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खलारी का चूरी-सपही पुल मौत के मुहाने पर।।

"सीसीएल की कोयला भूख और प्रशासन की बेपरवाहियों ने ढहा दिया सुरक्षा का ढांचा"

FB IMG 1770367639608 FB IMG 1770367642889खलारी का चूरी-सपही पुल मौत के मुहाने पर।।

“सीसीएल की कोयला भूख और प्रशासन की बेपरवाहियों ने ढहा दिया सुरक्षा का ढांचा”

रिपोर्टर/राशीद अंसारी

खलारी। विकास की अंधी दौड़ और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) की बेलगाम कोयला ढुलाई ने खलारी की जीवनरेखा कहे जाने वाले चूरी-सपही पुल को मौत के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। क्षमता से कई गुना अधिक कोयले के ट्रकों ने इस पुल की नींव को छलनी कर दिया है, और अब यह केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि एक टिक-टिक करता टाइम बम बन चुका है।

“भ्रष्टाचार की दरारें और दिखावे की कार्रवाई”

हफ्तों तक शिकायतों को नजरअंदाज करने के बाद, जब जन-आक्रोश फूटा, तो जिला प्रशासन ने सिर्फ डेंजर बोर्ड टांगकर अपनी जिम्मेदारी टाल दी। भारी वाहनों पर कानूनी रोक तो लगा दी गई, लेकिन सवाल वही है: क्या यह बोर्ड बच्चों और मरीजों की जान बचा पाएगा? पुल के ऊपरी हिस्से से सीमेंट का प्लास्टर उखड़ चुका है और सरिए खुले हुए हैं, जो सिस्टम की विफलता की कहानी बयां कर रहे हैं।

“सिर्फ एक बाइक गुजरने पर भी कांपता है पुल”

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब एक छोटी मोटरसाइकिल भी पुल से गुजरती है, तो पूरा ढांचा भूकंप जैसी थरथराहट महसूस कराता है। ग्रामीणों का आरोप है कि CCL को सिर्फ कोयला ढुलाई और टर्नओवर की चिंता है, और आम जनता की जान उनके लिए कौड़ियों के भाव है।

“लाशों की इंतजार में प्रशासन, आक्रोश की चिंगारी”

ग्रामीणों के अनुसार स्थानीय विधायक और सांसद की चुप्पी रहस्यम है। जिससे ग्रामीण आक्रोशित हैं। साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पुल की तत्काल मरम्मत या नवनिर्माण नहीं हुआ, तो वे आर्थिक चक्का जाम कर कोयले की ढुलाई रोक देंगे।

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