दरभंगाबिहार

किशोरियों की आवाज बुलंद: बाल विवाह रोकने का संकल्प

दरभंगा में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की प्रथम वर्षगांठ पर शपथ ग्रहण और माहवारी स्वच्छता किट वितरण। बाल विवाह रोकने हेतु जागरूकता और कानूनी कार्रवाई पर जोर।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान : संकल्प का प्रथम वर्ष, बदलाव की ओर एक सशक्त कदम

दरभंगा, 27 नवम्बर 2025 — महिला एवं बाल विकास निगम दरभंगा के तत्वाधान में आयोजित “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” की प्रथम वर्षगांठ पर आज +2 उच्च विद्यालय कंसी, दरभंगा सदर में सामूहिक शपथ ग्रहण समारोह और माहवारी स्वच्छता प्रबंधन किट के वितरण का कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह अवसर केवल एक आयोजन भर नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में सामूहिक प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि है।

बाल विवाह भारत की उन पुरानी सामाजिक कुरीतियों में से एक है, जो आज भी हजारों बच्चियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को निगल रही है। 18 वर्ष से कम आयु में होने वाला विवाह न केवल अपराध है, बल्कि जेंडर आधारित हिंसा, घरेलू अत्याचार और स्वास्थ्य जोखिमों का प्रमुख कारण भी। ऐसे में यह अभियान जागरूकता की वह मजबूत आवाज है, जो समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

समारोह में उपस्थित जिला परियोजना प्रबंधक बृजेश कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा कि यह पहल शिक्षा संस्थानों, पंचायत भवनों, पुलिस थानों और सार्वजनिक स्थानों पर निरंतर चलायी जा रही है, ताकि समाज के हर वर्ग तक जागरूकता पहुँचे। शपथ का मुख्य सार यही था— “हम बाल विवाह को सामाजिक बुराई मानेंगे, इसका विरोध करेंगे और इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को देंगे।”

हेल्पलाइन 181 का उल्लेख करते हुए जिला मिशन समन्वयक ऋषि कुमार ने बताया कि बाल विवाह से संबंधित हर शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी और बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत कठोर दंड सुनिश्चित होगा।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की छात्राओं को माहवारी स्वच्छता प्रबंधन किट का वितरण किया गया, जो महिला स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर समाज को संवेदनशील बनाने की दिशा में एक आवश्यक कदम है।

आज की शपथ केवल शब्द नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत है। जब तक हर बच्चा शिक्षा पाएगा, सुरक्षित रहेगा और अपने सपनों को जीने का अवसर पाएगा, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

बाल विवाह मुक्त भारत केवल सरकारी अभियान नहीं, समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। संकल्प लें, विरोध करें, जानकारी दें। बच्चों के भविष्य से बड़ा कोई धर्म, राजनीति या परंपरा नहीं।

Sitesh Choudhary

चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता, लेकिन, गिरती हुई दीवारों का हमदर्द हूँ।
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