A2Z सभी खबर सभी जिले कीअन्य खबरेकोटाराजस्थान
Trending

शहरीकरण की नई दिशा: विवाह और रिश्तों का बदलता स्वरूप

1. पारंपरिक ढांचे पर दबाव एवं तलाक के बढ़ते मामले:शहरीकरण ने भारत में पारंपरिक संयुक्त परिवार व्यवस्था को चुनौती दी है। जैसे-जैसे लोग गाँव से शहरों की ओर जा रहे हैं, पारिवारिक संरचना में बदलाव आ रहा है और तलाक अब छिपा हुआ मुद्दा नहीं रहा। बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि में तलाक की दर राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक है और बीते वर्षों में आवेदन भी तीन गुना तक बढ़ गए हैं। यह सामाजिक बदलाव गहरे से जड़े कलंक को कम कर रहा है, जिससे लोग असमर्थकारी विवाह से बाहर निकल पा रहे हैं।

2. व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और महिला सशक्तिकरण:शहरों में आत्मनिर्भरता, शिक्षा, और महिलाओं के रोजगार में भागीदारी से शादी में समता और सम्मान की अपेक्षाएँ बढ़ी हैं। महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होकर, पुराने पितृसत्तात्मक नियमों को चुनौती दे रही हैं और अपनी खुशी को प्राथमिकता दे रही हैं। आधुनिक जीवनशैली और मीडिया के प्रभाव से व्यक्तिगत स्वतंत्रता और भावनात्मक संतुष्टि की माँग बढ़ी है, जिससे असहज या अपमानजनक रिश्ते कम समय तक टिकते हैं।

3. परिवार की संरचना में बदलाव:अब संयुक्त परिवार की जगह एकल (न्यूक्लियर) परिवार अधिक देखने को मिल रहे हैं। इससे स्वतंत्रता तो बढ़ी है, परंतु संकट के समय पुश्तैनी “सपोर्ट सिस्टम” की कमी भी महसूस होती है, जो पहले संयुक्त परिवार में मिलती थी।

4. सामाजिक कलंक में कमी:शहरी इलाकों में तलाक को लेकर कलंक कमजोर हो रहा है, जिससे ज्यादा लोग, खासकर महिलाएं, विवाह विघटन की प्रक्रिया को अपनाने लगी हैं। हालांकि, यह ट्रेंड अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में उतना तेज़ नहीं है, जहाँ कलंक और समाज का दबाव ज़्यादा है।

5. व्यावहारिक और भावनात्मक चुनौतियाँ:तलाक या अलगाव के बाद महिला-प्रधान एकल परिवारों को आर्थिक असुरक्षा, मकान की समस्या, और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। शहरों में विशेषकर सस्ते कानूनी परामर्श और काउंसलिंग की भारी कमी है, जिससे जीवन कठिन हो सकता है।

6. कानून में बदलाव और नया दृष्टिकोण:पुराने तलाक कानून अभी भी “फॉल्ट बेस्ड” हैं, जिससे तलाक की प्रक्रिया लंबी और जटिल बन जाती है। लेकिन हाल के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में “irretrievable breakdown of marriage” (अपरिवर्तनीय विवाह-विघटन) को भी तलाक का मानवीय आधार माना गया है, जिससे यह प्रक्रिया आसान हो रही है।

7. नीति और समाज के लिए सुझाव:भविष्य में नए शहरी नीतिगत प्रयासों (काउंसलिंग, सस्ता कानूनी समर्थन, सुलभ आवास) और खुले संवाद की आवश्यकता है, जिससे विवाह संस्था एक नए और अधिक मानवीय रूप में आगे बढ़ सके।

शहरीकरण ने विवाह व्यवस्था को व्यक्तिगत स्वतंत्रता, महिला सशक्तिकरण, भावनात्मक समावेशिता, और सामाजिक कलंक के कमजोर होने की दिशा में बदला है। विवाह तथा अलगाव अब आधुनिक भारतीय समाज में खुले तौर पर स्वीकारे जा रहे हैं, जिससे लोग अपने जीवन की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

🫵सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियाँ

☑️तलाक/विवाह-विघटन के बाद महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और किफायती कानूनी सहायता में दिक्कत आती है।

☑️ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में सामाजिक सहयोग और प्रोफेशनल काउंसलिंग की भारी कमी है।

☑️सार्वजनिक विमर्श, स्कूलों और कार्यस्थलों में बेहतर संवाद, मानसिक स्वास्थ्य परख और रिश्ते सुदृढ़ करने वाली शिक्षा की आवश्यकता है।

👮‍♀वर्तमान कानून और हालिया बदलाव

भारत के तलाक कानून अभी भी अधिकतर ‘फॉल्ट’ (गलती सिद्धि) आधारित हैं, जिसके कारण लंबी कानूनी प्रक्रिया होती है।परंतु, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ‘अपरिवर्तनीय विवाह-विघटन’ (Irretrievable Breakdown of Marriage) के आधार पर न्यायिक विवेकाधिकार से तलाक मंजूर करने की नीति अपनाई है, जिससे विवाहित जोड़ों को अधिक मानवीय और संवेदनशील न्याय मिल सकेगा।

🫵भारत में तलाक के मुख्य कारण (2024)

1.जीवनसाथी का ध्यान न देना / दूरी

2.संवाद में समस्या

3.आर्थिक विवाद

4.बेवफाई/व्यक्तिगत मुद्दे

5.आदत या व्यवहार से असंतोष

6.मानसिक स्वास्थ्य समस्या

7.आपसी पारिवारिक सदस्यों की बेवजह दखलंदाजी

 

