
‘खुजली’ के मरीज़ को उतार दिया मौत के घाट, ऐसी डॉक्टरी डिग्री को बीच चौराहे पर जला देना चाहिए!
बस्ती में 'अमृत' के नाम पर बंट रहा 'ज़हर': मामूली खुजली पर ठोक दिए तीन गलत इंजेक्शन, महिला की मौत!
अजीत मिश्रा (खोजी)
ब्यूरो रिपोर्ट: ‘अमृत’ के नाम पर ‘ज़हर’ बांटते बस्ती के निजी अस्पताल, ज़िम्मेदार कब तक मौन रहेंगे?
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
- मुंडेरवा का ‘कसाईखाना’: तड़पती महिला को एम्बुलेंस तक नहीं दी, जबरन बाइक पर बिठाकर अस्पताल से खदेड़ा!
- सिर्फ अस्पताल मालिक ही क्यों? बस्ती के CMO और डिप्टी CMO डॉ. एस.बी. सिंह पर भी दर्ज हो हत्या का मुकदमा!
- चंद रुपयों की हवस और भ्रष्ट अफसरों की जुगलबंदी; बस्ती में कब तक बेगुनाह बनते रहेंगे ‘मेडिकल माफिया’ का शिकार?
- साहब के दफ्तर से बिकते हैं मौत के लाइसेंस! मानक-विहीन अस्पतालों पर कब तक मेहरबान रहेगा बस्ती का स्वास्थ्य महकमा?
- इलाज या हत्या? बिना डॉक्टर की सलाह के नर्सों ने लगाए तीन इंजेक्शन, बुझ गया घर का चिराग!
- बस्ती मंडल शर्मसार: फर्जी डॉक्टरों की लापरवाही से एक और सुहाग उजड़ा, जनता में भारी आक्रोश!
अगर मामूली ‘खुजली’ के मरीज़ इलाज कराने के बाद ज़िंदा घर न लौटें, तो ऐसी डॉक्टरी डिग्रियों को चौराहे पर जला देना चाहिए। बस्ती जनपद के मुंडेरवा थाना क्षेत्र के ‘अमृत हॉस्पिटल’ में जो हुआ, वह महज़ एक ‘मेडिकल लापरवाही’ नहीं, बल्कि सीधे-सीधे हत्या का मामला है। हालांकि, अस्पताल के मालिक मनीष श्रीवास्तव पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, लेकिन क्या इतना काफी है? क्या केवल एक कथित डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज कर लेने से उन असली गुनहगारों के हाथ साफ हो जाते हैं जो एयरकंडीशंड दफ्तरों में बैठकर इन ‘मौत के अड्डों’ को हरी झंडी देते हैं?
पैसों की हवस और सिस्टम की जुगलबंदी
आखिर चंद रुपयों की लालच में इंसानी जिंदगी को कीड़े-मकौड़ों से भी बदतर कब तक समझा जाएगा? 14 मई की रात जब अनिल कुमार अपनी पत्नी को लेकर अमृत हॉस्पिटल पहुंचे, तो उन्हें क्या पता था कि वे अपनी जीवनसंगिनी को इलाज दिलाने नहीं, बल्कि यमराज के नुमाइंदों के हवाले करने जा रहे हैं।
मरीज़ को सिर्फ सामान्य खुजली थी। अस्पताल में मौजूद बिना योग्यता वाले स्टाफ और नर्सों ने बिना किसी डॉक्टर की सलाह के ताबड़तोड़ तीन इंजेक्शन ठोक दिए। इंजेक्शन लगते ही महिला तड़पने लगी, शरीर में भयानक दर्द हुआ और मुंह से झाग निकलने लगा। यह मंज़र देखकर अस्पताल कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। संवेदनहीनता की हद तो तब पार हो गई जब गिड़गिड़ाने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने एम्बुलेंस देने से साफ मना कर दिया और तड़पती हुई महिला को जबरन मोटरसाइकिल पर बिठाकर रफा-दफा कर दिया। सदर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जो कहा, वह इस सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है— “गलत इंजेक्शन दिए जाने के कारण मरीज़ की हार्ट पंपिंग बंद हो चुकी थी।” असली गुनहगार कौन? CMO और नोडल डिप्टी CMO पर कब गिरेगी गाज?
- इस पूरे कांड में सबसे बड़ा सवाल बस्ती के स्वास्थ्य महकमे पर उठता है। गलती सिर्फ फर्जीवाड़ा करने वाले मनीष श्रीवास्तव की नहीं है।
- असली दोषी तो बस्ती के सीएमओ (CMO) और नोडल डिप्टी सीएमओ डॉ. एस.बी. सिंह जैसे अधिकारी हैं, जिनकी नाक के नीचे ऐसे अवैध और मानक-विहीन अस्पताल फल-फूल रहे हैं।
- जनता यह पूछना चाहती है कि बिना योग्य डॉक्टरों, बिना पुख्ता इंफ्रास्ट्रक्चर और बिना इमरजेंसी बैकअप के ऐसे अस्पतालों को लाइसेंस कैसे जारी कर दिए जाते हैं?
- क्या इन अधिकारियों की लापरवाही और कथित ‘साठगांठ’ के चलते ही आम जनता को अपनी जान गंवानी पड़ रही है?
सही मायने में, दर्ज हुई एफआईआर में इन दोनों बड़े अधिकारियों के नाम भी बतौर सह-आरोपी शामिल होने चाहिए। जब तक एयरकंडीशंड कमरों में बैठे इन ज़िम्मेदार अफसरों पर कानूनी हंटर नहीं चलेगा, तब तक निजी अस्पतालों के रूप में खुले ये ‘कसाईखाने’ बंद नहीं होने वाले।
जनता की आवाज़: बस्ती मंडल की जनता अब जाग चुकी है। ‘अमृत’ के नाम पर ज़हर बेचने वाले मनीष श्रीवास्तव, अज्ञात लापरवाह स्टाफ और इन्हें संरक्षण देने वाले स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों पर जब तक कड़ी से कड़ी और ऐसी कार्रवाई नहीं होती जो नज़ीर बने, तब तक यह आक्रोश थमने वाला नहीं है। आज एक बेगुनाह महिला सिस्टम की भेंट चढ़ गई, कल कोई और होगा। इस ‘मेडिकल माफिया’ और ‘अफसरशाही’ के गठजोड़ को अब ध्वस्त करना ही होगा!



















