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गोरखपुर: अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी का नया ‘हब’, थाईलैंड से आ रहे ‘ओजी’ गांजे ने बढ़ाई एजेंसियों की चिंता

दहल उठा गोरखपुर: थाईलैंड से भारत तक फैला 'ओजी गांजा' नेटवर्क, बेनकाब हुए स्थानीय तस्कर गोरखपुर को 'ट्रांजिट कॉरिडोर' बनाकर नशे का कारोबार; विदेशी कनेक्शन से सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े

गोरखपुर: अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी का नया ‘ट्रांजिट कॉरिडोर’, थाईलैंड से आ रहे ‘ओजी’ गांजे ने सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ाई चिंता

  • सावधान गोरखपुर! नशे के सौदागरों का नया ‘हब’ बना शहर, युवा पीढ़ी पर मंडरा रहा खतरा
  • नेपाल-बिहार के बाद अब ‘थाईलैंड कनेक्शन’: नशे के दलदल में फंस रहा गोरखपुर
  • नोएडा की गिरफ्तारी से खुली पोल: विदेशी ‘ओजी’ गांजे की तस्करी में गोरखपुर के युवक शामिल
  • एएनटीएफ (ANTF) की नजर: गोरखपुर के रास्ते तस्करी हो रहे थाईलैंड के नशे के खिलाफ बड़े अभियान की तैयारी
  • विदेशी लिंक की तलाश: थाईलैंड से जुड़े नशा तस्करों के जाल को खंगालने में जुटी एएनटीएफ

गोरखपुर/नोएडा: उत्तर प्रदेश का गोरखपुर शहर अब केवल पर्यटन और शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी का एक बड़ा ‘ट्रांजिट हब’ बनकर उभर रहा है। नोएडा में हाल ही में पकड़े गए ‘ओजी’ (ओशियन ग्रीन) गांजे की खेप ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि थाईलैंड से भारत तक नशे का एक ऐसा जाल बिछा है, जिसकी कड़ियाँ गोरखपुर से जुड़ी हुई हैं। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की जांच ने न केवल इस नेटवर्क के स्थानीय चेहरों को बेनकाब किया है, बल्कि इसके विदेशी कनेक्शनों की भयावह तस्वीर भी सामने रखी है।

​’ओजी’ गांजा: एक महंगी और घातक लत

​’ओजी’ यानी ‘ओशियन ग्रीन’ गांजा, जो सामान्य गांजे की तुलना में कई गुना अधिक घातक और महंगा हाइड्रोपोनिक गांजा है। इसकी खेती नियंत्रित वातावरण में की जाती है, जिससे इसमें नशीले तत्वों (THC) की मात्रा बहुत अधिक होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी भारी मांग है और इसकी तस्करी करने वाले गिरोह करोड़ों का मुनाफा कमा रहे हैं।

​21 जून की कार्रवाई और खुलासे

​नोएडा में एएनटीएफ द्वारा 3.650 किलोग्राम ओजी गांजे के साथ चार युवकों की गिरफ्तारी इस पूरे मामले का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुई है। पकड़े गए आरोपितों में गोरखपुर के बेलघाट का शशांक शाही, राजघाट के तुर्कमानपुर के युवराज चौधरी और रोहन चौधरी शामिल हैं। वहीं, चौथा आरोपित प्रणय पुष्प पटना का रहने वाला है, जो नोएडा में बीबीए का छात्र है।

पूछताछ से मिली अहम जानकारियां:

  • प्रणय का सफर: प्रणय पहले खुद इस नशे का आदी था, जिसके बाद उसने इसे अपना धंधा बना लिया।
  • गोरखपुर-बैंकॉक कनेक्शन: जांच में सामने आया है कि शशांक के परिजन लंबे समय से थाईलैंड (बैंकॉक) में रह रहे हैं। पुलिस को पुख्ता संदेह है कि इसी नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए रोहन और शशांक के जरिए थाईलैंड से यह खेप भारत मंगाई जाती थी।
  • डिलीवरी मॉडल: इन लोगों का काम थाईलैंड से आने वाली खेप को रिसीव करना और उसे दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रईस उपभोक्ताओं तक ऊंचे दामों पर पहुंचाना।

​सुरक्षा एजेंसियों की नजर संदिग्धों पर

​एएनटीएफ अब इस मामले की परतें खोलने के लिए ‘फॉलो द मनी’ और ‘फॉलो द पर्सन्स’ की नीति पर काम कर रही है। पिछले कुछ महीनों में बैंकॉक से गोरखपुर आने-जाने वाले यात्रियों की सूची खंगाली जा रही है। एएनटीएफ यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कोई पेशेवर तस्कर ‘कूरियर’ के रूप में इन उड़ानों का इस्तेमाल कर रहा था। साथ ही, गोरखपुर के उन स्थानीय लोगों पर भी नजर है, जो अचानक सक्रिय हुए हैं या संदिग्ध वित्तीय लेनदेन कर रहे हैं।

​केवल ओजी गांजा ही नहीं, गोरखपुर बना ‘हॉटस्पॉट’

​गोरखपुर से होकर नशे की खेप गुजरने के मामले पिछले कुछ समय में तेजी से बढ़े हैं, जो पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं:

  1. 31 मई 2026 की कार्रवाई: कैंट पुलिस और एएनटीएफ ने संयुक्त रूप से 770 ग्राम ओजी गांजा बरामद किया, जिसकी कीमत 80 लाख रुपये थी। जांच में पता चला था कि यह खेप कोलकाता के रास्ते बिहार होते हुए गोरखपुर लाई गई थी और इसे एक स्थानीय होटल में डिलीवर किया जाना था।
  2. 29 मई का मामला: एसटीएफ ने बेलीपार क्षेत्र से 20 लाख रुपये मूल्य की चार किलोग्राम चरस बरामद की, जो नेपाल से बिहार होते हुए गोरखपुर पहुंच रही थी।
  3. नवंबर 2025 की बड़ी खेप: एसटीएफ ने 635.5 किलोग्राम गांजा बरामद किया था, जिससे साबित हुआ कि बड़े अंतरराज्यीय गिरोह गोरखपुर के रास्ते का सुरक्षित उपयोग कर रहे हैं।

​क्या है आगे की चुनौती?

​एएनटीएफ की जांच अब मुख्य रूप से इन तीन बिंदुओं पर केंद्रित है:

  • विदेशी लिंक: थाईलैंड में बैठे मुख्य सरगना कौन हैं और वहां से खेप को भारत की सीमाओं तक कौन ‘प्रायोजित’ कर रहा है?
  • वित्तीय नेटवर्क: हवाला या क्रिप्टो करेंसी के जरिए नशे का पैसा वापस विदेश कैसे भेजा जा रहा है?
  • स्थानीय रिसीवर: गोरखपुर में उस खेप को लेने वाला ‘आखिरी रिसीवर’ कौन है, जो उसे आगे की मंडियों में सप्लाई करता है?

निष्कर्ष: गोरखपुर का भौगोलिक स्थान, नेपाल सीमा की निकटता और बिहार से जुड़ाव तस्करों के लिए इसे ‘गोल्डन रूट’ बना रहा है। यदि समय रहते इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को जड़ से नहीं उखाड़ा गया, तो यह न केवल अपराध को बढ़ावा देगा, बल्कि युवाओं की एक पूरी पीढ़ी को नशे की गर्त में धकेल सकता है। एजेंसियां अब इस पूरे कॉरिडोर की मैपिंग कर रही हैं ताकि तस्करों के इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।

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