
बांगरदा(खरगोन)अखिल भारतीय साहित्य परिषद ईकाई सनावद के तत्वावधान में 16/5/26 को काव्य निशा का स्थानीय प्रिंस यशवंत वाचनालय में आयोजन रखा गया। जिसमें मालवा प्रांत के निर्देशानुसार कवियों ने सामाजिक समरसता। पर्यावरण राष्ट्रीय एकता कुटुम्ब प्रबोधन की और बस्ती से जुड़ने और गौ रक्षा जैसी विषय आधारित रचनाओं का पाठ किया। कवि मनोहर गोस्वामी की सरस्वती वंदना के बाद कवि सुरेश अत्रे गीत प्रस्तुत करते हुये कहा – बस्ती बस्ती जाना है।
गीत संस्कृति के गाना है।।
भारत माँ का एक ही सपना ,
भगवा ध्वज लहराना है।।
कवि सालिगराम मालवीय ने – कविता पाठ करते हुये कहा राह निहारती बरसाने की ग्वालन।
कहाँ छिपे हो मेरे जीवन धन।।
दरश दिखाओ व्याकुल मन मन।
कब आओगे मेरे सावन।।
कवियित्री रोशनी भगत्या ने धार भोजशाला पर कविता सुनाते हुए कहा – रख दे मेरे सर पर हाथ तु।
थाम ले माँ मेरा हाथ तु।।
वहीं कवि अतुल तम्बोली ने कहा गाय हमारी माता है हम उसका सहारा है।
फिर भी बेचारी बेबस घुम रही है सड़कों पर आवारा है।।
वरिष्ठ कवि रमेश नरिया ने गीत सुनाते हुये कहा -जिन्दगी के सफर में ओ दोस्त, हर चेहरा बुझा बुझा सा रहता है।
कवि मनोहर गोस्वामी ने संस्कृति पर गीत रखा -हम भुल रहे हैं अपनी संस्कृति,अपने वैभव को भुल रहे है।
हम भुले मनु-शतरूपा, दुष्यंत और शकुंतला को भुल रहे है।। कवि राजेन्द्र शर्मा ने मिमिक्री व्दारा सबको हँसाया। देर रात तक चले इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जय प्रकाश मिश्रा ने की एवं विशेष अतिथि जिला सहकारी बैंक सनावद के प्रबंधक अरूण जोशी जी थे ।कार्यक्रम का संचालन गीता के विव्दान और विचारक राजेन्द्र शर्मा ने किया। और आभार मनोहर गोस्वामी ने माना ।
:-रामेश्वर फूलकर पत्रकार बांगरदा 

