
5 वर्षीय पुत्र ने कहा कि पापा को जेल भेज दो, पत्नी और बच्चे का नाम सर्विस बुक में जुड़वाना अनिवार्य
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने आज एक सुनवाई करते हुए पिछली सुनवाई के दौरान आयोग के निर्देश पर भी सर्विस बुक में पत्नी एवं पुत्र का नाम दर्ज ना कराने पर आयोग ने अनावेदक को कड़ी फटकार लगाई है।
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्य श्रीमती नीता विश्वकर्मा ने बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष अम्बिकापुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आज प्रदेश स्तर की 259वीं सुनवाई तथा जिला स्तर में 08वीं सुनवाई की गई। सरगुजा, बलरामपुर एवं जशपुर जिले की जनसुनवाई में कुल 55 प्रकरणों में सुनवाई हुई। जिनमें से आयोग द्वारा 23 प्रकरण नस्तीबद्ध किए गए।
सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में अनावेदक की पदस्थापना जिला सूरजपुर के प्राथमिक शाला कारीमाटी में प्राइमरी स्कूल में सहायक शिक्षक के पद पर वर्ष 2011 से पदस्थ हैं तथा लगभग 39 हजार मासिक वेतन है। उसने वर्ष 2017 में आवेदिका से रीति-रिवाज से शादी किया था, जिनसे एक 05 वर्ष का पुत्र है। आवेदिका ने बताया कि वर्तमान में वह अपने पुत्र की देख-रेख स्वयं कर रही है, अनावेदक द्वारा किसी प्रकार का भरण-पोषण नहीं दे रहा है। पांच माह पूर्व पिछली सुनवाई में आयोग द्वारा दिए गए निर्देश का पालन भी आवेदक नहीं कर रहा है, जिसमें सर्विस बुक में विवाह के सात साल बाद भी अपनी पत्नी और पुत्र का नाम दर्ज नहीं कराया है। इसके सम्बन्ध में आयोग के निर्देश पर आवेदिका को आर्डर शीट की प्रमाणित प्रति निःशुल्क प्रदान की गई। जिसे लेकर वह अनावेदक के स्कूल के प्रिंसिपल और सूरजपुर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी से मिलकर अनावेदक के सर्विस बुक में अपना और अपने बेटे का नाम दर्ज कराये और अपने बेटे के लिये भरण पोषण प्राप्त कर सकती है। ऑर्डर शीट के माध्यम से समस्त अनावेदकगणों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करा सकेगी। आयोग के माध्यम से भी प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर को पत्र प्रेषित कर अनावेदक की सेवा समाप्ति पर जानकारी ली जाएगी। इस निर्देश के पश्चात आयोग से प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।






