

🚨🔥 इंसानियत हुई शर्मसार! बेहट के नादराणा में बेजुबान वन्य जीव का निर्मम शिकार, गोली मारकर मांस निकालने की आशंका — वन विभाग और पुलिस पर उठे गंभीर सवाल 🔥🚨
जनपद सहारनपुर के थाना बेहट क्षेत्र के नादराणा गांव में वन्य जीव के शिकार की एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर हिंदू संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे, जहां कथित रूप से एक वन्य जीव के अवशेष पाए गए। घटनास्थल की स्थिति देखकर आशंका जताई जा रही है कि नीलगाय को पहले गोली मारकर घायल किया गया और बाद में उसके शरीर से मांस निकाला गया। मौके पर पड़े अवशेष इस पूरी घटना की गंभीरता की गवाही दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार की घटना क्षेत्र में दूसरी बार सामने आई है, जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं। उनका आरोप है कि शिकारियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे दिनदहाड़े या रात के अंधेरे में बेखौफ होकर वन्य जीवों को निशाना बना रहे हैं। यह घटना न केवल वन्य जीव संरक्षण कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाती है, बल्कि मानवता पर भी सवाल खड़े करती है।
हिंदू संगठन के पदाधिकारी हरीश कौशिक ने बताया कि सूचना मिलते ही वे अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे और संबंधित विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि वन विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी। संगठन के कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
इस घटना ने वन विभाग और पुलिस की सतर्कता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था मजबूत होती तो शायद इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकती थीं। वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों के बावजूद यदि शिकार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नीलगाय जैसे वन्य जीव पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनका अवैध शिकार न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी गंभीर खतरा है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि वन क्षेत्र में सीसीटीवी निगरानी, रात्रि गश्त और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जाए, ताकि शिकारियों पर लगाम लगाई जा सके।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन घटनाओं का जिम्मेदार कौन है? क्या शिकारियों को किसी प्रकार का संरक्षण प्राप्त है, या फिर कानून का भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है? प्रशासन के लिए यह घटना एक चेतावनी है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वन्य जीवों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।
संपादक – एलिक सिंह
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़, सहारनपुर
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