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सड़क का शोला बना सफ़र: बस–ट्रक की महाटक्कर के बाद धू-धू कर जली जिंदगी, सीमा मार्ग पर सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
बलरामपुर के राष्ट्रीय राजमार्ग पर आज सुबह उस वक्त कोहराम मच गया जब तेज़ रफ्तार भारी ट्रक ने यात्रियों से भरी बस को सामने से ज़ोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण और झकझोरने वाली थी कि बस अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे खड़े बिजली के खंभे से जा टकराई। खंभे से टकराने के बाद बस की बॉडी में ज़बरदस्त शॉर्ट-सर्किट हुआ और देखते ही देखते पूरी बस आग की लपटों में घिर गई। कुछ ही क्षणों में सैकड़ों लीटर डीजल से भरी बस एक चलती–फिरती आग की भट्टी में बदल गई, जहां चीखें थीं, धुआं था और मदद के लिए दौड़ते लोग… लेकिन समय किसी का इंतज़ार नहीं करता।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस में सवार यात्री सुबह की नींद और सफर की सुस्ती में थे, तभी इस हादसे ने उन्हें झकझोर कर जगा दिया। टक्कर के तुरंत बाद बस के पिछले हिस्से में आग भड़की, और हवा के दबाव व ईंधन के फैलाव ने आग को इतनी तेज़ी से फैलाया कि यात्रियों को बाहर निकलने तक का मौका बेहद कम मिल पाया। जान बचाने के लिए लोग खिड़कियां तोड़ने लगे, कांच फोड़ने लगे, लेकिन कुछ हिस्सों में आग इतनी प्रचंड थी कि किसी भी मदद के पहुँचने से पहले ही कइयों को अपनी चपेट में ले चुकी थी।
हृदय विदारक दृश्य में बस में सवार 3 यात्री आग की लपटों में फंसकर जिंदा जल गए, जिनकी पहचान अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है। उनके परिजनों का संपर्क करने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। वहीं बस में मौजूद 24 से अधिक यात्री गंभीर रूप से झुलस गए व घायल हुए, जिनमें बच्चे, महिलाएं और वृद्ध भी शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार कई यात्रियों की हालत क्रिटिकल बनी हुई है और उन्हें इमरजेंसी ट्रॉमा वार्ड में निगरानी में रखा गया है।
घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोग बताते हैं कि कुछ यात्रियों के शरीर 60–70% तक झुलस चुके हैं, और कुछ की हड्डियां तक प्रभावित हुई हैं। कई यात्रियों को सांस लेने में गहरी दिक्कत हुई क्योंकि बस के भीतर धुआं जानलेवा गैस चैंबर की तरह फैल चुका था। प्राथमिक उपचार के लिए अस्पतालों ने अतिरिक्त स्टाफ़ और ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार, बस में अधिकांश यात्री नेपाली नागरिक थे, जो रोजगार और घरेलू कार्यों के सिलसिले में दिल्ली जा रहे थे। नेपाल से भारत की सीमा को पार करते ही सफर उम्मीदों से भरा था… लेकिन किसी को क्या पता था कि यही सफर उनके लिए जीवन की आखिरी कहानी लिख देगा। सीमा मार्ग की हालत, ट्रैफिक नियंत्रण, और रात–सुबह चलने वाले भारी वाहनों की मॉनिटरिंग पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि
“हाईवे पर इतना बड़ा हादसा PRV, ट्रैफिक पुलिस और प्रशासनिक सक्रियता के बावजूद हो जाना, यह स्पष्ट संकेत है कि सड़क सुरक्षा सिर्फ़ कागजों में मजबूत है, जमीन पर नहीं।”
दूसरी ओर, दुर्घटनाग्रस्त ट्रक गर्म कपड़ों की खेप लेकर दिल्ली से असम जा रहा था। ट्रक चालक टक्कर के बाद मौके से भागने की कोशिश कर रहा था, परंतु स्थानीय भीड़ की सक्रियता के कारण उसे आगे जाकर पकड़ लिया गया और पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि ट्रक की रफ्तार मानकों से अधिक क्यों थी? चालक नशे में था या लापरवाही से वाहन चला रहा था? ट्रक में ब्रेक सिस्टम फेल तो नहीं था? बस में फायर सेफ़्टी सिस्टम मौजूद था या नहीं? बस की खिड़कियां इमरजेंसी मानकों के अनुरूप थीं या नहीं?
मौके पर एसपी बलरामपुर, एडीएम, सीओ, हाईवे पेट्रोलिंग टीम और दमकल दस्ते तुरंत पहुँचे। फॉरेंसिक व तकनीकी दुर्घटना जांच इकाई भी मौके पर बुलाई गई ताकि सड़क पर टायर–निशान, ब्रेक–मार्क, आग के स्रोत, और टक्कर के एंगल का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सके। फॉरेंसिक टीम ने बस के जले हुए हिस्सों से सैंपल भी लिए हैं, ताकि शॉर्ट-सर्किट और ईंधन फैलाव के बिंदुओं का विश्लेषण किया जा सके।
पुलिस के अनुसार यह शवों की पहचान डीएनए और अन्य वैज्ञानिक विधियों से की जाएगी, क्योंकि शरीर पूरी तरह झुलस चुके हैं। प्रशासन ने घोषणा की है कि घायलों के इलाज में किसी भी प्रकार की आर्थिक या चिकित्सकीय कमी नहीं आने दी जाएगी और गंभीर रूप से घायल यात्रियों को आवश्यकता पड़ने पर लखनऊ व दिल्ली के बड़े ट्रॉमा सेंटर भी एयर ➤ एंबुलेंस के माध्यम से भेजा जा सकता है (यदि स्थिति जरूरी हुई)।
यह हादसा बलरामपुर के इतिहास में अबतक के सबसे हृदयविदारक सड़क अग्निकांडों में शामिल हो गया है। घटना ने लोगों के भीतर गहरा दर्द, शासन व्यवस्था पर रोष और सड़क सुरक्षा को लेकर भय का एक घना बादल छोड़ दिया है। जनता अब स्पष्ट रूप से मांग कर रही है कि सीमा मार्ग और हाईवे पर रफ्तार नियंत्रण, रात्रि–सुबह मॉनिटरिंग और पब्लिक सेफ़्टी सिस्टम में तत्काल बड़े सुधार किए जाएं।
✍️ रिपोर्ट : अलीक सिंह





