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लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार के मिलीभगत से गुणवत्ता के नाम पर चल रहा मज़ाक – बिना नमी, बिना मानक से सड़क बिछाई जा रही

IMG 20251028 WA0035चित्रसेन घृतलहरे, 28 अक्टूबर 2025,सरसींवा //लोक निर्माण विभाग (PWD), जो सड़कों और भवनों के निर्माण की प्रमुख एजेंसी है, का दायित्व है कि वह जनता को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराए। इसके लिए विभाग समय-समय पर पैच रिपेयरिंग और मरम्मत कार्य करता है ताकि आवागमन में किसी को असुविधा न हो।

लेकिन भिनोदा–गगोरी मार्ग की हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। यह सड़क लंबे समय से जर्जर अवस्था में थी। स्थानीय पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार शासन-प्रशासन को इसकी शिकायतें और रिपोर्टें भेजी गईं। आखिरकार विभाग ने पैच रिपेयरिंग का टेंडर जारी किया, मगर काम की गुणवत्ता देखकर सवाल उठना लाजमी है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से कार्य में भारी अनियमितता की जा रही है। नियमों के अनुसार सड़क निर्माण में Wet Mix Macadam (WMM) का उपयोग अनिवार्य है — यह मिश्रण संयंत्र (मिक्सचर प्लांट) में तैयार होता है, जहाँ विभिन्न आकार की गिट्टियों को पानी के साथ मिलाकर उचित नमी (Optimum Moisture) पर लाया जाता है ताकि सड़क मजबूत और समतल बने।

लेकिन इस मार्ग पर क्रैशर से सीधे गिट्टी लाकर बिना उचित मिश्रण और नमी के सड़क पर डाल दी जा रही है। केवल रोलर चलाकर काम पूरा दिखाया जा रहा है। न तो सड़क की मोटाई मानक अनुसार है, न ही आवश्यक घनत्व (Density) प्राप्त हो रहा है। परिणामस्वरूप सड़क की सतह असमान, ढीली और कमजोर दिखाई दे रही है।

एस्टीमेट के अनुसार सड़क निर्माण में पानी का उपयोग अनिवार्य है ताकि गिट्टी आपस में अच्छे से बंध सके और वॉयड (खाली जगह) न रह जाए। लेकिन यहाँ बिना नमी और कम्पैक्शन के ही सड़क बिछाई जा रही है। गांव के बाहरी हिस्सों में तो स्थिति और भी खराब है — न तो उचित मोटाई रखी जा रही है और न ही गुणवत्ता नियंत्रण के मापदंडों का पालन।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह घटिया निर्माण कार्य किन अधिकारियों की निगरानी में हो रहा है? क्या संबंधित अभियंता स्थल निरीक्षण कर रहे हैं? अगर हाँ, तो फिर इतनी स्पष्ट लापरवाही पर कार्रवाई क्यों नहीं?

जनता अब जवाब मांग रही है — “क्या गुणवत्ताहीन निर्माण पर जिम्मेदार अधिकारी हमेशा ऐसे ही संरक्षक बने रहेंगे?

जनता की मांग है कि शासन इस प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराए और दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जा सके।

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