

बलौदा बाजार।
नगर की ऐतिहासिक पहचान और आस्था का केंद्र राम सागर तालाब आखिरकार खबरों में आने के बाद जिम्मेदारों को याद आया। लंबे समय से उपेक्षित इस प्राचीन धरोहर के गहरीकरण (डीपेनिंग) कार्य को लेकर अब नगर पालिका अध्यक्ष जैन जी सक्रिय नजर आ रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सक्रियता समय पर होती तो जनता को इतनी परेशानी झेलनी पड़ती?
जानकारी के अनुसार, राम सागर तालाब के गहरीकरण की स्वीकृति मिलने के बावजूद नगर पालिका द्वारा बिना ठोस योजना के कार्य शुरू किया गया। परिणामस्वरूप, करीब 2 से 3 महीनों तक काम अधूरा पड़ा रहा, जिससे आसपास के वार्डों के रहवासियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। धूल, गंदगी और अव्यवस्था के कारण लोगों की दिनचर्या तक प्रभावित हुई, लेकिन जिम्मेदारों ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि
“जब तक मीडिया में मुद्दा नहीं उठा, तब तक किसी ने सुध नहीं ली। अब सिर्फ औपचारिकता निभाते हुए भूमि पूजन कर दिया गया है, लेकिन असली काम कब पूरा होगा, यह अब भी अनिश्चित है।”
सबसे बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि भूमि पूजन के बाद भी पानी भराव की कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की गई है। ऐसे में यह आशंका बनी हुई है कि कहीं यह परियोजना भी कागजों और घोषणाओं तक ही सीमित न रह जाए।
नगरवासियों में नाराजगी साफ देखी जा सकती है। उनका कहना है कि
“तालाब सिर्फ जलस्रोत नहीं, हमारी विरासत है। इसके साथ इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर पालिका प्रशासन केवल दिखावे तक सीमित रहता है या वास्तव में राम सागर तालाब को उसकी पुरानी गरिमा लौटाने के लिए ठोस और समयबद्ध कार्रवाई करता है।*




