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कांचे रे बास के बहगिया, बहगी लचकत जाए…” गीतों की गूंज के बीच व्रती माताएं-बहने बैंड-बाजे संग पहुंचीं छठ घाट, अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य

महुली सोनभद्र (राकेश कुमार कन्नौजिया)_
आस्था और श्रद्धा के महापर्व छठ पूजा के तीसरे दिन रविवार की शाम का नज़ारा विंढमगंज थाना क्षेत्र के महुली-फुलवार के बीच बहने वाली मलिया नदी के तट पर देखने लायक था। “कांचे रे बास के बहगिया, बहगी लचकत जाए…” जैसे पारंपरिक लोकगीतों की मधुर गूंज और बैंड-बाजों की धुनों के बीच व्रती माताएं और बहनें दंडवत करते हुए घाट की ओर बढ़ीं। हर तरफ श्रद्धा, संगीत और भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई दिया।

व्रती महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से अस्ताचलगामी सूर्य देव को पहला अर्घ्य अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि, संतानों की दीर्घायु तथा समाज में शांति की कामना की। “छठ मइया की जय” और “जय सूर्य देव” के जयघोष से घाट का वातावरण गूंज उठा।

इस वर्ष महुली फुलवार के बीच बहने वाली मलिया नदी के घाट को छठ पूजा सेवा समिति न्याय पंचायत महुली द्वारा भव्य तरीके से सजाया गया। रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों की झालरों और तोरण द्वारों से सजा घाट भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी मंडल अध्यक्ष  के नेतृत्व में सभी पदाधिकारियों के सहयोग से घाट पर साफ-सफाई, सुरक्षा और जल व्यवस्था की पुख्ता तैयारी की गई थी।

शाम ढलते ही महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजी, सिर पर पूजा सामग्री लिए जब घाट की ओर बढ़ीं, तो दृश्य अत्यंत मनमोहक हो उठा। मलिया नदी के शांत जल पर सूर्य की लालिमा और दीपों की झिलमिलाहट ने एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया।

अब सोमवार की सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह महापर्व संपन्न होगा, जिसके बाद व्रती माताएं व्रत खोलकर परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करेंगी।

 

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