
कोरबा जिला प्रशासन भले ही विकास के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। आकांक्षी ब्लॉक पोंडी उपरोड़ा के ग्राम पंचायत मानिकपुर का आश्रित गांव आमपानी आज भी आजादी के इतने साल बाद मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।

*बुनियादी सुविधाओं से वंचित 120 परिवार*
पहाड़ की ऊंचाई पर बसे इस गांव में करीब 120 परिवार रहते हैं। यहां पहुंचने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है। ग्रामीण रोज उबड़-खाबड़ जंगल के रास्तों से आवाजाही करने को मजबूर हैं। गांव में न बिजली की स्थायी व्यवस्था है, न स्कूल और न ही आंगनबाड़ी। कुछ घरों में सोलर प्लेट जरूर लगी है, लेकिन वह भी भरोसेमंद नहीं है।

*डेढ़ किमी दूर से लाते हैं पानी*
भीषण गर्मी में सबसे बड़ी समस्या पानी की है। पूरे गांव में एक भी बोरवेल नहीं है। ऐसे में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे रोज डेढ़ किलोमीटर दूर ढोंडी तक जंगल के खतरनाक रास्तों से पैदल जाकर पानी लाते हैं।

*”चुनाव के बाद भूल जाते हैं नेता”*
ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और क्षेत्रीय विधायक सिर्फ चुनाव के समय गांव आते हैं। बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्याएं जस की तस रह जाती हैं। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन समाधान नहीं निकला।
ग्रामीणों ने बताया, “सरकार गांव-गांव तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का दावा करती है, पर आमपानी के लिए ये योजनाएं सिर्फ खबरों और घोषणाओं तक सीमित हैं।”

*प्रशासन पर सवाल*
कैमरे में कैद ये तस्वीरें विकास के दावों की पोल खोल रही हैं। सवाल यही है कि आखिर इस गांव तक विकास कब पहुंचेगा? कब यहां के लोगों को सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं मिल पाएंगी? अब देखना होगा कि प्रशासन इन ग्रामीणों की समस्याओं पर कब ध्यान देता है।






