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यूपी पुलिस में भ्रष्टाचार के खिलाफ सिपाही की बगावत; बोला- ‘सच बोलने पर नौकरी कुर्बान’

सिस्टम से टकराया सिपाही: लखनऊ पुलिस लाइन में अवैध वसूली का आरोप, वीडियो वायरल होने के बाद 12 कर्मी हटाए गए ‘मैंने गीता पढ़ी है, मौत का डर नहीं’... भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सिपाही सुनील शुक्ला की दास्तान

अजीत मिश्रा (खोजी)

यूपी पुलिस में भ्रष्टाचार के खिलाफ सिपाही की बगावत: ‘सच बोलने पर नौकरी कुर्बान’

  • खाकी के भीतर ‘जमींदारी सिस्टम’! सिपाही ने खोली ड्यूटी और मेडिकल बिल में ‘कमीशनखोरी’ की पोल
  • सिपाही का सिस्टम से युद्ध: “अन्याय के खिलाफ लड़ना ही सच्ची सेवा, सच की कीमत नौकरी है तो मंजूर”
  • लखनऊ पुलिस लाइन में हड़कंप: सिपाही के गंभीर आरोपों के बाद महकमे में बड़ी कार्रवाई, 12 पर गिरी गाज

विशेष संवाददाता, लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे के भीतर भ्रष्टाचार और ‘कमीशनखोरी’ के खिलाफ एक साधारण सिपाही द्वारा मोर्चा खोले जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। लखनऊ कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात वर्ष 2015 बैच के सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई वीडियो जारी कर विभाग के भीतर चल रहे कथित संगठित भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। सिपाही के इन गंभीर आरोपों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्टर्स ने पूरे पुलिस मुख्यालय से लेकर शासन स्तर तक हड़कंप मचा दिया है।

​’सच की कीमत नौकरी है, तो मंजूर है’

​वायरल हो रहे संदेशों में सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने सीधे तौर पर व्यवस्था को चुनौती दी है। उनके इस अभियान को जनता और सोशल मीडिया पर ‘सिपाही का सिस्टम से युद्ध’ के रूप में देखा जा रहा है। सिपाही का कहना है, “मैंने गीता पढ़ी है, इसलिए मौत का डर नहीं! अन्याय के खिलाफ लड़ना ही सच्ची सेवा है। अगर सच बोलने का इनाम नौकरी जाना है, तो मुझे यह भी मंजूर है।”

​रिपोर्ट में लगाए गए 4 बड़े सनसनीखेज आरोप:

​सिपाही सुनील शुक्ला द्वारा जारी किए गए बयानों और साक्ष्यों के आधार पर विभाग की कार्यप्रणाली पर निम्नलिखित गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं:

  1. हर काम की ‘फीस’ तय (अवैध वसूली): आरोप है कि पुलिस लाइन में तैनात जवानों की गार्ड ड्यूटी लगाने, मेडिकल बिल पास कराने और एचआरए (मकान किराया भत्ता) स्वीकृत करने के नाम पर हर जगह अवैध वसूली का खेल चल रहा है। प्रत्येक सिपाही से ₹2,000 तक वसूलने की बात सामने आई है।
  2. अंग्रेजों वाली सामंती व्यवस्था: शुक्ला ने आरोप लगाया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी पुलिस विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा ‘पुराना जमींदारी सिस्टम’ चलाया जा रहा है, जहाँ निचले स्तर के कर्मियों का मानसिक और आर्थिक शोषण होता है।
  3. 10 साल का शोषण और खत्म हुआ डर: इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी ग्रेजुएट सिपाही ने कहा कि उन्होंने पिछले 10 वर्षों में इस अन्याय और शोषण को करीब से देखा है। अब भय समाप्त हो चुका है और वे केवल सच के साथ खड़े हैं।
  4. आवाज उठाने पर दमन की कोशिश: सिपाही का आरोप है कि जब उन्होंने इस मुद्दे पर आवाज उठाई, तो उनके घर पर छापेमारी कर उन्हें डराने और चुप कराने की कोशिश की गई।

​वीडियो वायरल होते ही एक्शन: 12 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

​सिपाही सुनील शुक्ला द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाने और मामला सोशल मीडिया पर पूरी तरह गरमाने के बाद लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में हड़कंप मच गया। प्राथमिक संज्ञान लेते हुए सोमवार को तत्काल प्रभाव से गणना कार्यालय (रोस्टर ऑफिस) में तैनात एक दरोगा और हेड कांस्टेबल सहित 12 पुलिसकर्मियों को पद से हटा दिया गया है। विभाग ने इस मामले की आंतरिक जांच के आदेश भी दे दिए हैं।

​पुलिस मुख्यालय की सोशल मीडिया नीति पर सख्ती

​इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। इस बगावती रुख और लगातार वायरल हो रहे वीडियो को देखते हुए डीजीपी मुख्यालय ने सभी यूनिटों को अपनी ‘सोशल मीडिया पॉलिसी-2023’ का कड़ाई से पालन कराने और आपत्तिजनक या विभागीय छवि धूमिल करने वाले पोस्ट डालने वाले पुलिसकर्मियों की मासिक रिपोर्ट भेजने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

​’सिस्टम बनाम सिपाही’ की बहस तेज

​मूल रूप से अमेठी के रहने वाले सिपाही सुनील शुक्ला के इस कदम ने जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां सोशल मीडिया पर उन्हें “सच बोलने वाला जांबाज सिपाही” कहकर समर्थन मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस विभाग इसे अनुशासनहीनता और सेवा नियमावली का उल्लंघन मान रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मामले की जांच के बाद विभाग के इस ‘सिस्टम’ में क्या बड़े सुधार देखने को मिलते हैं।

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