
न्मूलन) की विस्तृत चर्जा उप श्रमायुक्त, गयाजी द्वारा की गई उनके द्वारा बताया गया कि उक्त की धारा-3 के तहत 14 वर्ष के कम उर्म के बालको को किसी भी प्रतिष्ठान में नियोजन प्रतिषेध हैं जबकि उक्त अधिनियम कि धारा-3A के तहत खतरनाक व्यवसाय एवं प्रक्रियाओं में किशोर का नियोजन प्रतिषेध है। यदि कोई नियोजक उक्त अधिनियम की धारा 3 एवं 3A का उल्लंघन करता है तो ऐसी स्थिति में उक्त अधिनियम कि धारा-14 (1) के तहत दोषी नियोजको को 20000 से 50000 दण्ड राशि या छः महिने से दो वर्ष तक कारवास या दोनो से दण्डित किया जाता है। विमुक्त बाल श्रमिको को प्रति बाल श्रमिक रू0-3000 हजार की दर से तत्काल सहायता राशि श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग द्वारा भुगतान किया जाता है। इसके अलावे प्रति विमुक्त बाल श्रमिक को मुख्यमंत्री सहायता कोष से रू0-25000 की राधि दी जातिी है। कार्यशाला में सभी श्रम प्रवर्त्तन पदाधिकारी, सहभागी के रूप में अपनी जानकारी साक्षा किये। कार्यशाला के दुसरे सत्र में श्रीमति प्रियंका श्रम अधीक्षक, औरंगाबाद द्वारा विमुक्त्ति के उपरांत बाल श्रमिक / उनके अभिभवको को पुनर्वास हेतु 18 विभागो की योगदान / दायीत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। उनके द्वारा बताया गया की विमुक्त बाल श्रमिको का शैक्षिक पुर्नवास में शिक्षा विभाग की अहम भूमिका है। जबकि बाल श्रम कल्याण समिति/जिला बाल संरक्षण ईकाइ अन्य विभागो से समन्वय स्थापित कर बाल श्रमिको के पुर्नवास की कार्रवाई में अहम भूमिका है। कार्यशाला में श्रम अधीक्ष, औरंगाबाद श्रीमति प्रियंका, श्रम अधीक्षक, नवादा श्री सुनील कुमार एवं श्रम अधीक्षक, जहानाबाद, मृत्युजंय झा द्वारा उक्त अधिनियम एवं विमुक्त बाल श्रमिकों के पुर्नवास पर अपना-अपना विचार रखे।





