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बुजुर्गो की सेवा ही सबसे बड़ा संस्कार, उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है – मंत्री राजपूत

IMG 20260719 084835सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *माताजी कैलाषवासी श्रीमती ज्ञान बाई जी की पुण्यतिथि पर मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने वृद्धाश्रम पहुंचकर बुजुर्गों के साथ किया भोजन, वस्त्र भेंट कर जाना हालचाल,खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अपनी कैलाशवासी पूज्य माताजी श्रीमती ज्ञान बाई जी की पुण्यतिथि के अवसर पर सेवा, संवेदना और संस्कार का प्रेरणादायी संदेश देते हुए सपरिवार वृद्धाश्रम पहुंचकर वहां निवासरत बुजुर्गों के साथ आत्मीयता से समय बिताया। उन्होंने सभी बुजुर्ग माताओं एवं पितृतुल्य वरिष्ठजनों को भोजन कराया एवं उनके साथ बैठकर भोजन किया, उनकी कुशलक्षेम जाना तथा वृद्धाश्रम की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। मंत्री राजपूत ने वृद्धाश्रम के प्रत्येक कक्ष में जाकर बुजुर्गों से व्यक्तिगत रूप से चर्चा की, उनकी आवश्यकताओं की जानकारी ली और आश्रम में उपलब्ध सुविधाओं का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। उन्होंने सभी बुजुर्गों को स्नेहपूर्वक वस्त्र भेंट किए तथा उनके स्वस्थ, सुखद और सम्मानजनक जीवन की कामना की। इस अवसर पर मंत्री राजपूत की धर्मपत्नी एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सविता सिंह राजपूत, पुत्र आकाश सिंह राजपूत तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती नंदिका सिंह राजपूत भी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का विशेष भावनात्मक क्षण तब आया जब आकाश सिंह राजपूत की धर्मपत्नि श्रीमती नंदिका सिंह राजपूत ने अपना जन्मदिवस किसी भव्य आयोजन के बजाय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के बीच बड़े ही सादगीपूर्ण और श्रद्धाभाव के साथ मनाया। उन्होंने अपने हाथों से बुजुर्गों को भोजन परोसा, उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके साथ आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी बुजुर्गों ने मंत्री श्री राजपूत एवं उनके परिवार को दीर्घायु, सुख-समृद्धि और निरंतर जनसेवा के लिए हृदय से आशीर्वाद प्रदान किया।
इस अवसर पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि जिस समाज में बुजुर्गों का सम्मान होता है, वही समाज संस्कारवान, समृद्ध और मजबूत बनता है। माता-पिता और बुजुर्ग हमारे जीवन के अनुभवों का अमूल्य भंडार हैं। उनका सम्मान करना केवल हमारी संस्कृति नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य भी है, उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमें अपने बुजुर्गों के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए। उन्हें केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि अपनापन, सम्मान और स्नेह की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। वृद्धाश्रम में रह रहे प्रत्येक बुजुर्ग में हमें अपने माता-पिता का स्वरूप दिखाई देना चाहिए। उनके चेहरे पर मुस्कान लाना ही सच्ची मानव सेवा है। राजपूत ने कहा कि मेरी माताजी ने हमें सेवा, संस्कार और मानवता का जो पाठ पढ़ाया, वही हमारे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है। उनकी पुण्यतिथि पर यदि हम किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान ला सकें, किसी बुजुर्ग को सम्मान दे सकें, तो यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने समाज से आह्वान करते हुए कहा कि हर परिवार अपने बुजुर्गों का सम्मान करे, उनकी भावनाओं को समझे और उनके अनुभवों का लाभ उठाए। परिवार की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, समाज और राष्ट्र भी उतना ही मजबूत बनेगा।
उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः का संदेश देती है। आइए, हम सभी संकल्प लें कि अपने घर और समाज के प्रत्येक बुजुर्ग को सम्मान, सुरक्षा और अपनापन देंगे। यही हमारी सबसे बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी और सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग बोझ नहीं, हमारे संस्कारों की पहचान हैं। उनकी सेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा है। जिस घर में बुजुर्ग मुस्कुराते हैं, उस घर में सुख, शांति और समृद्धि स्वयं निवास करती है। राजपूत ने सभी आम जनों का आवाहन करते हुए कहा कि अपने घर के शुभ कार्यक्रमों या जन्मदिन आदि के अवसर पर वृद्ध आश्रम आए कुछ पल इन माताओ, बुजुर्गों के साथ बिताये। ताकि इन्हें भी अपने परिवार की कमी महसूस ना हो यह बुजुर्ग किसी एक की नहीं हम सब की जिम्मेदारी है।

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