
**बड़ी खबर सहारनपुर:** शारदा नगर में बिना नोटिस नगर निगम की ‘अवैध’ ध्वस्तीकरण कार्रवाई से व्यापार जगत में भारी रोष: रतन सिंह यादव की अगुवाई में धरना प्रदर्शन जारी; व्यापारियों ने लगाया पार्षद और पुलिस पर मारपीट और अनुचित कार्रवाई का गंभीर आरोप, निष्पक्ष जाँच और मुआवजे की मांग तेज
सहारनपुर से एलिक सिंह :
सहारनपुर के प्रसिद्ध शारदा नगर क्षेत्र में नगर निगम द्वारा की गई अचानक और कथित तौर पर अवैध ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने स्थानीय व्यापार समुदाय में भारी रोष और आक्रोश पैदा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप सभी प्रभावित व्यापारी क्षेत्र में धरने पर बैठ गए हैं और यह विरोध प्रदर्शन खबर लिखे जाने तक लगातार जारी है, जिसका नेतृत्व रतन सिंह यादव (प्रधान) द्वारा किया जा रहा है और इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय व्यापारी मौजूद हैं, जो नगर निगम की इस कार्रवाई को पूरी तरह से अवैध बता रहे हैं, क्योंकि उनका आरोप है कि यह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना या कानूनी नोटिस के की गई है, जिससे व्यापारियों को अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों को बचाने या सामान हटाने का कोई मौका नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है; इस विरोध प्रदर्शन के दौरान, स्थानीय व्यापारी विकास कुमार गुप्ता ने नगर निगम की टीम पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब वह कार्रवाई का विरोध कर रहे थे, तो निगम की टीम के साथ आए पार्षद और अन्य लोगों द्वारा उनके साथ मारपीट की गई, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई; वहीं दूसरी ओर, इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी व्यापारियों द्वारा गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, क्योंकि पुलिस ने कथित रूप से पीड़ित विकास कुमार गुप्ता के ऊपर ही दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 107/16 के तहत कार्रवाई कर दी है, जबकि व्यापारियों का कहना है कि पुलिस को निष्पक्ष जाँच करनी चाहिए थी और दोषियों (मारपीट करने वाले पार्षद और उनके सहयोगियों) पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी, न कि पीड़ित को ही शांतिक भंग करने के आरोप में फंसाना चाहिए था; प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रतन सिंह यादव ने इस कार्रवाई को राज्य सरकार की नीति की गलती करार दिया है, उन्होंने तर्क दिया है कि प्रभावित व्यापारियों के पास उनकी जमीनों की वैध रजिस्ट्रियाँ (रजिस्ट्री) और विकास प्राधिकरण (विकास प्राधिकरण) का स्वीकृत नक्शा भी मौजूद है, जो उनकी संपत्तियों की कानूनी वैधता को साबित करता है, अतः नगर निगम की कार्रवाई मनमानी और अन्यायपूर्ण है; रतन सिंह यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन को सचमुच रास्ते का चौड़ीकरण करना है, तो उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस चौड़ीकरण की प्रक्रिया में जिन व्यापारियों का वैध नुकसान हो रहा है, उन सभी को उचित और पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए, क्योंकि बिना मुआवजे के निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है; शारदा नगर के व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि नगर निगम की कार्रवाई के पीछे भ्रष्टाचार और निजी हितों का दबाव हो सकता है, जिसके कारण कानूनी प्रक्रियाओं का जानबूझकर उल्लंघन किया गया और रातोंरात कार्रवाई को अंजाम दिया गया; व्यापारियों ने जिलाधिकारी (DM) और नगर आयुक्त (Nagar Ayukt) से अपील की है कि वे तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करें, अवैध ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को तत्काल रोकें, मारपीट करने वाले पार्षद और निगम कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें, और सबसे महत्वपूर्ण, पीड़ित व्यापारी विकास कुमार गुप्ता पर लगाई गई अनुचित 107/16 की कार्रवाई को रद्द करें और सभी प्रभावित व्यापारियों के लिए क्षतिपूर्ति (मुआवजा) सुनिश्चित करें; यह विरोध प्रदर्शन नगर निगम और स्थानीय व्यापार समुदाय के बीच एक बड़े टकराव का संकेत दे रहा है, और यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो यह मामला और भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे शहर की कानून-व्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि सभी व्यापारी अपनी रोजी-रोटी और वैध संपत्ति की सुरक्षा की मांग पर अडिग हैं और न्याय मिलने तक धरना जारी रखने का संकल्प ले चुके हैं।













