
‘ बड़े विद्यालयों में विलय किए जाएंगे कम बच्चे वाले स्कूल

ऐसे स्कूल , जिनमें बच्चों की संख्या बहुत कम है , उनका नजदीक के ही नजदीक बड़े विद्यालयों ( माध्यमिक भी सम्मिलित ) में विलय किया । पर्याप्त शिक्षक व सुविधाएं होने से बुनियादी शिक्षा में सुधार होगा । यह कवायद केंद्र सरकार के कंसल्टेशन जो अभी पायलट चरण है । विभाग ने ऐसे स्कूलों को चिह्नित कर रहा है , जिनमें प्रयास के बावजूद बच्चों की संख्या बढ़ नहीं सकी है । बड़े विद्यालयों का विवरण भी जुटाया जा रहा है । जिले में 2115 परिषदीय स्कूल हैं । राज्य परियोजना कार्यालय ( बेसिक शिक्षा ) ने पिछले दिनों ऐसे 495 स्कूलों की सूची जारी की , जिनमें बच्चों की संख्या 50 से कम थी । इनके प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों पर न तो चेतावनी का असर हुआ और ही नहीं , शहरी क्षेत्र के अनेक स्कूल तो एक या दो कमरों में संचालित हैं । कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को एक साथ बैठकर पढ़ाया जाता है । समस्त शिक्षक , शिक्षा मित्र , अनुदेशक या चपरासी एक ही कक्ष में बैठकर स्कूल चलाने को मजबूर हैं । शिक्षकों को हटाने की भी तैयारी विभाग पहले ही 50 से कम बच्चों वाले स्कूलों के अतिरिक्त शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित करने की योजना बना चुका है । ऐसे स्कूलों की सूची बहुत लंबी है , इसलिए पहले उन स्कूलों से शुरुआत होगी , जिनमें बच्चों की संख्या बढ़ने की कोई संभावना नहीं । ऐसे स्कूलों में एक या दो शिक्षण कर्मी रखने की योजना है , मगर इससे पठन – पाठन पर नकारात्मक असर भी पढ़ेगा । एक ही शिक्षण कर्मी को पांच – पांच कक्षाओं के बच्चे एक साथ पढ़ाने पड़ेंगे ।

