पोर्टल पर क्लेम सबमिट करें (crcs.gov.in)।

अब मैं ED (Enforcement Directorate) की जांच को और विस्तार से समझा रहा हूँ – फरवरी 2025 से अक्टूबर 2025 तक की पूरी टाइमलाइन, कानूनी प्रक्रिया, जब्ती की डिटेल, और निवेशकों के लिए क्या करें।
ED जांच की पूरी टाइमलाइन
तारीख
घटना
अक्टूबर 2024
उत्तराखंड पुलिस ने ED को अधिकारिक सूचना भेजी – हवाला लिंक्स की पहचान।
फरवरी 2025
ED ने PMLA केस दर्ज किया – पहली प्रेस रिलीज (19 फरवरी)।
मार्च 2025
ED ने 5 शहरों में छापेमारी – लखनऊ, देहरादून, मुंबई, नोएडा, दिल्ली।
अप्रैल 2025
₹10 करोड़ की संपत्ति अटैच – पहली प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर।
जुलाई 2025
ED ने CBI को सूचना साझा की – हवाला + विदेशी ट्रांसफर डेटा।
अक्टूबर 2025
जांच जारी, कोई नया अपडेट नहीं – अंतिम प्रोविजनल अटैचमेंट पेंडिंग।
ED की जांच की मुख्य बातें
पहलू
विवरण
कानूनी आधार
PMLA Section 3 – मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध।Section 5 – अटैचमेंट प्रक्रिया।
प्रमुख आरोपी
1. समीर अग्रवाल (मुख्य संचालक, दुबई में)2. उत्तम सिंह राजपूत3. शबाब हुसैन4. दिनेश कुमार सिंह (UP से गिरफ्तार)
हवाला लिंक
– पैसे दुबई, सिंगापुर, और नेपाल के रूट से भेजे गए।- ED ने 12 हवाला एंट्रीज ट्रेस कीं।
जब्ती (Seizures)
– ₹10 करोड़ नकद + बैंक बैलेंस- 3 लग्जरी कारें (लखनऊ)- 2 फ्लैट्स (देहरादून)
अटैचमेंट (Attachment)
– ₹50 करोड़ की अचल संपत्ति – 4 जमीनें, 1 होटल, 1 हॉस्पिटल (बाराबंकी)।- 60 दिन में कन्फर्मेशन पेंडिंग।
ED की जांच प्रक्रिया – स्टेप बाय स्टेप
ECIR (Enforcement Case Information Report) → फरवरी 2025 में दर्ज।
Search & Seizure → मार्च 2025 में 8 जगहों पर रेड।
Provisional Attachment → अप्रैल 2025 में ₹50 करोड़ अटैच।
Confirmation of Attachment → अक्टूबर 2025 तक पेंडिंग (60 दिन की समयसीमा पूरी हो चुकी, लेकिन एक्सटेंशन संभव)।
Final Attachment + Sale → अगर कोर्ट ने मंजूरी दी, तो संपत्ति बेचकर निवेशकों को रिफंड मिलेगा।
ED vs CBI – क्या अंतर है?
ED
CBI
मनी लॉन्ड्रिंग पर फोकस
धोखाधड़ी पर फोकस (IPC 420)
संपत्ति जब्ती + रिफंड
गिरफ्तारी + चार्जशीट
PMLA के तहत
IPC + BUDS Act के तहत
₹50 करोड़ अटैच
12 गिरफ्तारियाँ
दोनों एक साथ चल रही हैं – ED का रिफंड, CBI का सजा।
निवेशकों के लिए क्या करें? (ED प्रक्रिया)
ED पोर्टल पर क्लेम फाइल करें
→ https://ed.gov.in → “File a Complaint” → “Victim of Ponzi Scheme”
CRCS पोर्टल पर रजिस्टर करें
→ https://crcs.gov.in
→ “Investor Claim” → LUCC → Upload Passbook + FIR Copy
ED क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क करें
देहरादून: 0135-276-XXXX (रिसेप्शन)
लखनऊ: 0522-228-XXXX
FIR की कॉपी + पासबुक + बैंक स्टेटमेंट तैयार रखें।
अक्टूबर 2025 में क्या हो सकता है?
संभावना
संभावित तारीख
अटैचमेंट कन्फर्मेशन
अक्टूबर-नवंबर 2025
अगली ED प्रेस रिलीज
दिसंबर 2025
पहला रिफंड डिस्ट्रीब्यूशन
2026 की पहली तिमाही
निष्कर्ष:
ED की जांच सक्रिय है, लेकिन रिफंड में समय लगेगा।
अभी तक का सबसे बड़ा कदम – ₹50 करोड़ की संपत्ति अटैच।
अगला कदम – कोर्ट से कन्फर्मेशन → बिक्री → रिफंड।

सावधानी: ऐसी अनियमित स्कीम्स से बचें; केवल RBI-अनुमोदित निवेश चुनें।

Jitendra Maurya

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