
।। कुदरहा ब्लॉक में भ्रष्टाचार का ‘अकेला’ मॉडल: कागजों पर हरियाली दिखाकर सरकारी खजाने में लगाई सेंध!
अकेला कुबेरपुर में 'अदृश्य' विकास: न पेड़ लगे न खुदाई हुई, प्रधान-सचिव की जुगलबंदी ने डकारे लाखों!
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। भ्रष्टाचार की ‘जड़ों’ में डूबी ग्राम पंचायत: कागजों पर उगे पेड़, हकीकत में प्रधान-सचिव डकार गए लाखों।।
मंगलवार 20 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
बस्ती।। जनपद के कुदरहा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत अकेला कुबेरपुर में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का ऐसा नंगा नाच चल रहा है जिसे देखकर गांव के लोग दंग हैं। यहाँ कागजी घोड़े इस कदर दौड़ रहे हैं कि धरातल पर जो काम हुआ ही नहीं, उसका भुगतान भी हो चुका है। ताज़ा मामला वृक्षारोपण का है, जहाँ बिना एक भी पौधा रोपे लाखों रुपए की सरकारी धनराशि बंदरबांट कर ली गई।
💫कागजों में हरियाली, धरातल पर धूल
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। जिस जगह पर सरकारी दस्तावेजों में हजारों पेड़ लगाने का दावा किया गया है, वहां मौके पर एक तिनका तक नजर नहीं आ रहा। आक्रोशित ग्रामीणों ने इस ‘अदृश्य बागवानी’ का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
💫घोटालों की लंबी फेहरिस्त
यह केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, अकेला कुबेरपुर में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं:
🔥चकमार्ग पर मिट्टी पटाई: बिना काम कराए भुगतान निकाला गया।
🔥नाला सफाई व खुदाई: कागजों में नाले साफ हो गए, लेकिन जमीन पर वे आज भी पटे पड़े हैं।
🔥कुआं मरम्मत: जीर्णोद्धार के नाम पर सिर्फ धन की उगाही की गई।
💫बीडीओ की ‘शरण’ में घोटालेबाज?
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह पूरा खेल ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (BDO) की शह पर चल रहा है। मिलीभगत का आलम यह है कि शिकायतों के बावजूद जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि “जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे करें?”
💫जांच की मांग, आंदोलन की चेतावनी
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन में खलबली तो मची है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सरकारी धन की रिकवरी करते हुए भ्रष्ट प्रधान व सचिव पर मुकदमा दर्ज किया जाए। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
















