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बस्ती पुलिस की बड़ी कामयाबी: सीईओ बनकर करोड़ों की ठगी करने वाला शातिर साइबर अपराधी गिरफ्तार

खुद को सीईओ बताकर बैंक प्रबंधकों को लगाता था करोड़ों का चूना, बस्ती पुलिस ने दबोचा बस्ती: फर्जी सीईओ बनकर बैंकों को ठगने वाले गैंग का पर्दाफाश, एक सदस्य गिरफ्तार

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सीईओ बनकर करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गैंग का शातिर सदस्य गिरफ्तार

  • बस्ती पुलिस ने किया अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़: कंपनियों के सीईओ के नाम पर बैंक अधिकारियों से की करोड़ों की धोखाधड़ी

बस्ती, 30 जून 2026:

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक ऐसे संगठित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो देशभर में प्रतिष्ठित कंपनियों के डायरेक्टर और सीईओ बनकर बैंक प्रबंधकों को अपने जाल में फंसाते थे। पुलिस ने गिरोह के एक शातिर सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसके अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है।

ठगी का पर्दाफाश और गिरफ्तारी

​साइबर क्राइम थाना बस्ती की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सटीक सूचना पर कार्रवाई करते हुए मंगलवार सुबह करीब 8 बजे अमहट के पास से गिरोह के सदस्य अमन मिश्रा (निवासी: थाना मनकापुर, जनपद गोंडा) को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके पास से 2,500 रुपये नकद, दो फर्जी पते पर बने [Aadhaar Redacted] और 16 विभिन्न बैंकों के खातों के स्टेटमेंट बरामद किए हैं।

कैसे काम करता था यह ‘हाई-टेक’ गैंग?

​पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने पुलिस को बताया कि यह गिरोह बहुत ही शातिर तरीके से काम करता था:

  1. फर्जी पहचान: सबसे पहले गिरोह के सदस्य फर्जी पते पर [Aadhaar Redacted] बनवाते थे, जिनका उपयोग वे बैंकों में खाते खुलवाने के लिए करते थे।
  2. प्रतिरूपण (Impersonation): गिरोह इंटरनेट, गूगल और ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग कर देश की बड़ी कंपनियों के सीईओ और डायरेक्टरों की सूची और उनकी निजी जानकारी निकालते थे।
  3. व्हाट्सएप का जाल: ये अपराधी इन अधिकारियों के नाम से फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाते थे। इसके बाद, बैंक शाखा प्रबंधकों को कॉल या संदेश भेजकर खुद को कंपनी का प्रमुख बताते थे।
  4. दबाव और झांसा: शाखा प्रबंधकों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि वे किसी आपातकालीन कार्य से बाहर हैं और उन्हें एक विशिष्ट खाते में तत्काल आरटीजीएस (RTGS) या एनईएफटी (NEFT) के जरिए बड़ी धनराशि भेजनी है। वे जल्द ही आकर कागजी औपचारिकताएं पूरी करने का वादा करते थे।

मामला कब सामने आया?

​ठगी की शुरुआत तब उजागर हुई जब 5 जुलाई 2025 को बस्ती शहर के प्रतिष्ठित ‘बालकराम महादेव प्रसाद सर्राफ’ फर्म के संचालक प्रज्ज्वल गुप्ता ने शिकायत की। उन्होंने बताया कि दो अज्ञात व्यक्तियों ने दुकान से सोने के सिक्के खरीदे और 2,06,650 रुपये का संदिग्ध ऑनलाइन भुगतान किया। संशय होने पर उन्होंने तत्काल ट्रांजेक्शन फ्रीज करवाया और साइबर थाने में मुकदमा संख्या 33/2025 (धारा 319(2), 318(4) बीएनएस एवं 66-डी आईटी एक्ट) दर्ज कराया।

रकम ठिकाने लगाने का तरीका

​आरोपी ने खुलासा किया कि यदि किसी खाते से सीधे नकद निकालना संभव नहीं होता था, तो वे ठगी की रकम से ऑनलाइन पेमेंट के जरिए प्रतिष्ठित ज्वेलरी दुकानों से सोने के सिक्के खरीद लेते थे। इससे काले धन को सफेद करने और उसे ठिकाने लगाने में आसानी होती थी।

पुलिस की ‘ऑपरेशन क्लीन’

​पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन में चल रही इस जांच में अब तक चार अन्य सदस्य—विशाल वर्मा, श्रीकांत वर्मा और सोनू कुमार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। प्रभारी निरीक्षक राम कुमार राजभर की टीम, जिसमें निरीक्षक भगवान सिंह, हेड कांस्टेबल ऋषिवेद तिवारी, कांस्टेबल अमित झा और महिला कांस्टेबल रानी शामिल थीं, इस पूरे रैकेट के आर्थिक नेटवर्क को खंगाल रही है।

जनता के लिए चेतावनी

​बस्ती पुलिस ने आम जनता और बैंक अधिकारियों को सचेत किया है कि किसी भी अनजान व्हाट्सएप कॉल या संदेश पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। यदि कोई खुद को उच्च अधिकारी बताकर तत्काल फंड ट्रांसफर का दबाव डाले, तो उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर करें। साइबर अपराध की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।

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