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निलंबित संविदा उपयंत्री ने कहा कि जनपद से भोपाल तक होती है वसूली

FB IMG 3795714264167494482सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * सतना जिले में निलंबित किए गए मझगवां जनपद पंचायत के संविदा उपयंत्री सतीश समेले ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद निलंबित किए गए समेले ने दावा किया कि जनपद पंचायत से लेकर भोपाल तक कमीशन का पूरा सिस्टम संचालित होता है और उनसे भी अधिकारियों के लिए वसूली कराई जाती थी। समेले ने कहा कि वह स्वयं भी इस व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं और उनके पास ऑडियो, वीडियो सहित कई ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पेश करेंगे। उनका कहना है कि निर्माण कार्यों में नीचे से ऊपर तक अलग-अलग स्तर पर कमीशन तय रहता है और भुगतान की प्रक्रिया में कई चरणों पर धनराशि देनी पड़ती है। सतीश समेले ने आरोप लगाया कि विभाग के कई इंजीनियर अब तकनीकी कार्यों से ज्यादा वसूली के काम में लगे हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनसे भी कई बार अधिकारियों के लिए पैसा इकट्ठा कराया गया और इसकी रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है। समेले ने कहा कि निर्माण कार्यों में 10 से 15 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता है। उनका आरोप है कि उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) से लेकर अंतिम भुगतान तक कई स्तरों पर पैसा देना पड़ता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरपंच, सचिव, जीआरएस, सब इंजीनियर, सहायक यंत्री और जनपद स्तर तक कमीशन का प्रतिशत पहले से तय रहता है। समेले ने कहा, “कौन माई का लाल है जो पैसा नहीं लेता। अगर कोई नहीं लेता तो हनुमान जी के सामने अपने बेटे की कसम खाए, तब मैं मान जाऊंगा।” उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को भी निराधार बताते हुए कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है।

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