
बस्ती: छावनी पुलिस का ‘शराब प्रहार’ या आरोपों को दबाने का ‘सुरक्षित कवच’?
छावनी पुलिस की सख्ती: 21 लीटर अवैध शराब के साथ वांछित गिरफ्तार, पर सवालों के घेरे में विभाग! SHO राणा डीपी सिंह का 'ऑपरेशन': शराब माफियाओं में खलबली, लेकिन प्रशासन पर उठे सवाल।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: छावनी पुलिस की सख्ती से शराब माफियाओं में खलबली, क्या आबकारी विभाग को ‘नींद’ से जगाने की है तैयारी?
- सिस्टम का दोहरा चरित्र: सोशल मीडिया के शोर के बीच छावनी पुलिस की ‘कार्रवाई’ का असली सच?
- बस्ती में अवैध शराब का खेल: पुलिस ‘मैदान’ में, आबकारी विभाग ‘नींद’ में!
बस्ती: जनपद के छावनी थाना क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबारियों पर पुलिस का ‘अटैक’ लगातार जारी है। SHO राणा डीपी सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध शराब के धंधेबाजों की कमर तोड़ दी है। लेकिन इस कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि—क्या पुलिस की सक्रियता के पीछे केवल अवैध शराब ही है, या फिर सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरें और गंभीर आरोपों को दबाने का एक ‘सुरक्षित कवच’ तैयार किया जा रहा है?
कार्रवाई का विवरण
छावनी पुलिस ने एक विशेष अभियान के तहत 21 लीटर अवैध कच्ची शराब के साथ एक अपाची बाइक बरामद की है। इस कार्रवाई में पुलिस ने लंबे समय से वांछित चल रहे अभियुक्त रमेश पुत्र सीताऊ, निवासी छितौना को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है।
इस पूरी ऑपरेशनल सफलता का श्रेय SHO राणा डीपी सिंह के नेतृत्व को जाता है। इस टीम में चौकी प्रभारी सभाजीत मिश्रा, SI राधेश्याम तिवारी, हेड कांस्टेबल फयानाथ भास्कर, रवि प्रताप सिंह, कांस्टेबल चन्द्रकेश प्रजापति के साथ ही अभिषेक सिंह और शिल्लु जायसवाल की भूमिका सराहनीय रही।
तीखा सवाल: पुलिस सक्रिय, तो आबकारी विभाग ‘मौना’ क्यों?
एक ओर जहाँ छावनी पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है और अवैध शराब के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग की चुप्पी किसी बड़े रहस्य से कम नहीं है। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि जब पुलिस अपनी सीमा से बाहर जाकर अवैध शराब पर प्रहार कर सकती है, तो आबकारी विभाग आखिर क्यों मौज काट रहा है? क्या विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है?
क्या चर्चाओं पर पर्दा डालने की है कोशिश?
सूत्रों की मानें तो यह कार्रवाई केवल शराब माफियाओं तक सीमित नहीं है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरों ने छावनी थाना क्षेत्र के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। क्षेत्र में व्याप्त कुछ गंभीर आरोपों और सवालों से ध्यान भटकाने के लिए क्या यह ‘सघन अभियान’ एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है?
थानेदार साहब का यह कौशल क्या केवल वर्दी की शान बढ़ाने के लिए है, या उन गंभीर आरोपों को फाइलों के नीचे दबाने की एक सोची-समझी रणनीति? यह जांच का विषय है, लेकिन एक बात साफ है—बस्ती की जनता अब केवल शराब की बरामदगी से संतुष्ट होने वाली नहीं है, उसे सिस्टम में फैली उस गंदगी का भी जवाब चाहिए जो सोशल मीडिया की इन तस्वीरों में दबी हुई नजर आ रही है।
यह खबर प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। विभाग की भूमिका पर उठते सवाल जनहित में उठाए गए हैं।

















