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भारतीय सेना को मिलने जा रहा सवा लाख का टेंट, खूबियां जानकर रह जाएंगे हैरान

Indian Army News : सेना के जवानों को सुरक्षित रखने के लिए कानपुर में एक खास प्रकार का टेंट तैयार किया गया है। सेना ने इसका परीक्षण भी कर लिया है। अब सेना की ओर से इसका ऑर्डर दिया गया है। 2 महीने के अंदर ऑर्डर पूरा करना होगा।

हाइलाइट्स

  • सेना के परीक्षण में खरा उतरा टेंट
  • 963 टेंटों का सेना ने दिया ऑर्डर
  • 2 महीने में कर दी जाएगी डिलीवरी
Tent
सुमित शर्मा, कानपुर: यूपी के कानपुर की ऑर्डिनेंस इक्यूपमेंट फैक्टरी ने सेना के जवानों के लिए अत्याधुनिक टेंट तैयारी किया। यह टेंट सियाचिन ग्लेशियर में बर्फीली चोटियों पर तैनात सेना के जवानों को माइनस 50 डिग्री सेल्सियस के तापमान में सुरक्षित रखेगा। ओईएफ ने एल्टीट्यूड टेंट तैयारी किया है। एक टेंट की कीमत 1.25 लाख रुपये रखी गई। सेना को 963 टेंट देने हैं, जिसकी डिलीवरी 2 महीने में कर दी जाएगी।

ऑर्डिनेंस इक्यूपमेंट फैक्टरी द्वारा तैयार किया गया टेंट सेना के मानकों में खरा उतरा है। सफल परीक्षण के बाद सेना ने इसका ऑर्डर ओईएफ को दिया है। इस टेंट के भीतर सियाचिन जैसे दुर्गम स्थानों में भी सेना के जवानों के शरीर को सामान्य रखेगा। कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षा कवच का काम करेगा।
हाई एल्टीट्यूटड टेंट एक ऐसे इंसुलेटेड मैटेरियल से तैयारी किया गया है, जो 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली बर्फीली हवाओं को रोका जा सकता है। ठंडी हवाओं का असर टेंट के भीतर नहीं होगा। यह कपड़ा एक तरह से ऊष्मा के कुचालक की तरह काम करता है। इससे टेंट के भीतर गर्मी रहेगी, बाहर की ठंड भीतर नहीं घुसेगी। टेंट के अंदर के माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में जवान सामान्य अवस्था में रहेंगे।

कानपुर ऑर्डनेंस इक्यूपमेंट फैक्टरी ने इस टेंट को तीन महीने में बनाकर तैयार किया है। एक टेंट की कीमत 1.25 लाख रुपये है। सेना को 963 टेंट देने हैं, यह टारगेट दो महीने में पूरा कर लिया जाएगा। अभी तक इंसुलेटेड टेंट के लिए यूरोपीय देशों पर निर्भरता थी। अब देश में ही इसे जरूरत के हिसाब से तैयार किया जा सकता है।
-ओईएफ के महाप्रबंधक डॉ

दुर्गम स्थानों पर किया जाएगा इस्तेमाल

समुद्र तल से पांच हजार की ऊंचाई वाले 76 किलोमीटर लंबे सियाचिन ग्लेशियर, अरुणाचल के सेला दर्रा, सिक्किम के लाचेन, थांगू घाटियां, लेह और उत्तराखंड के मनुस्यारी जैसे बर्फीले इलाकों में तैनात जवानों द्वारा इस्तेमाल किए जाएंगे। सेना ने इन टेंटों का परीक्षण दुर्गम स्थानों पर किया है। परीक्षण में सफल होने के बाद ओईएफ को निर्माण के लिए ऑर्डर दिए गए हैं

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