🌆राजस्थान: शहरी और ग्रामीण परिवेश में मुख्य अंतर

राजस्थान का केस स्टडी:

यहाँ की तलाक दर पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय औसत से कम है।NFHS-5 के अनुसार, शहरी इलाक़ों में महिला साक्षरता, निर्णय में भागीदारी और कम आयु विवाह कम है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसके उलट।

 

👩‍❤️‍👨तलाक़ की मुख्य वजहें

1.आर्थिक स्वतंत्रता और महिला सशक्तिकरण: उच्च शिक्षा एवं रोज़गार से महिलाएं अधिक आत्मनिर्भर बनीं, जिससे उनमें सम्मान और समानता की अपेक्षा बढ़ी। पारंपरिक पितृसत्तात्मक मान्यताएं चुनौती के दायरे में आई।

2.नवीन जीवनशैली और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा: शहरी जीवन में खुद की खुशियों को प्राथमिकता देने की सोच बढ़ी।

3.संयुक्त परिवार से न्यूक्लियर (एकल) परिवार: पारंपरिक संयुक्त परिवार ज्यादातर गायब हो गए हैं, जिससे संकट के समय वैसा ‘सपोर्ट सिस्टम’ नहीं रहता।

4.विवाह की अपेक्षाओं में बदलाव: अब लोग भावनात्मक संगति और साझेदारी की माँग करने लगे हैं, अनदेखी, अनुकूलता या दुर्व्यवहार को स्वीकार नहीं करते और तुरंत छोटी छोटी बातों में परिवार के बाहरी रिश्तेदारों की दखलंदाजी रिश्ते को और अपमानित तरीके से बिगाड़ रही है ।जिससे आगे चलकर रिश्तों में प्रतिशोध की भावना पैदा होने लग रही है

5.मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता: लोग अस्वस्थ रिश्ते छोड़ने को संकोच नहीं करते।देखा गया है स्वास्थ्य कारणों से महिला के गर्भवती नहीं होने पर ग्रामीण ही नहीं शहरी क्षेत्र में महिलाओं को तुरंत तलाक दे दिया जाता है ,या आपसी सहमति से दूसरी शादी कर ली जाती है ।

भारत में राष्ट्रीय स्तर पर तलाक की दर अभी भी 1% के आसपास है, जो दुनियाभर में सबसे कम मानी जाती है। परंतु शहरी क्षेत्रों में यह दर लगातार बढ़ रही है, और पिछले एक दशक में इसमें 30–40% तक की वृद्धि आई है। प्रमुख महानगरों—जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु में यह औसत से कहीं अधिक है ,और अभी इंदौर ,जयपुर ,भोपाल ,नोएडा ,पुणे जैसे महानगरों में अब तलाक के मामले बढ़ने लगे है और यही नहीं छोटे शहरों में और ग्रामीण क्षेत्रों में भी तलाक के आंकड़े निरंतर बढ़ रहे है । हालांकि यह देखा गया है छोटे कस्बों ,क्षेत्रों में कुछ हद तक तलाक के मामले कुछ वर्षों में समझाइश से सुलझा भी लिए जाते है ,जो कि संयुक्त परिवार और कई स्तर तक रिश्तों में मजबूती और भारतीय संस्कृति के मजबूत आधार को भारत जैसे देश में अभी भी बनाए रखा है ।इसलिए भारत में अन्य देशों की तुलना में तलाक की सबसे कम दर है ।

अर्बन प्लानिंग रिसर्चर डॉ नयन प्रकाश गांधी अपने रिव्यू रिसर्च पेपर में बताते है कि बढ़ते शहरीकरण से वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक युवा जनसंख्या वाले देश भारत की विवाह व्यवस्था विकट परिस्थिति से गुजर रही है, जहाँ परंपरा और व्यक्तिगत अधिकार के बीच संतुलन तलाशा जा रहा है। तलाक़ दर बढ़ना केवल संकट नहीं, बल्कि सामाजिक मान्यताओं के परिवर्तित होने और व्यक्तियों की खुशियों को महत्व देने का संकेत है। भविष्य में नीति, समाज और कानून में बदलावों के साथ अधिक मानवीय और सम्मानजनक रिश्ता व्यवस्था उभर सकती है।भारत में तलाक की दर मुख्यतः महिलाओं की आर्थिक आज़ादी, सामाजिक सोच में बदलाव,आधुनिक जीवन शैली ,सोशल टेली मीडिया दुष्प्रभाव, महिलाओं द्वारा धार्मिक आध्यात्मिक मान्यताओं को रूढ़िवादी बताना, शादी की नई परिभाषा (भावनात्मक व व्यक्तिगत संतुष्टि), पारंपरिक ढांचे के टूटने और वैवाहिक कलंक के कमजोर होने जैसी वजहों से बढ़ रही है। महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होकर, पुराने पितृसत्तात्मक नियमों को चुनौती दे रही हैं और अपनी खुशी को प्राथमिकता दे रही हैं। आधुनिक जीवनशैली और मीडिया के प्रभाव से व्यक्तिगत स्वतंत्रता और भावनात्मक संतुष्टि की माँग बढ़ी है, जिससे असहज या अपमानजनक रिश्ते कम समय तक टिकते हैं।

यह ट्रेंड शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक स्पष्ट है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में समाजिक दबाव अभी भी तलाक को संकीर्ण नजरिए से देखता है।

Back to top button
error: Content is protected !!