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बागबाहरा संग्रहण केंद्र में सूखत के संबंध में जानकारी*

 

*बागबाहरा संग्रहण केंद्र में सूखत के संबंध में जानकारी*

11 जनवरी// महासमुंद जिले के बागबाहरा संग्रहण केंद्र में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान संग्रहित धान में आई सूखत के संबंध में फैलायी जा रही भ्रामक एवं तथ्य से परे जानकारी का जिला विपणन अधिकारी द्वारा खंडन किया गया है।
जिला विपणन अधिकारी श्री आशुतोष कोसरिया ने इस संबंध में कहा कि संग्रहित धान के निराकरण में दर्शाई गई सूखत को चूहों, कीटों अथवा पतंगों द्वारा खाए जाने से जोड़ना पूर्णतः असत्य एवं भ्रामक है। उन्होंने बताया कि यह सूखत वास्तविक रूप से उपार्जन केंद्रों से धान के संग्रहण केंद्रों में भंडारण के पश्चात कस्टम मिलिंग के तहत मिलरों को प्रदाय किए गए धान के वजन में आई स्वाभाविक कमी की मात्रा है।
श्री कोसरिया ने जानकारी दी कि धान का भंडारण दिसंबर 2024 से किया गया था, जिसका अंतिम रूप से निराकरण अक्टूबर 2025 में हुआ। लंबे समय तक खुले में भंडारण के कारण धान की प्रकृति में परिवर्तन आना स्वाभाविक है, जिसके परिणामस्वरूप धान में सूखत की स्थिति उत्पन्न होती है। यह एक सामान्य एवं नियमित प्रक्रिया है, जो पूर्ववर्ती वर्षों में भी देखी गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि जिले के अन्य संग्रहण केंद्रों में औसत सूखत की स्थिति लगभग इसी स्तर की रही है तथा राज्य के संग्रहण केंद्रों में सूखत का औसत प्रतिशत लगभग इसी मात्रा में रहता है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित प्रभारी को विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है। प्राप्त जवाब को परीक्षण उपरांत अग्रिम आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।

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