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सीएम नीतीश कुमार ने तेजस्वी के सामने 2025 से पहले खड़े किए अपने त्रिदेव! नीतीश के कौन-कौन है त्रिदेव जानिए पूरी खबरें. इस रिपोर्ट में.

🖥️ बिहार पटना खबर:पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में चिराग पासवान की वजह से नीतीश कुमार की पार्टी जदयू मात्र 43 सीटों पर सिमट गई थी। ऐसा आरोप जदयू ने लगाया था। वहीं नीतीश के सबसे करीबी माने जाने वाले पूर्व आईएएस आरसीपी सिंह को भी बागी बताकर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। ऐसा लगने लगा था कि अब जदयू अध्यक्ष के तौर पर पार्टी को नीतीश के बाद कौन लीड करेगा? लेकिन नीतीश कुमार वो नेता हैं, जिन्हें जब-जब कमजोर कहा गया, वो उतनी ही मजबूती से सामने आए। लोकसभा चुनाव में 12 सीटें जीत कर एक बार फिर से नीतीश बीजेपी के बराबर आकर खड़े हो गए। लेकिन ये तो उनकी नई कहानी की शुरुआत थी। अब नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव समेत अपने सभी विपक्षियों और विरोधियों को जवाब दिया है। इसके लिए उन्होंने अपने ‘त्रिदेव’ को सियासी मैदान में उतार दिया है।

*जानिए कौन हैं नीतीश के ‘त्रिदेव’…
इन ‘त्रिदेव’ के बारे में जानने से पहले सीएम नीतीश की उन दिक्कतों की बात भी जरूरी है, जिसकी चर्चा हम ऊपर कर चुके हैं। इन सबका असर जदयू के साथ-साथ सीएम नीतीश कुमार पर भी पड़ रहा था। तेजस्वी उन पर हमलावर हो गए थे। वहीं ज्यादातर लोगों को ये भी लग रहा था कि अब नीतीश की पार्टी का क्या होगा? ठीक उसी वक्त सीएम नीतीश कुमार ने सबको चौंका दिया। चौंकाने में तो नीतीश कुमार माहिर भी माने जाते हैं। उन्होंने जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राज्यसभा सांसद संजय झा को जदयू का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया। ललन सिंह के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद नीतीश की पार्टी में सवर्णों का बैलेंस गड़बड़ लगने लगा था, जिसे दुरुस्त करने की कोशिश की गई। कुल मिलाकर नीतीश ने अपने पहले ‘त्रिदेव’ का ऐलान कर दिया। ये सिर्फ तीन नेता नहीं, बल्कि वो तीन ‘भरपाई’ हैं, जिनके आने से जदयू फिर से पुराने फॉर्म में लौट सकता है।

*नीतीश के दूसरे ‘त्रिदेव’ को भी जानिए
एक समय था जब जदयू में पूर्व IAS अफसर आरसीपी सिंह की तूती बोलती थी। नीतीश के बाद अगर पार्टी में कोई पावरफुल था तो वो सिर्फ आरसीपी सिंह ही थे। लेकिन बीच में दोनों के बीच NDA सरकार में आने-जाने को लेकर इतनी खटास बढ़ी कि आरसीपी और जदयू की राहें जुदा हो गईं। आरसीपी सीएम नीतीश के गृह जिले नालंदा से ही थे। ऐसे में माना जा रहा है कि IAS मनीष वर्मा को पार्टी में लाकर नीतीश ने आरसीपी सिंह की कमी पूरी करने की कोशिश की है। आरसीपी की तरह ही मनीष वर्मा भी नीतीश के स्वजातीय हैं और उनके गृह जिले नालंदा के ही हैं। ये बने हैं नीतीश के दूसरे ‘त्रिदेव’।

*नीतीश के ‘त्रिदेव’ नंबर 3…
ये नाम थोड़ा चौंकाने वाला है। ये वो नाम है जिसके बारे में कहा जाता था कि वो और नीतीश कभी एक हो ही नहीं सकते। रिश्ता मुंहबोले चाचा-भतीजे का था। लेकिन अब इन रिश्तों में आया रूखापन खत्म होता दिख रहा है। ये हैं चिराग पासवान, हाल ही में केंद्रीय मंत्री बनने के बाद चिराग पासवान सीएम नीतीश से मिलने पहुंचे। नीतीश ने भी दिल खोल कर उनका स्वागत किया। फोटो देख तो यही लग रहा है कि नीतीश ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए नया समीकरण सेट कर दिया है, खासतौर पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव के खिलाफ।

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