
अगर आप सोने के गहने खरीदते हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद खास है। क्योंकि केंद्र सरकार ने सोने के गहने, रत्नों एवं कीमती पत्थरों से बने खास तरह के आभूषणों के आयात पर अंकुश लगा दिया है। आईये नीचे खबर में विस्तार से जातने हैं अचानक क्यों लिया गया ये फैसला –

खास तरह की गोल्ड ज्वैलरी के इंपोर्ट पर लगी पाबंदी
सरकार ने मोती, स्टोन, विशेष प्रकार के हीरे (डायमंड) और अन्य कीमती पत्थरों से सजी सोने (gold latest news) की ज्वैलरी के आयात पर पाबंदी लगा दी है। केंद्र सरकार के द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार, इस तरह के सोने के गहनों का आयात अब मुक्त नहीं रहेगा। इसे अब ‘रेस्ट्रिक्टेड कैटेगरी’ (Restriction Category) में डाल दिया गया है, जिसका मतलब है कि इन गहनों का आयात पहले की तरह बिना किसी नियंत्रण के नहीं किया जा सकेगा। इस निर्णय का उद्देश्य देश में सोने के आयात को नियंत्रित करना और घरेलू बाजार में उसकी अधिकता को कम करना है।
जानिये क्यों लिया गया ये फैसला?
सरकार ने इन खास तरह की गोल्ड ज्वैलरी को फ्री से हटाकर रेस्ट्रिक्शन कैटेगरी (Restriction Category) में डाल लिया है। यानी इसका मतलब है कि इस तरह के गुड्स के आयात के लिए सरकार से लाइसेंस/ अनुमति लेने की जरूरत होती है।दरअसल बीते कुछ दिनों में इंडोनेशिया और तंजानिया से इस तरह के प्रोडक्ट्स के इंपोर्ट में बेतहाशा इजाफा देखने को मिला है, जिसकी वजह से घरेलू बिक्री पर निगेटिव असर देखने को मिल रहा था।
घरेलू बाजार और घरेलू कारीगरों के हित को देखते हुए सरकार ने ये फैसला किया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत और संयुक्त राष्ट्र अमीरात के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत टैरिफ रेट कोटा (tariff rate quota) में इंपोर्ट ऑथराइजेशन के बावजूद भी इस तरह के जड़ाऊ गोल्ड ज्वैलरी के इंपोर्ट की मंजूरी लेनी होगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत का गोल्ड इंपोर्ट (gold import) लगातार तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2023-2024 की बात करें तो भारत का गोल्ड का आयात 30 प्रतिशत बढ़कर 45.54 अरब डॉलर पर जा पहुंचा है। जबकी वित्त वर्ष 2022-23 में सोने का आयात 35 अरब डॉलर तक रहा था । इस साल मार्च में सोने का आयात 1.53 अरब डॉ लर रहा।
स्विट्जरलैड सोने (Switzerland gold News) का सबसे बड़ा सोर्स है। कुल सोने के इंपोर्ट में इसकी हिस्सेदारी 40 फीसदी की है। बता दें कि चीन के बाद भारत सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। भारत अपनी जरूरत का अधिक हिस्सा इंपोर्ट करता है।




