
अजीत मिश्रा (खोजी)
🏥 भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा चिलमा सैनिया का आरोग्य मंदिर: क्या सीएमओ के रसूख से बड़ा है एक सीएचओ का ‘सुविधा शुल्क’?🏥
- सरकार की मंशा पर फिर रहा पानी: ताले में कैद स्वास्थ्य सुविधाएं, तड़प रहे ग्रामीण!
- जब उप-केंद्र पर लटकता है ताला, तो कहाँ गायब हो रही हैं सरकारी दवाएं? बड़ा सवाल!
- दर्जनों बार छपी खबर, फिर भी बेअसर; क्या CHC अधीक्षक सुशील कुमार को नहीं है किसी का खौफ?
- CMO राजीव निगम के लिए चुनौती बना चिलमा सैनिया का ताला: क्या खुलेगा द्वार या बिकेगा ईमान?
ब्यूरो रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश 07 अप्रैल 2026
दुबौलिया (बस्ती) ।। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाने का दम भर रही है, लेकिन बस्ती जिले के दुबौलिया विकास खंड में सरकारी दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर चिलमा सैनिया भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत स्मारक बन चुका है, जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर केवल गेट पर लगा ‘ताला’ ग्रामीणों का स्वागत करता है।
🎯खबरें बेअसर, तंत्र मौन: क्या अधीक्षक ने ओढ़ ली है चुप्पी?
हैरानी की बात यह है कि CHO अभिषेक कुमार की डयूटी से नदारद रहने की खबरें दर्जनों बार प्रमुख समाचार पत्रों की सुर्खियां बन चुकी हैं। बावजूद इसके, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुबौलिया के प्रभारी अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार की रहस्यमयी चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर क्या कारण है कि दर्जनों बार मीडिया में मामला आने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई? क्या अधीक्षक की ‘मनमानी’ को जिले के आला अधिकारियों का मूक समर्थन प्राप्त है?
🎯’सुविधा शुल्क’ का खेल और गायब होती सरकारी दवाएं
सूत्रों की मानें तो CHO अभिषेक कुमार की इस निरंतर अनुपस्थिति के पीछे ‘सुविधा शुल्क’ का काला खेल फल-फूल रहा है। चर्चा है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की जेबें गरम कर यह कर्मचारी घर बैठे वेतन डकार रहा है। जब केंद्र पर ताला लटका रहता है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपये की सरकारी दवाएं और लॉजिस्टिक कहाँ जा रहे हैं? क्या यह दवाएं कागजों पर बांटी जा रही हैं या फिर इन्हें खुले बाजार में खपाया जा रहा है? यह एक उच्च स्तरीय जांच का विषय है।
🎯सीएमओ बस्ती के लिए साख की चुनौती
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. राजीव निगम के लिए चिलमा सैनिया उप स्वास्थ्य केंद्र का ताला खुलवाना और वहां समय से संचालन सुनिश्चित करना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है। BCPM, DCPM और MOIC की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल सीधे तौर पर जिले के स्वास्थ्य प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हैं।
🎯सरकार की मंशा पर पानी फेरता विभाग
एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहे हैं, वहीं बस्ती का स्वास्थ्य विभाग अपनी कार्यप्रणाली से सरकार की छवि धूमिल कर रहा है। ग्रामीण इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी बंद कमरों में बैठकर फाइलों पर ‘ऑल इज वेल’ की रिपोर्ट लिख रहे हैं।
- दुबौलिया का ‘बीमार’ सिस्टम: ड्यूटी से गायब CHO और चुप्पी साधे अफसर!
- स्वास्थ्य विभाग की ‘अंधेरगर्दी’: चिलमा सैनिया में इलाज नहीं, सिर्फ ताला मिलता है!
- रसूख और रुपयों के दम पर चल रहा स्वास्थ्य विभाग का खेल!
अब देखना यह है कि इस♣ खबर के बाद प्रशासन की नींद टूटती है या फिर चिलमा सैनिया का यह ‘आरोग्य मंदिर’ इसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रहेगा।

















