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केंद्र का बजट झारखंड के साथ अन्यायपूर्ण, जनता के हितों की घोर अनदेखी : श्याम जी महतो

IMG 20260202 WA0069 1केंद्र का बजट झारखंड के साथ अन्यायपूर्ण, जनता के हितों की घोर अनदेखी : श्याम जी महतो

रिपोर्टर/राशीद अंसारी

खलारी। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए वर्ष 2026-27 के आम बजट को लेकर झारखंड में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के खलारी प्रखंड अध्यक्ष श्याम जी महतो ने बजट को झारखंड विरोधी, असंवेदनशील और भेदभावपूर्ण करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट खनिज-संपन्न राज्य झारखंड के साथ वर्षों से हो रहे अन्याय की निरंतरता को दर्शाता है।

श्याम जी महतो ने जारी प्रेस बयान में कहा कि झारखंड देश को कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिज संसाधनों से समृद्ध करता है, इसके बावजूद राज्य को उसका वैध हक लगातार नहीं दिया जा रहा। कोल कंपनियों पर झारखंड का करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया है, लेकिन बजट में इस राशि की वसूली को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि मनरेगा मद में लंबित भुगतान, जीएसटी लागू होने से झारखंड को हुई भारी राजस्व क्षति और केंद्रीय योजनाओं में कटौती जैसे गंभीर मुद्दों पर बजट पूरी तरह मौन है। इससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, गरीब मजदूरों और किसानों पर सीधा असर पड़ेगा।

कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य की अनदेखी

श्याम जी महतो ने आरोप लगाया कि कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और आधारभूत संरचना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की बजट में घोर उपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की सख्त जरूरत है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं की।

उन्होंने यह भी कहा कि बजट में कुछ चुनिंदा राज्यों को विशेष पैकेज और अतिरिक्त संसाधन देकर क्षेत्रीय असंतुलन को और बढ़ाया गया है, जबकि झारखंड को उसके अधिकार से वंचित रखा गया।

“झामुमो करेगा संघर्ष”

श्याम जी महतो ने स्पष्ट कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इस भेदभावपूर्ण नीति का पुरजोर विरोध करेगा। उन्होंने कहा,

“यह बजट झारखंड की जनता के साथ खुला अन्याय है। झामुमो समान अधिकार, बकाया राशि की तत्काल वसूली और राज्य के सर्वांगीण विकास की मांग करता है। जनता इस अन्याय का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।”

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि झारखंड के प्रति सौतेला रवैया समाप्त किया जाए और राज्य को उसका संवैधानिक अधिकार तुरंत दिया जाए।

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